UP crime: हाल ही में उत्तर भारत के मेरठ से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ स्थानीय दबंगों का आतंक इतना बढ़ गया है कि उन्होंने दलित समुदाय द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली पक्की सड़क को ही तोड़-फोड़ दिया है, जिससे उनका आना-जाना पूरी तरह बंद हो गया है; साथ ही, इस घटना को लेकर पुलिस के ढुलमुल रवैये पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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दलित उत्पीड़न का सनसनीखेज मामला
दलितों से जुड़ी खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं; लेकिन, अगर उन्हें न्याय दिलाने की ज़िम्मेदारी रखने वाले ही उनके विरोधी बन जाएं या फिर मूकदर्शक बनकर यह तमाशा देखते रहें तो उन्हें न्याय कैसे मिलेगा? ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ है, जहां पुलिस प्रशासन के सामने जातिवादी दबंगों ने दलित बस्ती से आने वाली पक्की सड़क को उखाड़ दिया, दलित गुहार लगाते रहे लेकिन पुलिस मूकदर्शक बन कर तमाशा देखती रही और दबंगों ने पुलिस के सामने ही दीवार बनवा दी। पुलिस की इस उदासीनता को देखने के बाद दलित समाज के एक युवक ने आत्मदाह तक करने को कोशिश की। बता दें, ये मामला मेरठ (Meerut) के मायापुरी शेरगढ़ी (Mayapuri Shergarhi) का है।
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बीच सड़क में बनवा दी दीवार
जहां दलित बस्ती में उस वक्त चीख पुकार मच गई जब जातिवादी आतंकियों ने दलित बस्ती का रास्ता रोकने के लिए बीच सड़क पर दीवार बनवाने लगे। हैरानी की बात है कि ये रास्ता न्यायालय सिविल जज (सिविल डिवीजन) में 2015 से ही विचाराधीन है।दलितों ने दबंगों की अवैध जमीन हथियाने को लेकर डीएम से शिकायत की है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विहार कॉलोनी में 3570 वर्ग मीटर जमीन पर अवैध कब्जा कर बेच दिया गया है।
वहीं 2008 में विधायक निधि से बनी हुई सड़क और पानी की लाइन को भी तोड़ दिया गया है। इतना ही गाँव में रह रहे ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते से जुड़ा मामला 2015 से सिविल जज (सिविल डिवीज़न) की अदालत में लंबित है और अगली सुनवाई 23 जुलाई को होनी है। मायापुरी शेरगढ़ी के निवासियों के अनुसार, पास की स्वास्थ्य विहार कॉलोनी में पिछले 24 सालों से ज़मीन की प्लॉटिंग का काम चल रहा है।
पुलिस के रवैया पर उठे सवाल
दबंगों और पुलिस को मिलीभगत को देख कर दलित बस्ती के एक शख़्स ने आत्मदाह करने की कोशिश की, यह घटना बुधवार दोपहर करीब 3 बजे हुई, जिसे लेकर ये मामला जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह (District Magistrate Dr. V.K. Singh) के पास पहुंचा जहाँ उन्होंने बताया कि दबंगों ने उन्हें जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गालियां दीं। इतना ही नहीं उन्होंने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे बस्ती के लोग भयभीत और दहशत में हैं। वही मामले का संज्ञान लेते हुए फिलहाल के लिए तो काम बंद कर दिया गया, मगर सबसे बड़ा सवाल तो अब पुलिस की भूमिका पर उठ रहे है, क्या समाज के साथ साथ कानून भी जातिवादी हो गया है। अगर पुलिस ही अपराधियों का साथ देगी तो पीड़ितों को न्याय कौन देगा।



