राजधानी दिल्ली में बौद्ध धर्म की विरासत को संजोए 5 प्रसिद्ध बौद्ध विहार – Buddhist Temples in Delhi

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Buddhist Temples in Delhi: जहां बुद्ध हैं वहां शांति है, वहां अहिंसा है और वहीं धर्म है, बुद्धत्व की इस आभा को आप हर उस जगह पर महसूस कर सकते है जहां बुद्ध से जुड़े धरोहर हैं, और इसी धरोहर को समेटने की पूरी कोशिश की गई है भारत की राजधानी दिल्ली में। बौद्ध धर्म की स्थापना से लेकर बुद्ध के महापरिनिर्वाण तक की निशानियाँ आपको बिहार से लेकर यूपी तक मिलते है लेकिन दिल्ली भी आज के समय में बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है।

खासकर नवयान की स्थापना करने वाले बाबा साहब अंबेडकर के दिल्ली में रहने और इसी स्थान पर महापरिनिर्वाण होने के बाद राजधानी दिल्ली भी बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र बन गया है, और आज यहां बौद्ध धर्म से जुड़े कई मंदिर और बौद्ध विहार मौजूद है। अपने इस लेख  में हम राजधानी दिल्ली में मौजूद 5 बौद्ध विहारों और मंदिरों के बारे में जानेंगे, जो बौद्ध धर्म की विरासत को आगे बढ़ा रहे है।

लद्दाख बौद्ध मंदिर – Ladakh Buddhist Temple

लद्दाख से सटे तिब्बत देश को बौदध धर्म का एक महत्वपूर्ण गढ़ माना जाता है, जिसका प्रभाव लद्दाख पर भी नजर आता है, लेकिन क्या आप ये जानते है कि लद्दाख में बौद्ध धर्म के फलने फूलने की कहानी बताता है कि दिल्ली में स्थित लद्दाध बौद्ध मंदिर। तिब्बत के बौद्ध अनुयायियो के लिए एक प्रसिद्ध शांत और आध्यात्मिक आश्रय स्थल के रूप में प्रचलित लद्दाख बौद्ध मंदिर दिल्ली के सिविल लाइंस के अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के अपोजिट साइड में मौजूद है।

आपको यहां का वातावरण पूरी तरह से शांति से भर देगा,,, लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षित करती है यहां लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक। लद्दाख बौद्ध विहार के प्रवेश द्वार पर तिब्बती प्रार्थना ध्वज यहां बौद्ध धर्म की महत्ता को दर्शाता है.. वहीं इस मठ के अंदर बीचों बीच  भगवान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा है, और मंदिर में चारों तरफ  बौद्ध कथाओं और शिक्षाओं को दर्शाने वाले भित्ति चित्र अंकित है।

आध्यात्मिक वातावरण साधक और श्रद्धालुओं

यहां का शांत और आध्यात्मिक वातावरण साधक और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। तिबब्त और भारत के बीच आध्यात्मिक विकास और सामुदायिक सद्भावना को ध्यान में रख कर इस मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर के बाहरी प्रांगण में कुशोक ग्यालसरास बकुला और पंडित जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति लगी है। इन दोनो व्यक्तियों को इस मठ की स्थापना के लिए अहम माना जाता है। यहां रखे तिब्बती चक्र श्रद्धालुओं को आध्यत्म की ओर मोड़ते है। यहां पर तिब्बत का पारंपरिक ढोल सुना जा सकता है। यहां की सबसे अच्छी बात ये है कि आगंतुको के लिए यहां आने पर कोई चार्ज नहीं है और न ही फोटोग्राफी को लेकर कोई निषेध है।

सीविल लाइन का मठ बाजार

हालांकि बौद्ध विहार में जाने वाले सारे नियमो का पालन अनिवार्य है, जैसे कि अंदर जाने से पहले चप्पल जूते उतारे, कमरे के अंदर धीरे बोले और पिक्चर लेते समय आवाज या फ्लैश न हो.. ताकि ध्यान करने वाले श्रद्धालुओ को कोई परेशानी न हो। इसी के पास कुछ दूरी पर मौजूद है सीविल लाइन का मठ बाजार.. जिसे इसी मठ के कारण मठ बाजार कहा जाने लगा। सर्दियों के लिए तिब्बती ऊनी कपड़ो का भंडार है मठ बाजार। साथ ही तिब्बती कलाकृतियों मूर्तियों और कई कीमती धरोहरो को आप यहां से ले सकते है। ये एक ऐसा स्थान है जहां आप मन की शांति के साथ साथ पेट को स्वादिष्ट भोजन से भी खुश कर सकते है।

विश्व बौद्ध केंद्र – World Buddhist Center

बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए एक मुख्य केंद्रों में से एक है विश्व बौद्ध केंद्र। जो कि दक्षिण दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश (East of Kailash in South Delhi) में स्थित है। इसका निर्माण 1996 में कराया गया था, जिसे  नाकामुरा ग्योम्यो के मार्गदर्शन  में कराया गया.. जो कि बौद्ध धर्म का एक गैर-सांप्रदायिक पूजा और बौद्ध शिक्षण केंद्र है। इस केंद्र  के जरिये दो मकसद को पूरा किया जा रहा है, पहला दुनिया को हिंसा और खूनखराबे के रास्ते से हटा कर विश्व में शांति और सद्भावना का प्रचार किया जा रहा है वहीं दूसरा मकसद है कि इस केंद्र के जरिए अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा मिले.. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को बौद्ध धर्म की महत्ता का पता चले.. लोग बुद्ध के मार्ग पर चले।

दुनिया भर के आगंतुक इस स्थान पर  आध्यात्मिक कार्यशालाओं , आध्यातमिक और ध्यान साधना, और बौद्ध धर्म से जुड़े प्रवचनो को करने और सुनने के लिए आते है। इस केंद्र की बनावट पूरी तरह से पारंपरिक बौद्ध  वास्तुकला के आधार पर है। केंद्र के बीचो बीच सुनहरे रंग के बुद्ध की मूर्ति है, जिनके आसपास जटिल नक्काशी, अलंकृत सजावट से सजाया गया है साथ ही.. भक्तो के लिए शांत प्रार्थनाभवन है.. जहां प्रार्थना करके आध्यात्म की तरफ मुड़ते है लोग। बौद्ध अनुयायियो के लिए ये बेहद खास है।

तुशिता महायान ध्यान केंद्र

बौद्ध धर्म की सबसे प्रचीन शाखा महायान परंपरा को बढ़ावा देने औऱ आध्य़त्मिकता के जरिए मोक्ष का रास्ता बताने वाले प्रमुख केंद्रों में से एक है तुशिता महायान ध्यान केंद्रनई दिल्ली के हौज खास इलाके में साल 1979 में तिब्बती बौद्ध गुरु आदरणीय पूज्य लामा थुबतेन येशे द्वारा मानसिक शांत और बुद्धत्व के ज्ञान को बढ़ाने के लिए महायान बौद्ध धर्म की परंपरा को मानने वाले तुशिता महायान ध्यान केंद्र की स्थापना की गई थी। ये केंद्र पारंपरिक तिब्बती आध्यात्मिक साधना और ध्यान को करने के लिए एक शांत वातावरण प्रदान करता है, जहां हर किसी का स्वागत किया जाता है।

ध्यान केंद्र के बीचो बीच भगवान बुद्ध की तस्वीर है, जिनके चारों तरफ बौद्ध देवी-देवताओं और बौद्ध धर्म के प्रतीको को दर्शाने वाले  रंगीन थांगका की चित्रकारी लगाई गई है.. जो यहां आस्था को और जागृत करता है। यहां आने वाला हक शख्स ध्यान सत्रों में भाग ले सकता है जिसके लिए केंद्र अनुभवो शिक्षकों को मुहैया कराते है, जो इस बात का साक्षी है कि बौद्ध धर्म में हर कोई एक समान ही है।

विश्व शांति स्तूप (विश्व शांति पैगोडा)

साल 2007 में तिब्बती धर्म गुरु परम पावन दलाई लामा द्वारा  दिल्ली के इंद्रप्रस्थ पार्क में शांति और सद्भाव के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था विश्व शांति स्तूप। ये स्तूप दलाई लामा ने भारत औऱ तिब्बत के धार्मिक और राजनैतिक रिश्तों की मजबूती दर्शाने के लिए स्थापित किया था। हालांकि भले ही इसे तिब्बती धर्म गुरु ने स्थापित किया था लेकिन इसकी बनावट पूरी तरह से भारतीय है। इस स्तूप पर भव्य गुंबद,  बना है साथ ही इसकी दीवारों पर जटिल नक्काशी की गई है। बौद्ध धर्म को मानने वालो के लिए ये स्तूप काफी अहम है। इनके अलावा भी कई बौद्ध विहार और मंदिर स्थित है.. जो बौद्ध धर्म की परंपरा और संस्कृति को आगे बढ़ा रहे है।

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