Top 5 Dalit news: नाबालिग दलित बच्ची के बलात्कार मामले में बड़ी सुनवाई, कोर्ट ने आरोपी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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Top 5 Dalit news: दलितों के साथ होने वाले उत्पीड़न की रोकथाम और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सरकार ने कानून तो बना दिये.. लेकिन क्या हो जब मामला कानून के दायरे तक पहुंचे ही नहीं,.. फिर क्या इससे ये साबित हो जाता है कि अपराध नहीं हुआ.. पीड़ितों को चुप रहने के लिए जो उत्पीड़न झेलना पड़ना है.. उसे लेकर आखिर कौन जिम्मेदार है.. तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

बहुजनों की बस्ती बचाने खुद आजाद पहुंचे

1, दलितों से जुड़ा पहला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने दिखा दिया कि भले ही उन्हें जाति के नाम पर इग्नोर किया जा सकता है लेकिन संविधान की ताकत ने उन्हे सांसद बनाया है और वो उस ताकत का इस्तेमाल जातिवादियों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ने के लिए कर सकते है। शोसल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें चंद्रशेखर आजाद को क्यों लोग इतना पसंद करने लगे है उसका सीधा सबूत है..

दरअसल ये वीडियो सहारनपुर के ITC रोड की है, जहां जबरन दलित बस्ती को उजाड़ने के लिए ठेकेदार ने सरकारी बुलडोजर चलवाना शुरु कर दिया था, लेकिन तभी वहां के निवासियों ने कहा कि वो मदद के लिए आजाद को बुलायेंगे,, मगर ठेकेदार ने उनका मजाक बनाते हुए कहा कि वो अब सांसद है, छोटे मोटे मसलो पर नहीं आने वाले.. बस फिर क्या था.. एक कॉल हुई और कुछ देर में खुद आजाद वहां पहुंच गए। जिससे ठेकेदार की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई। विडियो में साफ नजर आ रहा है कि आजाद ठेकेदार को चुनौती दे रहे है कि वो जिसे चाहे कॉल कर लें, लेकिन बहुजनों की बस्ती को हाथ तक नहीं लगा पायेगा।

सबसे पहले राज्य में शराब बंदी करेंगे

वहीं आजाद ने खुले तौर पर ये भी कहा कि जैसे ही उनकी सरकार आयेगी वो सबसे पहले राज्य में शराब बंदी करेंगे.. क्योंकि 70 प्रतिशत लोगो के बर्बाद होने की वजह शराब ही है.. आजाद का एक्शन मोड देखकर उनकी लोकप्रियता ऐसी बढ़ी है कि लोग आगामी 2027 विधानसभा चुनावों में उन्हें सीएम बनाने के लिए पूजा पाठ तक शुरु कर चुके है। आजाद की हुंकार बताती है कि दलितों के दिन अब फिरने वाले है.. ऐसा लगता है कि जैसे बाबा साहब अंबेडकर के बाद आजाद ही दलितों के नए मसीहा के रूप में पहचाने जाने वाले है। आपकी इस पर क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

बीजेपी विधायक ने दलित अधिकारी पर किया हमला

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला  राजस्थान के श्रीगंगानगर से है, जहां बीजेपी नेताओं के हौंसले इतने बुलंद है कि केवल दलित होने के कारण एक सरकारी अफसर को भी पीटने और उसे जान से मारने की धमकी देने से भी पीछे नहीं हटते। दरअसल  राजस्थान शहरी अवसंरचना विकास परियोजना ( आरयूआईडीपी) में कार्यरत एईएन जगनलाल बैरवा दलित जाति से आते है, उन्होंने बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी समेत 30 लोगों के खिलाफ जवाहर नगर थाना में एफआईआर दर्ज कराते बताया कि  दिशा समिति की बैठक में पहले ही किसी बात पर धमकी दी थी।

लेकिन 30 अप्रैल को उन्हें  विधायक सेवा केंद्र बुलाया गया था, जहां वो प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें लेकर एलएंडटी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शहनवाज हुसैन और इंजीनियर सोहम परमार के साथ पहुंचे थे। लेकिन पहुंचते ही विधायक ने प्रोजेक्ट के सरकारी दस्तावेज उनसे छीन लिये, और उन्हें जातिसूचक गालियां देने लगे… जिसका उन्होंने विरोध किया था, लेकिन इससे गुस्सायें विधायक ने अपने लोगो के साथ मिलकर उनके साथ बुरी तरह से मारपीट की, जिससे उनकी आंख में गंभीर चोट आई।

वहीं उन्हें जान से मारने की धमकी दी। दरअसल विधायक को 555 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी चाहिए थी, लेकिन दलित अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं हुआ था। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरु कर दी है.. अब देखना ये होगा कि 36 सालो से ईमानदारी से सेवा कर रहे दलित अधिकारी को उनकी सेवा का क्या फल मिलता है।

तमिलनाडु में दलित उत्पीड़न मामले में सनसनीखेज खुलासा

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु से है, जहां दलितों का मुद्दा इस वक्त सबसे ज्यादा उछाला जा रहा है, एक तरफ जहां विधानसभा चुनावों में थलापति विजय ने दलितों के मुद्दे पर ही जीत दर्ज की तो वहीं तमिलमाडु में पिछले 5 सालों में दलित उत्पीड़न के बढ़े हुए मामले बेहद सनसनीखेज है। जी हां, पिछले 5 सालो में राज्य में  दलितों और आदिवासियों के खिलाफ अत्याचारों में 67% की बढ़ौतरी हुई है, जो किसी अन्य राज्य के मुकाबले बेहद बुरे आकड़े है.. ये आकड़े  राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) और दलित मानवाधिकारों पर राष्ट्रीय अभियान (एनसीडीएचआर) ने पेश किये है।

वहीं  मध्य प्रदेश 55.3% की बढौतरी के साथ दूसरे  और ओडिशा 42.9% के साथ तीसरे स्थान पर है।तमिलनाडु में दलितों की हत्याओं में 40.4% की वृद्धि हुई है, तो वहीं गंभीर चोट पहुंचाने के मामलों में  240% की वृद्धि हुई और आपराधिक धमकी देने के मामलों में  584.8% की वृद्धि  दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाले मामले तो दलित नाबालिक लड़कियो के साथ होने वाले अपराधों के है.. दलित लड़कियों में बलात्कार के मामले बालिग महिलाओं के मामलों से 73.2% ज्यादा बढ़ गए।

आपको जानकर हैरानी कि राज्य में केवल  20 विशेष अदालत है, वहीं दलित अत्याचार के लंबित मामलों की दर 87.7% है। ये आकड़े बताते है कि पिछली सरकार ने वाकई में दलित हितो को लेकर क्या सतर्कता दिखाई थी.. ऐसे में देखना ये होगा कि नवनिर्वाचित सरकार क्या दलित उत्पीड़न कम करने में सफल होगी।

हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने शुरु की भूख हड़ताल

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां दलित छात्र के साथ हुई जातिगत भेदभाव के खिलाफ  हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने रिले भूख हड़ताल  करना शुरु कर दिया है। विश्वविद्यालय के छात्रों ने मांग की है कि इस मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संपर्क अधिकारी ने जो भी रिपोर्ट दी है उसे सार्वजनिक किया जायें। बता दें कि समाजशास्त्र में एमए सेकेंड इयर के दलित छात्र अनुज को 11 दिसंबर, 2025 को हाई स्कूल के छात्र ने जातिसूचक शब्द कहें थे, अनुज को उनकी जाति के नाम पर प्रताड़ित किया गया था।

इस घटना की शिकायत जब अनुज ने विश्वविद्यालय अधिकारियों से की तो महीनों तक अधिकारियों ने शिकायत तक नही लिखी थी, लेकिन जब अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) ने अनुज के लिए न्याय की आवाज उठाना शुरु किया तब भेदभाव विरोधी कार्यालय की एक सिफारिश सामने आई.. जिसमें केवल एक निजी माफी और अनुज को प्रताड़ित करने वाले छात्र पर 5000 रूपय का जुर्माना लगा था, जबकि खुद अनुज को भी इस सिफारिश की जानकारी नहीं थी..जिससे ये अपराध और संगीन हो गया। कॉलेज प्रशासन का ये रवैया जातिगत भेदभाव को और बढ़ावा दे रहा है.. जिसके खिलाफ अब छात्रो ने आवाज उठाई है, अब देखना ये होगा कि क्या अब भी कॉलेज प्रशासन मूक बना रहेगा।

नाबालिग दलित बच्ची के बलात्कार मामले में बड़ी सुनवाई

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला  गुजरात के राजकोट से है, जहां 14 साल की एक दलित नाबालिक बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को 3 साल बाद आखिरकार सजा मिल ही गई। कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.. ये घटना  6 अक्टूबर, 2023 की है जब आरोपी अफरीन असगर कादरी ने बच्ची को ये कह कर बहकाया कि उसकी मां की तबियत अचानक खराब हो गई है औऱ वो अस्पताल में भर्ती है, बच्ची बिना कुछ सोचे समझे उसके साथ बाइक पर बैठ गई। जिसके बाद आरोपी उसे रानावव के पास सुनसान इलाके में ले गया और चाकू दिखा कर उसका यौन उत्पीड़न किया।

पहले तो इस मामले को दर्ज कराया गया था लेकिन आरोपी के लोगो की धमकियो से तंग आकर पीड़िता और उसके परिवार वाले मुकर गए, मगर फोरेंसिक रिपोर्ट और घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों  के आधार पर आरोपी का गुनाह साबित हो गया और आखिरकार पोरबंदर की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.. वहीं पीड़िता को 4 लाख रूपय का मुआवजा भी देने की बात की है।

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