UGC Guidelines: देश में UGC के नए नियम SC-ST एक्ट में अब OBC छात्रों को भी शामिल करने और ‘इक्विटी कमेटी बनाने के फैसले को लेकर काफी समय से बवाल मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में UGC ने एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें जातिगत भेदभाव के आकड़े थे। रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा के मंदिरों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें 2017-18 में 173 थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 378 हो गईं यानी 5 साल में इसमें 118.4% की बढ़ोतरी हुई। जिसके बाद SC के आदेश पर ही 13 जनवरी 2026 को यूजीसी नया नियम लेकर आई। जो 15 जनवरी को लागू होना था। नया नियम लागू होने से पहले ही समान्य वर्ग ने इसको लेकर आंदोलन छेड़ दिया।
जिसका नतीजा ये निकला की अब इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगा दी है। उसके बाद भी अभी ये आंदोलन थमा नहीं है। इस बीच बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Former City Magistrate Alankar Agnihotri) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। एक बार फिर वह अपने SC-ST एक्ट को लेकर दिए बयान के चलते चर्चाओं में है। तो चलिए सबसे पहले हम ये जान लेते है कि SC-ST एक्ट क्या है और इसमें OBC वर्ग को क्यों शामिल किया गया है।
क्या है SC-ST एक्ट – What is the SC-ST Act?
SC-ST एक्ट यानी (Scheduled Castes and Scheduled Tribes Act) है। जो दलित और आदिवासी वर्ग के लोगों को भेदभाव और उत्पीड़न से सुरक्षा देता है। भारत में इस कानून को 30 जनवरी 1990 में लागू किया था। इस कानून में 20 से अधिक प्रकार के अपराध शामिल हैं, जैसे जातिसूचक गालियां देना, जबरन जमीन कब्जा करना, या सबके सामने अपमानित करना। और इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति ((Scheduled Castes) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes Act) के साथ होने वाले भेदभाव, हिंसा और अपमानजनक व्यवहार को रोकना है।
आरोपी को 10 साल की जेल
इस कानून के तहत धारा 3 अधिनियम में सामाजिक अपमान, आर्थिक शोषण, शारीरिक हिंसा शामिल है, और अगर लोक सेवक लापरवाही करता है तो उसे 6 महीने से 1 साल तक की सजा हो सकती है। 2018 में इस कानून में बदलाव के बाद अगर आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज हो गई है तो आरोपी की गिरफ्तारी के लिए बड़ा अधिकारियों के इजाजत की जरूरत नहीं है। अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) का प्रावधान नहीं है, Supreme Court ने साफ तौर पर कहा है कि अगर पहली बार में कोई मामला नहीं बन पाता है तो कोर्ट जमानत दे सकता है।
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, सिर्फ़ अपमानजनक शब्द कहना अपराध नहीं है। यह भी साबित करना होगा कि आरोपी का मकसद पीड़ित को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना था। इसके अलावा, अगर कोई जानबूझकर झूठी शिकायत करता है, तो उसे 10 साल तक की जेल और ₹2 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। यह SC-ST एक्ट का एक संक्षिप्त अवलोकन था।
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
अलंकार अग्निहोत्री बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट थे। जो अपनी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद से लगातार अपने बयानों और ऐलानों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। रविवार देर शाम वे वाराणसी के ज्योतिष पीठ पहुंचे, जहां शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati) से आशीर्वाद लिया। वैदिक मंत्रोच्चार और परंपराओं के बीच हुई इस मुलाकात को वे अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत मान रहे हैं।
एससी-एसटी एक्ट खत्म करने की मांग
आशीर्वाद के बाद मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अगर 6 फरवरी तक केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट (SC-ST ACT) को खत्म करने का फैसला नहीं करती है, तो 7 फरवरी से देशभर से लोग दिल्ली की ओर कूच करेंगे। और बड़े पैमाने पर जन आन्दोलन करेंगे उनके मुताबिक, यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी।
अलंकार अग्निहोत्री तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य और वेदपाठी बटुकों के साथ हुई कथित घटना और यूजीसी (UGC) के नए नियमों से आहत होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्हें निलंबित भी किया गया। उनका कहना है कि यह फैसला भावनात्मक नहीं, बल्कि वैचारिक था। इतना ही नहीं वो यह भी दावा करते हैं कि लंबे समय से वे एससी-एसटी एक्ट (SC-ST ACT) के प्रभाव को समाज में देख रहे हैं और उनके अनुसार इस कानून का दुरुपयोग बढ़ा है, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति बन रही है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधा
आपको बता दें, शंकराचार्य इस समय मौन व्रत पर हैं, इसलिए बातचीत लिखकर हुई। वही अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि किसी बड़े काम से पहले गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा है और यह आशीर्वाद उनके आंदोलन को नैतिक बल देगा। उन्होंने साफ कहा कि अगर 6 फरवरी तक संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट (SC-ST ACT) खत्म नहीं किया गया, तो 7 फरवरी को देशभर से लोग दिल्ली पहुंचेंगे। उनका दावा है कि यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है। इतना ही नहीं उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो जनता सड़कों पर उतर सकती है।
यूजीसी रेगुलेशन पर भी सवाल
अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए रेगुलेशन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने इसे सरकार के लिए नुकसानदायक फैसला बताया। वही जब मीडिया रिपोर्टर्स ने उनसे राजनीति में आने के सवाल किया तो उन्होंने अपना जवाब देते हुए कहा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। वे इसे समाज और देश के हित से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी में लौटने का कोई सवाल नहीं है।
उन्होंने आगे की बातचीत में ये भी कहा कि “केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत” दरअसल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे पहले भी अपनी बात रख चुके हैं। फिलहाल अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) के इस ऐलान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब नजर 6 फरवरी पर टिकी है कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।



