BNS Section 303: अब कैसी होगी चोरी पर कार्रवाई? जानें विस्तृत जानकारी

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303 BNS in Hindi:अक्सर लोग चोरी और धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं, या धोखे से उनकी संपत्ति उनसे छीन ली जाती है। लेकिन क्या आप जानते है ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 303 क्या कहती है? BNS Section 303 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 303 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 303…उस व्यक्ति पर लागू होती है जब कोई व्यक्ति बेईमानी की नीयत से, किसी दूसरे व्यक्ति की चल संपत्ति को उसकी मर्ज़ी के बिना हटाने या ले जाने की कोशिश करता है। इतना ही नहीं अगर चोरी से उसकी सम्पति के पेपर भी चुराता है तो अपराधी के खिलाफ यह धारा लागू होती है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अगर चोरी की गई प्रॉपर्टी की कीमत ₹5,000 से कम है, और अपराधी पहली बार अपराध कर रहा है और प्रॉपर्टी बरामद हो जाती है, तो कोर्ट जेल की सज़ा के बजाय कम्युनिटी सर्विस का आदेश दे सकता है।

BNS 303 Important Points

  • चोरी किसी व्यक्ति के कब्ज़े से उसकी मर्ज़ी के बिना कोई भी चल संपत्ति बेईमानी से हटाना है।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303, जो पहले IPC की धारा 378/379 थी, को रिवाइज किया गया है और नए प्रावधानों के साथ पेश किया गया है।

बीएनएस धारा 303 का उदहारण 

For Example: मान लीजिए उमेश को सुरेश के घर में टेबल पर एक अंगूठी पड़ी दिखती है। उमेश उसे चुराना चाहता है, लेकिन पकड़े जाने के डर से वह उसे तुरंत नहीं लेता। इसके बजाय, वह उसे घर के एक कोने में छिपा देता है ताकि बाद में जब कोई न देख रहा हो, तो वह उसे ले जा सके, और यह भी ताकि सुरेश को वह आसानी से न मिले। इसे भी चोरी ही माना जाएगा, और ऐसा करने वाले को इसके लिए सज़ा मिल सकती है।

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बीएनएस धारा 303 की और सजा

इसके अलावा, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (BNS) का सेक्शन 303 उस व्यक्ति के लिए सज़ा तय करता है जिसे अपराध का दोषी पाया जाता है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति चोरी करता है या धोखे से प्रॉपर्टी ले जाता है। तो इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 3 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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