Top 5 Dalit News: अगर देश में सबसे ज्यादा इस वक्त पीड़ित है तो वो है पिछ़ड़े और दलित.. जिन्हें एक तरफ आरक्षण देने को लेकर प्रताड़ित किया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ उनकी जाति को लेकर.. दलित कितना भी पढ़ लिख लें, लेकिन उन्हें दबा कर रखने की मनुवादी मानसिकता से वो बच नहीं पाते है.. तो फिर आखिर ऐसा कौन सा कानून बने कि लोगों की मानसिकता भी खत्म हो सकें। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
देवबंद जा रहे भीम आर्मी चीफ को किया हाउस अरेस्ट
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्हें एक बार फिर से दलितों के लिए न्याय की आवाज उठाने के बदले अपमान और हाउस अरेस्ट झेलना पड़ा। जी हां, अभी हाल ही में जमीन हथियाने को लेकर दलितों और ठाकुरों के बीच हुई झड़प को लेकर आजाद पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए देवबंद जाने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही आजाद को भारी पुलिस बल तैनात करके जाने से रोक दिया गया था, वहीं आजाद भी अब सरकार की इस दमनकारी नीतियो के खिलाफ हल्ला बोल चुके है।
उन्होंने बिना डरे पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि असली दोषियों को सजा मिले और पीड़ितो के खिलाफ झुठे केस हटाये जाये, वहीं विवादित जमीनों की निष्पक्ष जांच हेतु उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाये और घायलो को उचित मुआवजा मिले..इसी के साथ दोषी पुलिसकर्मियों सहित देवबंद CO और SHO को तुरंत निलंबित किया जाए.. आजाद ने सरकार को खुली चुनौती दी है कि अगर 72 घंटों के भीतर इन मांगों पर अमल नहीं किया गया, तो 14 मई को सहारनपुर की धरती पर एक ऐतिहासिक जन-आंदोलन किया जायेगा।
अब देखना ये होगा कि पुलिस की दादागिरी कब तक चलेगी और क्या आजाद देवबंद पहुंच पायेंगे.. वहीं अगर उन्हें नहीं जाने दिया तो इसका क्या नतीजा होता है..वहीं आजाद ने उन सभी लोगो को अपनी पार्टी जॉइन करने का न्यौता दिया है जो बीजेपी से त्रस्त हो चुके है.. उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से कहा कि 2027 में आसपा की ही सरकार यूपी में आयेगी। ऐसे में नगीना सांसद का बढ़ता क्रेज और उनका ये ऐलान कहीं सच में बीजेपी का समीकरण तो नहीं बिगाड़ देगा.. आपको क्या लगता है।
बेटी की बिंदौली निकालने के बदले हुक्का पानी बंद
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ से है। मध्य प्रदेश दलितो के लिए एक ऐसा राज्य बनता जा रहा है जहां जातिवादी मानसिकता के लोग फिर से पुराना युग लाना चाहते है… न तो दलितो को सिर उठा कर चलने की इजाजत हो और न ही वो अपने हक के लिए आवाज उठाये.. जी हां, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक पिता को केवल अपनी बेटी की बिंदोली के लिए पुलिस से मदद मांगनी पड़ रही है क्योंकि वो बिंदोली घोड़ी पर करना चाहता है।
लेकिन गांव वालों को जब पता चला तो पीड़ित को लगातार डराया धमकाया गया..लेकिन जब पीड़ित ने एसपी ऑफिस में इस मामले में मदद मांगी तो गांव वालों ने उसके घर का हुक्का पानी ही बंद करवा दिया। हैरानी की बात है कि संविधान लागू हुए 76 साल हो चुके है, लेकिन दलितो के लिए नीचे दबाये रखने की मानसिकता में कुछ खास बदलाव नहीं आया है। अब देखना ये होगा कि अगर पुलिस इस मामले में हस्तक्षेप करती है तो क्या दलित परिवार को सूकून से जीने देंगे गांववाले.. आखिर ये तुगलकी कानून कब तक जारी रहेगा।
आंध्र प्रदेश में दलितों का मंदिर किया ध्वस्त
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रर्देश के पश्चिम गोदावरी से है, जहां दलितों को विस्थापित करने के लिए जबरन दलितों द्वारा पूजे जाने वाले मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया.. वहीं अब दलित परिवारों को अपने घर के छीने जाने का भी भय सताने लगा है। ये मामला पश्चिम गोदावरी जिले के अकीवेदु थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पेडापेटा गांव का है, मंदिर को जबरन तोड़ने और दलितो को विस्थापित किये जाने की साजिश को लेकर कुला विवाह व्यतिरेका पोराटा संघम (केवीपीएस) ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को चिट्ठी लिख कर शिकायत की है।
केवीपीएस ने बताया कि देर रात गोन्थेनम्मा मंदिर को पहले ध्वस्त किया गया और फिर करीब 8 दशकों से रह रहे है दलित परिवारों को जमीने खाली करने का दवाब दिया जा रहा है। जो कि मानव अधिकारों का उल्लघंन है। संधम ने मांग की है कि जल्द से जल्द आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करें.. और दलित परिवारो की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। हैरानी की बात है कि करीब 8 दशकों से इस जमीन पर रहने वाले लोगो के केवल दलित होने के कारण उन्हें विस्थापित किया जा रहा है जबकि उनके लिए दूसरे आवास तक की व्यवस्था तक नहीं की गई है। अब देखना कि होगा कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद क्या होता है दलित परिवारों का।
एनसीआरबी ने दलित अपराध के मामले में बड़ा खुलासा किया
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला एक ऐसे आकड़े को लेकर है जिसने बताया कि भले ही एससी एसटी एक्ट का नाम लेकर दलितों पर झूठे इल्जाम लगाये जायें, उन्हें इसका गलत इस्तेमल करने वाला कहा जायों, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ हिंसा के बाद दोषसिद्धी की जो दर , राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) ने दी है, उसने सारे दावो की सच्चाई सामने ला दी है, जी हां, एनसीआरबी ने अपनी रिपॉर्ट में खुलासा किया भले ही एससी एसटी एक्ट के मामले दर्ज तो होते है लेकिन अपराध सिद्धी की दर बेहद चिंताजनक है।
एससी एसटी एक्ट से दायरे
एनसीआरबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भले ही बीते 3 सालों में दलितो के साथ अत्याचार के मामलो में कुछ कमी आई है लेकिन उससे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि एससी एसटी अपराधों में आरोपियों की दोषसिद्धी में और ज्यादा कमी आई है, यानि की दलितों के साथ अपराध हुई.. ये साबित ही नहीं हो पाता, या फिर वो एससी एसटी एक्ट से दायरे में ही नहीं आता है.. रिपोर्ट बताती है कि ऐसे कई मामले में है जिसमें चार्जशीट दायर तो की जाती है लेकिन दोशसिद्धी नहीं हो पाती है।
आकड़े के अनुसार मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान दोषसिद्धी कर सजा की दर 50 प्रतिशत से भी कम है। वहीं यूपी में दोषसिद्धि दर 73.3 प्रतिशत दर्ज की गई। यानि की या तो मामला अभी भी कोर्ट में लंबित पड़ा है या किन्ही कारणों से दोष सिद्ध नहीं हुआ.. मगर इसका मतलब ये तो नहीं है कि अपराध नहीं हुआ.. या जब दोष सिद्ध ही नहीं होता तो अपराध दर में तो कमी आ ही जायेगी.. एनसीआरबी की रिपोर्ट ने सरकार के दावे की मिट्टी पलीत कर दी है, अब देखना ये होगा कि इस मुद्दे को कैसे चुनावों में भुनाया जाता है, और कैसे दलितो के मसीहा बनती है राज्य सरकार..
केरल में जातिगत भेदभाव से तंग आकर छात्रों का ड्रॉपआउट
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल से है, जहां दलित छात्रो द्वारा जातिगत भेदभाव झेलने के बाद पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने के आकड़े बेहद ही सनसनीखेज है.. दरअसल पिछले महीने दलित छात्र की आत्महत्या के बाद केरल में दलित छात्रो की सुरक्षा और जातिगत भेदभाव के खिलाफ उठी आवाज के कारण अब दलित समुदाय दलित छात्रो की स्थिति का ब्यौरा ले रहा है। ताजा अपडेट बेहद हैरान करने वाले है.. केरल सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त कॉलेजों में करीब एक चौथाई छात्र एससी एसटी वर्ग से आते है।
लेकिन जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से तंग आकर 50 प्रतिशत छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते है। केरल में दलित छात्र के साथ हुए अन्याय को लेकर केरल बंद भी हो चुका है, ऐसे में ये आकड़े आने के बाद क्या केवल सरकार दलित छात्रों के लिए कोई ठोस कदम उठाने वाली है.. शायद ऐसे हालातों से ही निपटने के लिए यूजीसी के नए नियमों को लागू करने की मांग की गई थी,, ऐसे में क्या ये नियम लागू नहीं होने चाहिए।



