Bhim Army Chief Statement: हाल ही में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्हें UGC नियमों को लेकर न्यायपालिका पर निशाना साधते हुए देखा जा सकता है। इसका एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हो रहा है।
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भीम आर्मी चीफ ने न्यायपालिका पर उठाया सवाल
कहा जाता है कि देश की न्यायपालिका एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सभी के साथ समान व्यवहार किया जाता है। फिर भी, हम सभी जानते हैं कि भारत की न्यायिक प्रणाली कितनी धीमी और अक्षम है। जिसके चलते आज भी दलितों को न्याय नहीं मिलता ही और अगर मिलता भी है तो काफी समय के बाद.. जिसे लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर (Bhim Army Chief Chandrashekhar) ने न्यायपालिका (The Judiciary) की न्याय व्यवस्था को लेकर उन पर सवालियां निशान खड़े कर दिये है।
दरअसल, यूजीसी (UGC) के मुद्दे पर नई गाइडलाइंस को फिर से बहाल करने के लिए दलित समाज काफी लंबे समय से लड़ाई लड़ रहा है तो वहीं कोर्ट (Court) ने जहां इस पर रोक लगाने में चंद मिनट लगाये तो उसे लागू करने को लेकर होने वाली 19 मार्च की सुनवाई को टाल दिया गया..जिससे आजाद काफी नाराज दिखे।
पिछड़ो की भलाई से जुड़े मुद्दे कोर्ट में लंबित
उन्होंने कहा UGC के मुद्दे पर एक दिन पहले PIL दाखिल होती है और लाखों अन्य मामलों को नकारकर अगले दिन इसकी सुनवाई भी हो जाती है, वहीं मध्यप्रदेश में ओबीसी को 14% आरक्षण मिलता है और 13% कोर्ट के द्वारा होल्ड किया हुआ है उनका मामला लंबे समय से कोर्ट में पड़ा हुआ है, पर उसपर कोई सुनवाई नहीं होती। हैरानी की बात है कि लाखों ऐसे दलितों और पिछड़ो की भलाई से जुड़े मुद्दे कोर्ट में लंबित है, लेकिन उन पर जल्दबाजी में सुनवाई नहीं होती। आजाद ने कहा कि उन्हें अब देश की न्यायिक व्यवस्था और न्यायपालिका की स्थिति पर गंभीर चिंता होने लगी है।
#UGC के मुद्दे पर नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का यह बयान आपको न्यायालय के बारे में सोचने पर विवश कर देगा 😳
चन्द्रशेखर आजाद ने कहा कि- UGC के मुद्दे पर एक दिन पहले PIL दाखिल होती है और लाखों अन्य मामलों को नकारकर अगले दिन इसकी सुनवाई भी हो जाती है
मध्यप्रदेश में… pic.twitter.com/XP4HIQ2s7F
— Priyanshu Kumar (@priyanshu__63) March 25, 2026
सुप्रीम कोर्ट कब फैसला सुनायेगी?
ये सोचने पर विवश करती है कि आखिर कोर्ट किसके पक्ष में खड़ी है, सरकार किसके पक्ष में खड़ी है। देश का लोकतंत्र, देश का संविधान किस तरह जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि न्यायपालिका का सम्मान ज़रूरी है, लेकिन कमजोर और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा भी उतनी ही अहम है। अब देखना ये होगा कि एससी एसटी समाज (SC/ST community) की तऱफ से जो आंदोलन हो रहा है उसे लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) कब फैसला सुनायेगी..और आजाद की बात से आप कितने सहमत है।



