MP Crime: हाल ही में मध्य प्रदेश से एक ऐसी ख़बर सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार करती है। इस घटना में, मनुवादी मानसिकता रखने वाले कुछ लोगों ने एक दलित की चिता को ठीक से जलने भी नहीं दिया और उसे आधा जलते हुए ही बुझाने की कोशिश की। वही इस घटना के बाद से दलित समुदाय में भारी आक्रोश है।
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मध्य प्रदेश में मानवता शर्मसार
बाबासाहेब अंबेडकर ने ज़ोर देकर कहा था कि किसी व्यक्ति की अहमियत उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी काबिलियत से आँकी जानी चाहिए। फिर भी, यहाँ की हकीकत ऐसी है कि छुआछूत का कलंक दलितों का पीछा उनकी मौत के बाद भी नहीं छोड़ता—यह तब भी उनका साथ नहीं छोड़ता, जब वे इस दुनिया से जा चुके होते हैं। जी हाँ ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश में देखने को मिला है, जहां जातिवादी मानसिकता की कुंठा इस कदर लोगों पर हावी हो चुकी है कि जिंदा व्यक्तियों के साथ तो जो अत्याचार और छुआछूत करते है वो तो छोड़िए यहां तो अब मरने के बाद भी दलितों की चिता को शांति से जलने नहीं देते है।
सोशलमीडिया पर वायरल हुआ विडियो
सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें कुछ पुलिस वाले एक छोटा को आधे में ही बुझाने की कोशिश कर रहे है और दलित समाज के लोग गिड़गिड़ा रहे है कि वो ऐसा न करें, जबकि वो श्मशान दलितों के लिए ही बना है, लेकिन उसके पास ही बने ब्राह्मणों के श्मशान में दलितों की चिता का धुआं न चला जाये इसलिए ये सारा हंगामा किया गया। दरअसल, यह मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले के बिलई गांव का है, जहाँ ऊंची जाति के एक व्यक्ति ने दलित परिवार के अंतिम संस्कार को केवल इसलिए रुकवा दिया क्योंकि चिता का धुआं उसके घर की ओर जा रहा था।
एक दलित व्यक्ति के चिता को जलने से सिर्फ इसलिए रोक दिया गया क्योंकि उसका धुंआ ऊंचे जाति के लोगों के घर तक जा रहा था।।
घटना मध्यप्रदेश की है।
— Deepesh Patel (@Deepeshpatel87) May 24, 2026
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मरने के बाद भी छुआछूत नहीं जाता
जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया, तो उन्हें जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल करके अपमानित किया गया। इसके बाद, जब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने इस मामले पर कोई कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि दलित परिवार की मदद करने के बजाय, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने जानबूझकर मामले को दबाने और अंतिम संस्कार की जगह बदलने के लिए दबाव डाला।
यानी कि मरने के बाद भी छुआछूत नहीं जाता, ऐसा लगता है कि कैसे दलितों के जलने के बाद चिता राख बनती है और ब्राह्मणों की चिता फूल के बदल जाती होगी। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर एक जंग ही छिड़ गई है वहीं पुलिस वालों की संलिप्तता होने के बाद ये मामल और गरमा गया है, ऐसे में देखना ये होगा कि पुलिस वाले आखिर क्यों ब्राह्मणों का साथ दे रहे है, और क्या है इसके पीछे की पुलिस की सफाई। इस मामले में सरकार का क्या रवैया होता है, ये भी देखने वाली बात होगी।



