Sant Kabir Nagar news: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पुलिस बल को शर्मसार कर दिया है। दो पुलिस अधिकारियों ने मनमाने ढंग से एक दलित युवक को हिरासत में लिया, उसके साथ मारपीट की, जातिसूचक गालियाँ देकर उसे अपमानित किया और उससे पैसे छीन लिए; इसके बाद, उन्होंने उसे चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।
दलित युवक के साथ पुलिस ने की मारपीट
मनुवादी मानसिकता वाले लोग अक्सर दलितों को शारीरिक हिंसा, अत्याचार और भेदभाव का शिकार बनाते हैं; लेकिन तब क्या होता है जब खुद रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं—और वे स्वयं ही मारपीट और लूटपाट करने लगते हैं? ऐसे में, मदद के लिए आखिर कोई किसके पास जाए? उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर से है, जहां देर रात घर लौटते समय एक दलित युवक को दो पुलिस वालों ने न केवल रोक कर बुरी तरह से पीटा बल्कि उससे जबरन पैसे भी वसूले।
हैरानी की बात है कि अधिकारों की रक्षा करने वाले ही उन्हें लूटने के लिए तैयार खड़े है। ये घटना संतकबीरनगर जिले के छपिया छीतौना के रहने वाले दलित युवक सुधाकर कुमार के साथ हुई है। पीड़ित युवक ने कांटे चौकी पर तैनात दो सिपाहियों हरिप्रकाश और संजय पर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित युवक ने अपनी लिखित शिकायत में कहा कि ये घटना उसके साथ 27 मार्च को रात को 9 बजे हुई थी।
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ASP ने पीड़ित को दिया आश्वासन
जब वो कांटे से वापिस घर लौट रहा था, लेकिन तभी उससे गलत तरीके से पैसे वसूलने के इरादे से पेट्रोल पंप के मोड़ पर उसे जबरन सरकारी वाहन में बिठा लिया था और उससे पैसे मांगते हुए लात घूंसो से बुरी तरह से पीटा था, उससे पैसे लूटे और उसे बाहर फेंक दिया। शिकायत मिलने के बाद एएसपी (ASP) एसके सिंह ने आश्वासन दिया है कि वो इस मामले की उचित जांच कर रहे है। और पीड़ित को न्याय जरूर मिलेगा।। हैरानी की बात है कि आखिर किस कानून में लिखा है कि दलित होने के कारण कोई भी उन्हें प्रताड़ित कर सकता क्या। फिर कहां है न्याय व्यवस्था।



