Top 5 Dalit news: भीम आर्मी चीफ की दलित समाज को बड़ी सलाह लड़ना है तो, अपमान आरोप और नुकसान के लिए रहे तैयार

Chandrashekhar Azad, Top 5 Dalit news in Hindi
Source: Google

Top 5 Dalit news: अगर संविधान की ताकत की बात की जायें तो ऐसा क्यों है कि पहले अपराध किया जाता है और फिर जब कार्यवाई होती है तो इस बात का राग अलापा जाता है कि ये है संविधान की ताकत.. अगर वाकई में आज के समय में जातिवादी आतंकियों के मन में संविधान के लिए सम्मान होता तो वो दलितो का अपमान करने से पहले सौ बार सोचते। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

भीम आर्मी चीफ की दलित समाज को बड़ी सलाह

1, दलितों से जुड़ी पहली घटना भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है.. जिन्होंने अब दलितो को भविष्य के लिए फिर से बाबा साहब की ही तरह तीन चीजें अपमान, आरोप और नुकसान सहने के लिए तैयार रहने को कहा है। हम सभी जानते है कि वो हमेशा दलितो के साथ हुए अत्याचार और उनके अधिकारों के लिए लड़ रहे है..लेकिन जहां दलित सम्मान और समानता के लिए लड़ रहे है वहीं आजाद ने उन्हें बड़ी सलाह दी है..

उन्होंने कहा कि बाबा साहब की लड़ाई आसान नहीं थी, हम उनकी लड़ाई को आगे बढ़ा रहे है, तो हमे भी बाबा साहब की तरह उनका मिशन पूरा करने के लिए अपमान, आरोप और नुकसान सहने के लिए तैयार रहना चाहिए।उन्होंने जातिवादी मानसिकता वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दुश्मनो को हराने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। हमें पता होना चाहिए कि हमारा दुश्मन कौन है.. ये लड़ाई आसान नहीं है.. इसलिए इन तीन बाधाओ से घबराने के बजाय उन्हें अवसर की तरह लें, उन्हें कमजोरी नहीं अपनी ताकत बनायें.. और दुश्मनो को करारा जवाब दें कि अब हम भी लड़ाई के लिए तैयार है..

और स्थिति कैसी भी होगी.. वो अपमान को हार नहीं अवसर की तरह देखेंगे। आजाद का ये ऐलान इशारा है कि दलित अब किसी भी परिस्थिति में खड़े हो सकते है। अब देखना ये होगा कि आजाद की ये लड़ाई दलितो को कितना शसक्त और मजबूत बनायेगी। वैसे आपको आजाद की ये सलाह सही लगती है।

उड़िसा में आदिवासी समाज के साथ ज्यादती

2, दलितों से जुड़ी अगली खबर ओड़िसा से है। दिल को झकझोर कर देना वाला एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है.. जब एक आदिवासी समाज के व्यक्ति को बैंक वालों के सामने अपनी मरी हुई बहन की प्रमाणिकता दिखाना के लिए उसके कंकाल को बैंक तक लाना पड़ा। इस वीडियो को देखने के बाद किसी का भी कलेजा फट जायें, लेकिन सड़ चुकी सरकारी व्यवस्था को न तो मृतका पर तरस आया और न ही उसके परिवार पर.. ये घटना उड़ीसा के ओंझार जिले के पटना ब्लॉक के मल्लीपासि इलाके का है। वीडियो में दिखने वाले सख्स का नाम जीतू मुंडा है, करीब दो महीने पहले उसकी बहन कालरा मुंडा की मौत हो गई थी।

लेकिन जब जीतू अपनी बहन के खाते में बचे 19300 रूपय निकालने गया तो बैंक वालों ने सीधे कहा कि जिसका खाता है उसे लेकर आओ। जीतू ने लाख समझाया कि उनकी बहन का उनके अलावा कोई नहीं था.. बहन की मौत हो गई है.. लेकिन बैंक टस से मस नहीं हुई..जिसके बाद थक हार कर जीतू ने उठाया दर्दनाक कदम। वो अपनी बहन की कब्र खोदकर उसके कंकाल को कंधे पर रख कर उड़िसा ग्रामीण बैंक तक ले गया।

जिसका वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। इस घटना के वक्त बैंक के बाहर मौजूद लोगो में काफी रोष भर गया। तुरंत मौके पर पुलिस पहुंची और मामले को शांत कराया गया.. वहीं अब बैंक अधिकारियों से भी जांच शुरु कर दी गई है। पुलिस ने जीतू मुंडा को आश्वासन दिया है कि वो उन्हें न्याय जरूर दिलायेंगे। हैरानी की बात  है कि जीतू की बहन की मौत के सत्यापन के लिए कई तरीके थे, लेकिन बैंक ने पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया.. जिसके बेबस होकर जीतू को ऐसा कदम उठाना पड़ा। अब देखना ये होगा कि पुलिस कार्यवाई के बाद क्या होता है।

हरदोई में स्कूल प्रिंसीपल की बदतमीजी का करारा जवाब

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के हरदोई से है, जहां एक तरफ राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बच्चो की कमी के कारण सैकड़ो स्कूलों को या तो बंद करवा दिया या फिर उसे मर्ज करवा दिया.. वहीं  नीजि स्कूलो की मनमानी को लेकर अब तक उन्होने कोई एक्शन नहीं लिया है.. यहां तक कि दिनदहाड़े दलित अभिभावकों को अपमान किया जा रहा है.. लेकिन सरकार तमाशबीन बनी हुई है। जी हां, सोशल मीडिया पर प्रिंसीपल द्वारा एक पेंरेट की बुरी तरह से बेज्जती करने का वीडियो वायरल होने के बाद अब इस मामले में एससी एसटी एक्ट भी जोड़ दिया गया है।

वहीं .. अब स्कूल की मान्यता को रद्द करने की बात भी की जा रही है। पीड़िता नीलम वर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रिंसीपल से कहा था कि जो बची हुई नोटबुक है उसे लेने के लिए उन्हें 10 दिन का समय दे दें.. क्योंकि वो 1200 रूपय की आयेंगी। लेकिन प्रिंसीपल नहीं मानी। वीडियो के वायरल होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और आरोपी शिक्षको के खिलाफ कार्यवाई की मांग की थी, जिसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अजीत सिंह की तीन सदस्य कमेटी ने जांच में मैनेजर तथा प्रिंसिपल ममता मिश्रा को दोषी पाया और दोनो के स्कूल में प्रवेश पर रोक लगा दी..

अब दोनो की लिखित माफी मांगने को तैयार है, जिसे लोग संविधान की ताकत कह रहे है.. हैरानी की बात है कि जब तक किसी बात का तमाशा नहीं बनता..तब तक क्यों प्रशासन के कान खड़े नही होते है… ये तो केवल एक स्कूल की बात है यूपी के अनगिनत स्कूलों का ऐसा हाल है। लेकिन आखिर सरकार क्या रह रही है। इसा जवाब कौन देगा।

तमिलनाडु के पुदुकोट्टई दलित युवक का शव मिला

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के पुदुकोट्टई से है, जहां एक दलित युवक को एक स्वर्ण जाति से प्यार करने के बदले इसका प्रताड़ित किया गया कि उसने खुद की जान ले ली.. ये घटना पुदुकोट्टई जिले की कुलाथुर तहसील के नाडुपट्टी की है, मृतक आर. हरिहरन का एक गांव के ही एक सवर्ण जाति की महिला से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन घर वालों को ये रिश्ता मंजूर नहीं था जिसके कारण दोनो कुछ महीने पहले घर से भाग भी गए थे, लेकिन कीरानूर पुलिस स्टेशन ने उन्हें खोजा और काउंसलिंग के बाद जातिगत मतभेदों के कारण दोनो अलग अलग रहने लगे थे।

साथ ही युवकी दलित युवक को इग्नोर कर रही थी, जिससे तंग आकर पीड़ित युवत ने आत्महत्या कर ली। पीड़ित परिवार ने बताया कि 21 अप्रैल को हपिहरण की प्रेमिका का फोन आया था और हरिहरण तुंरत चला गया था, तब से उसका फोन बंद था.. मगर 23 अप्रैल को, मवेशी चरा रहे स्थानीय लोगों  ने पुदुकोट्टई की खदान में हरिहरण के शव को तैरते हुए देखा.. जिसके बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैली है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि युवती औऱ उसके परिवार वालो ने हरिहरण पर आत्महत्या का दवाब बनाया है। जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है.. जांच के बाद ही साफ होगा कि ये आत्महत्या थी या हत्या.., और आत्महत्या के पीछे किसका हाथ था।

बीजेपी के दलित कार्ड में फंसी ममता बनर्जी

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला पश्चिम बंगाल से है, जहां दलितो के अपमान के मुद्दे पर इस बार वहां की सीएम ममता बनर्जी ही लपेटी जा रही है। बीजेपी का दलित कार्ड यहां भी चलने लगा है,, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वो 23 अप्रैल को कोलकाता के चौरंगी इलाके में चुनावी रैली के दौरान बीजेपी पर निशाना साधते साधते जानबाज़ार इलाके में SC समुदाय के लिए सार्वजनिक रूप से अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया।

जिसे लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने खुद संज्ञान लेत हुए सीएम को नोटिस जारी कर दिया है.. आयोग ने तीन दिन के अंदर रिपोर्ट मांगी है… आयोग ने से भी साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी द्वारा की गई टिप्पणी कानूनन अपराध की श्रैणी में आता है। वहीं बीजेपी ने लगे हाथों में बहती गंगा में हाथ धोकर टीएमची को दलित विरोधी बता दिया है।

बीजेपी ने आरोप लगाया कि TMC दलित-विरोधी, SC-विरोधी और संविधान-विरोधी है.. अब आयोग की कार्यवाई के बाद बंगाल सीएम का क्या रिएक्शन आता है.. साथ ही क्या इससे बीजेपी का दलित कार्ड यहां चलेगा.. आपको क्या लगता है। हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

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