Bihar news: हाल ही में बिहार के सहरसा से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है जहाँ सौराष्ट्र नगर पंचायत क्षेत्र में सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने नगरपालिका प्रशासन पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने दलित और महादलित परिवारों के कच्चे मकानों को ढहा दिया।
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प्रशासन ने चलवा दिया बुल्डोजर चलवा
हाल तक, बुलडोज़र की कार्रवाई केवल UP तक ही सीमित थी, जहाँ मकानों को ढहाया जाता था; लेकिन अब बिहार के सहरसा से भी ऐसी ही खबरें सामने आई हैं, जहाँ दलितों के घरों और दुकानों को गिराने के लिए बुलडोज़रों को लगाया गया है। दरअसल, बिहार (Bihar) के सहरसा (Sarhasa) ने है, जहां दलितों और महादलितों के घरों और दुकानों को तोड़ने का मामला गरमाने लगा है।
इतना ही नहीं दलित समाज के लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि घरों को तोड़ने में भी उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया है। ये घटना सहरसा के सौरभबाजार नगर पंचायत क्षेत्र का है, जहां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए वहां पर प्रशासन ने बुल्डोजर चलवा दिया.. हैरानी की बात है केवल दलितो औऱ महादलितों की झोपड़ियों को ही तबाह किया गया जबकि प्रभावशाली लोगों ने जो अवैध कब्जा किया हुआ था, उन पर को कार्यवाई नहीं हुई।
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भूमाफियाओं ने कब्जा कर पक्के मकान बनाये
अगर वाकई में कब्जा हटाने की नियत होती तो सबके घर तोड़े जाते, लेकिन यहां प्रशासन की नियत केवल दलितों को उजाड़ना थी। पीड़ितों ने जिला प्रशासन से वैकल्पिक रहने के लिए जगह देने की अर्जी की है लेकिन याचिका पर अब तक कोई जवाब भी नहीं आया है। जिससे प्रभावित दलित लोग बेघर हो गये है। वहीं सरकारी जमीन पर कुछ भूमाफियाओं ने भी कब्जा कर पक्के मकान बनाये औऱ गैरकानूनी काम कर रहे है लेकिन सरकार उनके खिलाफ कार्यवाई करने के बजाये उन्हें संरक्षण दे रही है। ऐसे में अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में अतिक्रमण हटाना था या दलितों को ही रास्ते से हटाने की साजिश है। जवाब आप खुद दीजिये।



