Uttarakhand news: हाल ही में उत्तराखंड के उत्तरकाशी से एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जहाँ सोमेश्वर—दलित समुदाय द्वारा पूजे जाने वाले एक देवता—की डोली (पालकी) को गंगोत्री धाम तक ले जाने की एक परंपरा है। विवाद तब खड़ा हो गया जब भराण गांव से दलितों द्वारा लाई गई देव डोलीको इस पारंपरिक शोभायात्रा से बाहर कर दिया गया। जिसके बाद दलित समुदाय ने धर्म परिवर्तन की चेतवानी दे डाली है।
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दलितो की देव डोली को गंगोत्री धाम जाने से रोका
चार धाम यात्रा हाल ही में शुरू हुई है, और लोगों के बड़े-बड़े समूह वहाँ जा रहे हैं। इस बीच ही उत्तराखंड (Uttarakhand) के उत्तरकाशी (Uttarkashi) से चौकाने वाली खबर सामने आई है, जहां दलितो की देव डोली को जातिगत मानसिकता और भेदभाव के कारण गंगोत्री धाम जाने से जबरन रोक दिया गया।
दरअसल, यह मामला उत्तरकाशी के भराण गांव (Bharan Village) का है, जहां गंगा दशहरा के मौके पर सोमेश्वर देवता के साथ देव डोली को भी गंगोत्री ले जाने की परंपरा है, लेकिन जब गांव के दलित समाज (Dalit Community) के लोगो ने अपनी तरफ से देव डोली भेजने की कोशिश की तो उसे शामिल करने से ही इंकार कर दिया गया..वही जहाँ एक तरफ हर परिवार से 400 रूपए की दान राशि ली गयी तो दूसरी तरफ दलितों से आर्थिक सहायता भी नहीं ली गई.. उल्टा उनसे कहा कि वो अपनी डोली अलग से लायें, जिससे दलित समाज के लोगों में काफी गुस्सा भर गया है।
दलित समाज के लोग उत्तरकाशी न्यायलय पहुंचे
इसके बाद, आक्रोशित दलित समुदाय के सदस्य अदालत पहुँच गए हैं। इस बीच, मीडिया रिपोर्टों से प्राप्त जानकारी के अनुसार…उन्होने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य मे दलितो के साथ उत्पीड़न अब बर्दाश्त के बाहर हो रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लेंगे। दलित समाज के लोग उत्तरकाशी न्यायलय (Uttarkashi Court) पहुंच गए है न्याय के लिए..उन्होंने अपील की है कि अगर उनके समाज के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो सीधा धर्म बदलने के लिए ही कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे। हालांकि अधिवक्ताओं ने उन्हें आश्वासन देकर शांत तो करा दिया है लेकिन देखना ये होगा कि दलितो को न्याय मिलेगा या वो धर्म ही बदल लेंगे।



