BNS Section 336: अब जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों पर कसेगा शिकंजा, जानें सजा का प्रावधान।

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336 BNS in Hindi:  कई बार ऐसी खबरें आती हैं कि किसी के घर के कागज़ नकली बनाकर सरकारी रिकॉर्ड में दिखा दिए गए हैं, या एडमिशन लेने के लिए नकली मार्कशीट बना ली गई है। तो कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS  की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 336 क्या कहती है? BNS Section 336 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 336 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 336 उस व्यक्ति पर लागू होती है, जो किसी को नुकसान पहुंचाने या धोखा देने के इरादे से पैसे के लिए धोखे से प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट हासिल करता है या उनकी जालसाजी करता है या झूठे डॉक्यूमेंट, कागज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाता है।

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BNS section 336 important points 

  • आपको बता दें, यह धारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की पुरानी धाराओं (463, 465, 468, 469) की जगह लेती है। जिसे नए प्रवधानों के साथ लागू करके bns की धारा 336 के तहत लागू किया है।

BNS section 336 example

मान लीजिए पंकज नाम के एक आदमी ने धोखे से मोहित को नौकरी दिलाने के लिए उसके लिए नकली कागज़ात और डिग्री बनवा ली ताकि उसे नौकरी मिल जाए। लेकिन, जब मामले की जांच हुई तो वह दोषी पाया गया और आरोपी के खिलाफ यह धारा लगाई गई।

बीएनएस धारा 336 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 336 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 2 साल की कैद और जुर्माना होता है। वही गंभीर जालसाज़ी (336(3) के तहत अगर जालसाज़ी का मकसद धोखा देना है, तो 7 साल तक की सज़ा और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा (336(4)): किसी की इज़्ज़त को नुकसान पहुँचाने के इरादे से की गई जालसाज़ी, जिसमें 3 साल तक की सज़ा और जुर्माना हो सकता है।

आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

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