पिछले कुछ समय से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी विवादों में है। बीजेपी हो या राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ, सभी ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है। लेकिन सवाल ये है आखिर क्यों अब बीजेपी और संघ जो कि राहुल गांधी को निशान बनाती थी वो अब खड़गे के पीछे पड़ गई है। ऐसा क्या किया कांग्रेस ने, जो एक दलित नेता को दलित नेता के सामने ही चलती रैली में इस्तीफा देना पड़ा।
वहां जो कांग्रेस की मिट्टी पलीत हुई सो हुई, लेकिन अब एक तरफ से असम, एक तरफ गुजरात, तो एक तरफ संघ और चौथी तरफ से बीजेपी ने खड़गे को निशाने पर ले कर उन्हें बुरी तरह से फंसा दिया है। जानेंगे क्यों फंसे है खड़गे विवादों में, और साथ ही इस बात का भी विश्लेषण करेंगे कि क्या खड़गे ने वाकई में ऐसी हरकतें की है जिसके कारण उन्हें इतना घेरा जाना चाहिए।
खड़गे से जुड़े वो विवाद जो इस वक्त सुर्खियों में
पहला मुद्दा – दरअसल 9 अप्रैल को केरल के विधानसभा चुनावों में ने 140 सीटो पर वोट होने है, जिसके लेकर 5 अप्रैल 2026 को मल्लिकार्जुन केरल के इडुक्की में आयोजित चुनावी सभा में पहुंचे थे, लेकिन यहां उनके बोल बिगड़ गए। उन्होंने केरल के लोगों की तारीफ करते हुए गुजरात के लोगों को दुश्मन बना लिया। खड़गे ने सीधा कहा कि केरल के लोग पढ़े लिखे है और गुजरात के अनपढ़ जाहिल, तभी तो उन्हें की जाति धर्म के नाम पर भ्रमित नहीं कर सकता। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन को पीएम मोदी के लिए काम करने वाला शख्स बताया था।
सुधांशु त्रिवेदी ने खड़गे पर तीखा हमला किया
बस फिर क्या था, खड़गे की ये बात गुजरात के लोगों को पसंद नहीं आई। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने खड़गे पर तीखा हमला करते हुए पूछा कि अगर उन्हें गुजरात या अन्य राज्यों के लोगों कम समझदार और गवार लगते है तो महात्मा गांधी, सरदार पटेल, इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे बड़े गैर दक्षिण भारतीय नेताओं को लेकर उन्हें अपना मत स्पष्ट करना चाहिए। वो उन्हें लेकर किस तरह से विचार रखते है। हालांकि अब खड़गे को एमटी एहसास हुआ कि किसी को बेहतर बताने के लिए किसी को नीचा दिखाना जरूरी नहीं है और उन्होंने खेद भी जताया।
लेकिन हमें ये भी भूलना चाहिए कि खड़गे ने अगर केरल को सबसे साक्षर बताया तो क्या गलत कहा। वहां जाति धर्म के नाम पर बीजेपी की बांटने की नीति शिक्षित लोगों के बीच काम ही नहीं करती। तो इस मुद्दे को इतना बड़ा बनाने से पहले खड़गे का ऐसा कहने के पीछे का क्या मत था उसके बार में विश्लेषण नहीं होना चाहिए। आपका क्या सोचते है हमें जरूर बताएं।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज
दूसरा मुद्दा- 9 अप्रैल 2026 को ही पूर्वोतर राज्य असम में भी विधानसभा चुनाव होने है. जहां पहले से बीजेपी की सरकार है। 126 सीटो पर होने वाले चुनाव को लेकर सीएम हिमंता विस्वा सरमा पहले ही कमर कस चुके है, वहीं चुनावी रैलिंयो में पहुंचा कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनावी रैली में बीजेपी औऱ आरएसएस को काला जहरीला सांप कह दिया था। जिससे नाराज होकर BJP नेता रंजीव कुमार शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। वहीं गीरिराज सिंह ने भी खरगे पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस राज में जो भ्रष्टाचार हुआ है, वो किसी से छिपा नहीं है।
लेकिन बीजेपी के राज में किसी की दाल नहीं गल रही है इसलिए कांग्रेस के लोग बौखला गए है और अनाप शनाप टिप्पणी कर रहे है। हैरानी की बात है कि एक तरफ बीजेपी हिंदूवादी नीतियों को बढ़ावा दे रहे है तो वहीं खरगे ने मुसलमानो को साधने के लिए बीजेपी और आरएसएस को सांप कह कर वहां की जनता को इस बार उन्हें कुचलने का संदेश दिया है.. एक राष्ट्रीय पार्टी की तुलना इस तरह करना विवादित तो है.. लेकिन सवाल साफ है कि क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि बीजेपी के राज में हिंदू मुस्लिम, जातिवाद जैसे मुद्दों को कुछ ज्यादा उछाला जा रहा है। हम ये नहीं कहते है कि खरगे का बयान न्यायसंगत है, लेकिन जिस मुद्दे को लेकर उन्होंने ये बयान दिया था.. क्या वो मुद्दा विचारणीय नहीं है.. आप इसका जवाब खुद दीजिये।
पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखे हमला
तीसरा मुद्दा- बीते महीने मार्च में कर्नाटक के खड़गे ने सीधा पीएम नरेंद्र मोदी पर तीखे हमला करते हुए कहा कि सच तो ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति एक तानाशाह है जो जेफ्री एपिस्टीन की फाईलो के राज का इस्तेमाल करके पीएम मोदी को गुलाम की तरह इस्तेमाल कर रहा है। इतना ही नहीं ऐसे व्यापार समझौते पर हामी भरी जा रही है जिससे देश गरीबी की तरफ जायेगा. और उससे देश गुलामी की तरफ ही जायेगा.. खड़गे ने इस जगह पर जो मुद्दा उठाया था वो सभी जानते है.. अमेरिका के लगाये टैरिफ पर जहां चीन एक तरफा लड़ रहा था वहीं भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।
ऐसे में क्या पीएम मोदी को देश को जवाब नहीं देना चाहिए कि ट्रंप की चाल और नीतियो के प्रति उनके क्या प्लांस है.. लेकिन हमेशा की तरह वो चुप रहे.. अब सवाल ये है कि क्या ये सवाल देश की बाकि की जनता का भी नहीं थी.. आखिर ट्रंप की इस चाल पर पीएम मोदी ने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। जवाब तो आप भी जानना चाहते ही है.. फिर केवल खड़गे ही विवाद में क्यों है।
मल्लिकार्जुन खड़गे खुद एक पिछड़ी जाति से आते है, जातिगत भेदभाव क्या होता है, उसे उन्हें करीब से देखा है.. वहीं देश में बीजेपी शासन में दलितों, बहुजनों पिछड़ो की स्थिति जिस तरह से दयनीय हो रही है. ऐसे में खड़गे के सवाल क्या जायज नहीं है। केवल कांग्रेस पार्टी से होने के कारण उन्हेम निशाना बनाया जा रहा है.. जबकि तब कोई ये क्यों नहीं सोचता कि जिन दलितो के कंधे पर बंदूक रख कर बीजेपी आगे बढ़ना चाहती है.. खड़गे खुद उसी समुदाय से है.. ऐसे में आप बताययें कि क्या खड़गे को निशाना बनाना सही है।



