Hardoi crime news: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के हरदोई से एक ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जो मानवता को शर्मसार करती है। इस घटना में, एक स्कूल की प्रिंसिपल ने न केवल एक छात्र के माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल करके उन्हें अपमानित भी किया; और जब इससे भी उसका मन नहीं भरा, तो उसने यहाँ तक धमकी दे डाली कि वह बच्चे का नाम स्कूल के रजिस्टर से काट देगी।
स्कूल प्रिंसीपल ने पेरेंट्स से की बदतमीजी
भले ही “शिक्षित रहो, आगे बढ़ो” का नारा बुलंद किया जाता है, लेकिन आज भी कई गाँवों और कस्बों में दलितों को पढ़ाई करने की अनुमति नहीं है; उन्हें भेदभाव और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है, उन्हें अन्य छात्रों से अलग रखा जाता है, और वे जाति-आधारित उत्पीड़न के शिकार होते हैं। यदि वे आवाज़ उठाने की हिम्मत करते हैं, तो उनके माता-पिता को स्कूल परिसर के भीतर ही अपमानित किया जाता है। ऐसा ही एक मामला यूपी (UP) के हरदोई (Hardoi) से है, जहां एक तरफ राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने बच्चो की कमी के कारण सैकड़ो स्कूलों को या तो बंद करवा दिया या फिर उसे मर्ज करवा दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विडियो
वहीं नीजि स्कूलो की मनमानी को लेकर अब तक उन्होने कोई एक्शन नहीं लिया है। यहां तक कि दिनदहाड़े दलित अभिभावकों को अपमान किया जा रहा है.. लेकिन सरकार तमाशबीन बनी हुई है। जी हां, सोशल मीडिया पर प्रिंसीपल द्वारा एक पेंरेट की बुरी तरह से बेज्जती करने का वीडियो वायरल होने के बाद अब इस मामले में एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) भी जोड़ दिया गया है वहीं .. अब स्कूल की मान्यता को रद्द करने की बात भी की जा रही है। पीड़िता नीलम वर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रिंसीपल से कहा था कि जो बची हुई नोटबुक है उसे लेने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दे दें.. क्योंकि वो 1200 रूपय की आयेंगी। लेकिन प्रिंसीपल नहीं मानी।
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वीडियो के वायरल होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी शिक्षको के खिलाफ कार्यवाई की मांग की थी, जिसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अजीत सिंह की तीन सदस्य कमेटी ने जांच में समिति ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जहाँ मैनेजर तथा प्रिंसिपल ममता मिश्रा को दोषी पाया और दोनो के स्कूल में प्रवेश पर रोक लगा दी.. अब दोनो की लिखित माफी मांगने को तैयार है, जिसे लोग संविधान की ताकत कह रहे है.. हैरानी की बात है कि जब तक किसी बात का तमाशा नहीं बनता..तब तक क्यों प्रशासन के कान खड़े नही होते है… ये तो केवल एक स्कूल की बात है यूपी के अनगिनत स्कूलों का ऐसा हाल है। लेकिन आखिर सरकार क्या रह रही है। इसा जवाब कौन देगा।



