गांव छोड़ने को मजबूर दलित परिवार से लेकर ऑनर किलिंग तक, पढ़िए Top 5 Dalit News

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Top 5 Dalit News: ऐसा क्यों है कि जब गैर दलित को एक खरोंच भी आये तो उसे इतना बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है जैसे वो कोई जंग लड़ कर आये हो, और दलितों की आवाज तब तक प्रशासन तक नहीं पहुंचती है जब तक वो एक आंदोलन में न बदल जायें। ऐसा लगता है जैसे सिर्फ कहने के लिए ये देश लोकतंत्र है, लेकिन यहां कानून अब मनुस्मृति का चलता है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में… लेकिन धरातल पर इस पर चर्चा करने से भी कतराते है।

गुजरात के साबरकांठा में दलित करना चाहते है पलायन

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला गुजरात से है, जहां भले ही विकास के लिए गुजरात मॉडल की सराहना की जाती है लेकिन ये मॉडल जातिगत भेदभाव औऱ उत्पीड़न से दलितों को नहीं बचा सका। नतीजा ये हुआ है कि गांव के 35 परिवार गांव छोड़ कर पलायन करना चाहते है, यहां तक कि दलिक सरपंच को भी नहीं बख्शा गया। दिल को झकझोर देने वाला ये मामला साबरकांठा में रूपाल गांव का है, जहां दलितों की आपबीति किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देगी कि आखिर विकास हो रहा है तो हो किसका रहा है।

गांव में छुआछूत भेदभाव चरम पर

क्योंकि दलित तो आज भी जातिवादी आतंकियों द्वारा उतने ही पीड़ित है। पीड़ितों ने बताया कि गांव में छुआछूत भेदभाव चरम पर है, उन्हें तो आज भी उस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जाता है जहां से उंची जाति के लोग जाते है, वहीं सरकार की नीतियों के कारण दलित सरपंच तो बन गए, लेकिन पद का जातिगत भेदभाव पर कोई असर नहीं है। वो पहले की ही तरह जातिगत भेदभाव और छुआछूत से प्रताड़ित है। ऐसे में तंग आकर गांव के 35 परिवार गांव छोड़ना चाहते है।

उनकी इस स्थिति पर आज़ाद समाज पार्टी एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष,सुनील आस्तेय ने पीड़ितो के लिए आवाज उठाई है.. और गुजरात पुलिस और गुजरात सीएम को टैग करके राज्य के दलित परिवारों के लिए कोई ठोस कदम उठाने की मांग की है, अब देखना ये होगा कि क्या आसपा के इस मुद्दे पर आवाज उठाने से दलित परिवारों की स्थिति में कोई सुधार होगा।

उन्नाव में दलित परिवार की बुरी तरह से पिटाई

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से है, जहां दलितों को आज भी अपना घर औऱ जमीन हासिल करते हुए देखना कुछ जातिवादियों के लिए आंखो की किरकिरी है। ताजा मामला उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र के बौरीखेड़ा गांव का है, जहां दलित परिवार ने दबंगो को अपने ही घर की बाउंड्री फांदकर जाने से इंकार क्या किया, जातिवादि दबंगो ने पूरे परिवार को बुरी तरह से पीटा।

पीड़िता सीता देवी ने पुलिस को बताया कि गांव के ही संतोष पाल, सत्येंद्र पाल, शिवम पाल और श्री अक्सर उनके घर की बाउंड्री को अवैध रूप से जबरन फांद कर आते जाते थे, जिसका दलित परिवार ने कई बार विरोध भी किया, लेकिन जब उन लोगो ने इसकी शिकायक करने की चेतावनी दी तो चारो दबंग भड़क गए और  28 मई 2026 की सुबह लाठी डंडे लेकर उनके घर में जबरन घुस गए और जातिसूचक गालियां देते हुए पीड़िता को बुरी तरह से बाल पकड़ कर पीटना शुरु कर दिया। जब घर के लोग बचाने आये तो उन्हे भी बुरी तरह से पीटा।

वहीं मारपीट के बाद उन लोगो ने धमकी दी कि वो दुबारा दिखे तो जान से मार देंगे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरु कर दी है वहीं थाना प्रभारी राहुल सिंह ने बताया कि घायलो को अस्पताल भेजा गया है, आरोपियों की तलाश जारी है.. जल्द ही सभी पुलिस की गिरफ्त में होंगे। हैरानी की बात है कि अपने ही घर में आने से रोकने के लिए दलित परिवार को ये सजा मिली है.. तो भला वो कहां सुरक्षित है।

केरल में दलितों परिवारों को जबरन किया जा रहा है प्रवासित

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल के एर्नाकुलम से है, जहां दलितों परिवारों को सामूहिक रूप से बेदखल करने का मामला अब हिंसक रूप ले चुका है। दरअसल 20 मई को किझाक्कंबलम के पास मलयिदामथुरुथ में दलित परिवारों को उनके निवास स्थान से बेदखल करने के लिए 200 पुलिस वालों को तैनात किया गया था, 2.65 एकड़ में फैली इस विवादित जमीन पर  पुलैया जाति के सात परिवार कई दशको से रह रहे है।

लेकिन जैसे ही संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार बनी, वैसे ही अवैध जमीनों को खाली कराने का काम शुरू हो गया, लेकिन दलित परिवारों का कहना है कि वो कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे है ऐसे में कैसे अपना घर छोड़ कर जा सकते है, इस तरह से जबरन उनका घर तोड़ना अन्याय है, बढ़ते विवाद को देखते हुए अब मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशान ने सफाई दी है कि बेदखली अदालत के अनुसार होती है तो पीड़ितो के पुनर्वास का पूरा बंदोबस्त होगा।

वहीं 25 मई को ये मामला  केरल उच्च न्यायालय पहुंचा है जिसके बाद बेदखली का कार्यवाई करने के लिए 2 सप्ताह का टाइम दिया है, हैरानी की बात है कि दलित परिवार को उनका ही घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं दिया जा रहा है.. अब देखना ये होगा कि सरकार का इस मुद्दे पर क्या रूख होगा।

भीम आर्मी चीफ का कद बड़ा

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, ऐसा लगता है कि केवल यूपी के दलित ही नहीं बल्कि मुसलमाओं ने भी कमर कस ली है कि वो आजाद को अगला सीएम बना कर ही दम लेंगे। आजाद की उपलब्धियों में एक और सितारा जुड़ गया है। अभी हाल ही में लगातार विपक्ष के नेता आसपा जॉइन कर रहे है, जिसमें अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय महासचिव व सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता “एड. जाहिद ताज अली” ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ कर आसपा का हाथ थाम लिया है।

अली दलित मुसलमानों के लिए लड़ने वाली पसमांदा फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे थे, लेकिन आजाद की विचारधारा और लड़ाई से वो इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर आजाद का हाथ पकड़ लिया.. जो इशारा है कि आसपा यूपी विधानसभा चुनाव में एक बड़ी पार्टी बन कर उभरने वाली है। वैसे आजाद की उपलब्धियां बता रही है कि शायद अब दलितों के सम्मान से जीने का समय नजदीक है।

तमिलनाडु में ऑनर किलिंग

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के तेनकासी से है, जहां एक और ऑनर किलिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है, लेकिन हैरानी की बात है कि करीब एक महीने से ऊपर हो जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में की गई कार्यवाई की कोई डिटेल्ट परिवार को नहीं बताई है। जिसके बाद थक हार कर मृतक की मां ने पुलिस महानिदेशक से अर्जी लगाई है। ये घटना तेनकासी जिले के सेंगोट्टई में घटित हुई थी, जब 21 साल का सुभाष , जो कि पल्लर समुदाय से आता है, उसका प्रेम संबंध 16 साल की मरावर समुदाय की एक लड़की से था।

लेकिन अलग अलग जाति से होने के कारण लड़की के घर वालो को जब इस रिश्ते की खबर लगी उन लोगो ने सुभाष को रास्ते से हटाने का फैसला किया जिसके लिए 16 अप्रेल 2026 को लड़की का एक रिश्तेदार धनाशंकर ने बात करने के बहाने सुभाष को सेंगोट्टई से कन्नुपुलिमेट्टू जाने वाली सड़क पर बुलाया था, जहां पहले से ही मारिचेलवम, धनाशंकर और एक 17 साल का आरोपी इंतजार कर रहे थे, तीनो ने सुभाष को जातिसूतक गालियां दी और फिर हसिया से उस पर हमला कर दिया।

कबूलनामें पर बाकि आरोपियों भी गिरफ्तार

सबूत मिटाने के लिए सुभाष के शरीर को पत्थर से बांध कर एक बंद कुएं में भी फेंक दिया,लेकिन मातापिता की तहरीर पर जब जांच शुरु हुई तो 17 साल का आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आया और उसने सारी कहानी बताई। पुलिस ने उसके कबूलनामें पर बाकि आरोपियों को भी गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक उनकी कोई चार्जशीट तैयार नहीं की.. मृतक की मां को डर है कि कहीं उन्हें जमानत न मिल जायें। चार्जशीट को 2 महीने के अंदर दाखिल करना चाहिए, ताकि न्याय जल्द हो, वहीं परिवार को मुआवजा औऱ सुरक्षा मुहैया कराई जाये, क्योंकि आरोपी का परिवार राजनीतिक रूप से काफी मजबूत है। ऐसे में उन्हें डर है कि कहीं सबूतों के साथ छेड़छाड़ न कर दी जाये। अब देखना ये होगा कि पीड़िता की अर्जी के बाद क्या इस मामले में तेजी आती है।

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