Kaimur news: हाल ही में बिहार के कैमूर से इंसानियत को शर्मशार करने वाला मामला सामने आया है. जहाँ एक महिला पुलिस ने एक दलित महिला के घर में जबरन घुस कर उसके साथ मारपीट की इतना ही नहीं जब उसने इसका विरोध किया तो उसको जातिसूचक शब्द कहकर भी अपमानित किया गया।
गर्भवती महिला को बुरी तरह से पीटा
बिहार (Bihar) के कैमूर जिले (Kaimur District) से एक खबर सामने आई है, जहां एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस ने पूरे दलित बस्ती में पहले तो बिना सर्च वारंट के घर घर घुस कर खोजबीन की, वहीं जब एक दलित गर्भवती महिला ने इसका विरोध किया तो महिला थाना की दोरागा चंद्रप्रभा ने 8 महीने के गर्भवती महिला को बुरी तरह से पीटा। ये मामला कैमूर जिले के भभुआ नगर के वार्ड नंबर 14 की है, पीड़िता गुड़िया देवी ने बताया कि दरोगा चंद्रप्रभा सूरज नाम के आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची थी क्योंकि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
BSP नेता संतोष कुमार सख्त कार्यवाई की मांग की
जिसकी खोजबीन के लिए दारोगा अपनी टीम के साथ आई थी, लेकिन जब वो अपने घर पर नहीं मिला तो बिना सर्च वारंट के वो बाकियों के घरों की तलाशी लेने लगी.. वही जब पुलिस टीम स्थानीय निवासी भोला राम के घर में घुसने लगी, तो उनकी पत्नी गुड़िया देवी ने इसका विरोध किया, और कहा कि जिसके खिलाफ शिकायत है उसके घर जाये जिससे महिला दरोगा भड़क गई, और उसे बुरी तरह से पीटा। इतना ही नहीं घर में रखा हुआ सारा सामान भी बिखेर दिया। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने भभुआ थाने (Bhabhua Police Station) में लिखित शिकायत देकर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई है। तो वहीं बीएसपी नेता संतोष कुमार (BSP leader Santosh Kumar) ने महिला दारोगा चंद्रप्रभा को दलित विरोधी कहते हुए सख्त से सख्त कार्यवाई करने की मांग की है और कैमूर एसपी (Kaimur SP) से दारोगा को तुरंत निलंबित करने की मांग की है।
दारोगा के खिलाफ काफी रोष
वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक इस घटना से गांव की महिलाओ में भी दारोगा के खिलाफ काफी रोष है, वही स्थानीय निवासियों ने बताया कि पुलिस हमारे मोहल्ले में सूरज राम को गिरफ्तार करने आई थी। लेकिन, जब वह अपने घर पर नहीं मिला, तो पुलिस ने हमारे घरों की तलाशी लेना शुरू कर दिया। और जब हमने इसका विरोध किया, तो उन्होंने शारीरिक हिंसा का सहारा लिया; महज़ अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए, उसे बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने पीड़ित के प्रति ज़रा भी रहम नहीं दिखाया, इस बात के बावजूद कि वह गर्भवती थी। इन परिस्थितियों में, यह व्यवस्था उन्हें न्याय कैसे दिला सकती है?



