India Constitution Article 1: यह तो सब जानते हैं कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने भारतीय संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया था। इसे बनाने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे थे। आज देश में लोग इसी संविधान के तहत काम करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान का आर्टिकल 1 क्या कहता है? अगर नहीं, तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं।
संविधान क्या है? What Is Consitution
संविधान देश का सबसे बड़ा कानून है। यह उस फ्रेमवर्क के बारे में बताता है जो सरकार/राज्य/संस्थाओं के फंडामेंटल कोड, स्ट्रक्चर, प्रोसीजर, पावर और ड्यूटी को तय करता है। इसमें फंडामेंटल राइट्स, राज्य की पॉलिसी के डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स और नागरिकों की ड्यूटी भी शामिल हैं। इसके अलवा आपको बता दें, पूरी दुनिया में भारत का संविधान सबसे बड़ा और लंबा संविधान है।
क्या कहता है आर्टिकल 1? Article 1
भारतीय संविधान का आर्टिकल 1 देश के नाम और उसके पॉलिटिकल स्ट्रक्चर के बारे में बताता है। इसमें मुख्य रूप से दो बातें बताई गई हैं: देश का नाम: “इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक यूनियन होगा।” उस समय कुछ लोगों को इस पर भी एतराज़ था। इंडिया क्यों, भारत क्यों नहीं, जबकि कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली में चर्चा हुई कि हम जो कॉन्स्टिट्यूशन लिख रहे हैं, उसके हिसाब से देश का नाम क्या होना चाहिए? तो सबने कहा, हिंदुस्तान होना चाहिए। किसी ने कहा भारत होना चाहिए। अलग-अलग राय दी गई। फिर बाद में इस बात पर आम सहमति बनी कि हमें इंडिया और भारत दोनों ही रखने चाहिए।
ड्राफ़्ट में भारत को ‘राज्यों का संघ’ घोषित किया
टेरिटरी इसमें कहा गया है कि भारत के राज्य और उनके टेरिटरी संविधान के पहले शेड्यूल में बताए गए अनुसार होंगे। इसके तहत, भारत राज्यों का एक नॉन-डिवाइडेबल यूनियन है, जिसका मतलब है कि किसी भी राज्य को भारत यूनियन से अलग होने का अधिकार नहीं है। वही भारतीय संविधान का आर्टिकल 1, 1950 के ड्राफ़्ट पर 15 और 17 नवंबर 1948 और 17 और 18 सितंबर 1949 को बहस हुई थी। ड्राफ़्ट में भारत को ‘राज्यों का संघ’ घोषित किया गया और भारत के इलाके को बताया गया।
इस मसौदे को लेकर ज़्यादातर सदस्य इस बात को लेकर कन्फ्यूज़ थे कि भारत को “यूनियन” के बजाय “यूनियन ऑफ़ स्टेट्स” क्यों कहा गया, जबकि इसे “फ़ेडरल यूनियन” कहना ज़्यादा सही होता। संविधान का ड्राफ़्ट पेश करते समय, ड्राफ़्टिंग कमिटी के चेयरमैन ने साफ़ किया कि “यूनियन ऑफ़ स्टेट्स” शब्द का इस्तेमाल यह पक्का करने और साफ़ करने के लिए किया गया था कि राज्यों को भारत से अलग होने का अधिकार नहीं है।



