Top 5 Dalit news: ऐसा लगता है कि सदियों से जिन दलितों की आवाज को दबा कर उनपर मनमानी करने की आदत मनुवादी मानसिकता वालों को आज भी जाने का नाम नहीं ले रही है। जहां कानून है, लोकतंत्र है और सबसे बड़ा संविधान है, लेकिन दलितों को नीच समझ कर उन्हें दुत्कारने की विकृत मानसिकता आज भी बरकरार है। तभी तो अगर कोई दलित अपने में सवाल उठाए तो जवाब के बदले उन्हें मिलती है सलाखें।
नमस्कार पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला तमिलनाडु के पलक्कड़ से है, जहां एक कांग्रेस नेता पर दलित महिला के साथ यौन उत्पीड़न करने का मामला सामने आने के बाद राजनीति में हलचल मच गई है। ये खबर पालक्काड नगर निगम से जुड़ी है..पीड़िता ने कांग्रेस के स्थानिये नेता और पार्षद प्रसॉब एम वलसन पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि नौकरी दिलाने का झांसा देकर वलसन ने कई बार उसका यौन उत्पीड़न किया है। बार बार यौन उत्पीड़न होने के कारण उसे डर था कि कहीं उसे आगे जाकर जान से न मार दिया जाये इसलिए सबूत के तौर पर उसने एक वीडियो भी बनाया था।
पीड़िता इस दौरान गर्भवती भी हो गई थी, लेकिन आरोपी ने उसका जबरन गर्भपात कराने की कोशिश की। पीड़िता ने आखिरकार पुलिस को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने इस मामले की छानबीन शुरु कर दी है तो वहीं आरोपी वलसन फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है, तो वहीं कांग्रेस ने भी उसे निष्कासित कर दिया है। अब देखना ये होगा कि क्या एक नेता होते हुए भी आरोपी को सजा मिलती है..या पावर के दवाब में पुलिस झुक जायेगी।
केंद्रिय मंत्री पर सवाल उठाने के बदले मानहानि केस
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के नागपुर से है, जहां कारवां मैगजीन की केंद्रिय मंत्री बीजेपी नेता नीतिन गडकरी पर छपी रिपोर्ट के आधार पर वीडियो बनाना और उनसे सवाल करना दलित पत्रकार मुकेश मोहन को काफी भारी पड़ गया है। दरअसल मुकेश मोहन ने अभी हाल ही में नीतिन गडकरी के उस व्यापार पर सवाल उठाया था, जिसमें 1 मार्च 2026 को कारवां पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नीतिन गडकरी की कंपनी बीफ की आड़ में भैंस नहीं, गोमांस का व्यापार करने वाली कंपनी से जुड़ी है जबकि महाराष्ट्र में गो मांस प्रतिबंधित है! जबकि अभी हाल ही में रेम्बल एग्रो एंड फूड्स नामक कंपनी की एक ट्रक जब्त किया गया है।
पहले दावा किया गया है कि मांस भैंस का है लेकिन शक के आधार पर जब जांच की गई तो कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे ये साबित हो कि वो गौ मांस नहीं है.. ऊपर से ये कंपनी जिस कंपनी को माल भेज रही है वो मिथर इंटरनेशनल है, जो कि दुबई की एक कंपनी है जो केवल गौ मांस में डील करती है।
इस खुलासे के बाद जब मुकेश ने नीतिन गडकरी पर सवाल उठाये तो कारवां मैग्जीन पर मानहानी की केस करने के बजाये नीतिन गडकरी की तरफ से मुकेश पर 50 करोड़ का मानहानी केस कर दिया गया है। जब से ये खबर सामने आई है, तब से राजनीति गलियरो के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी हचलच है। अब देखना ये होगा कि एक दलित पत्रकार को कमजोर समझ कर उसे दबाने की कोशिश क्या सफल होगी..या सफेद पोश के काले चेहरे सामने आयेंगे।
भीम आर्मी चीफ की लोकप्रियता का नया प्रमाण
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिनकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मेरठ में सपा, बसपा व भाजपा के दर्जनों नेताओं ने दिल्ली में एक साथ आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ले ली है। आजाद लगातार बहुजन समाज के लोगो के लिए आवाज उठा रहे है, जिसके कारण उन्हें अक्सर धमकियां दी जाती है, उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.. लेकिन आजाद के जुड़ रहे नेताओं के भीड़ बता रही है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है। बहुजन समाज ने एकजुटता दिखाते हुए आजाद को अगला सीएम बनाने की मुहीम शुरु कर दी है।
आजाद ने ऐलान कर दिया कि अगर 2027 में वो आते है तो दलितों और गरीबो का अपमान करने वालों पर सबसे पहले नकेल कसी जायेगी.. खुद को कई बड़े नामों से बुलाने वाले लाइन से लगकर उनका सम्मान करते नजर आयेंगे। आजाद की हुंकार और उनकी रैलियों में आने वाली भीड़ बता रही है कि मौजूदा सरकार के लिए आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होगा। अब देखना ये है कि दलित समुदाय किस हद तक एकजुट होकर आगे बढ़ता है। क्योंकि उनका बंटवारा ही उनपर भारी पड़ता है।
भटिंडा में दलित होने के कारण नहीं दिया दाखिला
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला पंजाब के भटिंडा से है, जहां एक दलित छात्र को केवल उसकी जाति के कारण बठिंडा के राजिंदर कॉलेज के प्रिंसिपल ने दाखिला देने से इंकार कर दिया था। इस खबर के सामने आने के बाद पंजाब राज्य के अनुसूचित जाति आयोग ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज के प्रिंसिपल को तलब किया है… आयोग के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस खबर के बारे में उन्हें एक अखबार से जानकारी मिली थी, जिस पर तुरंत दलित छात्रा से बातचीत की गई जिससे खबर की पुष्टि हो गई।
जिसके बाद आयोग ने प्रिंसीपल को कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए 1 अप्रैल को आयोग के सामने पेश होने का निर्देश सुनाया है। हैरानी की बात है कि अब तक केवल जाति के आधार पर कॉलेज के अंदर उत्पीड़न होते थे लेकिन अब तो जाति के नाम पर उन्हें एडमिशन तक नही दिये जा रहे है। ऐसी जातिवादी शिक्षक रहेंगे तो क्या दलित कभी शिक्षित हो पायेंगे.. जवाब आप खुद जानते है।
महाराजगंज में दलित किसानों के साथ अन्याय़
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के महाराजगंज से है, जहां ठाकुर समाज के लोगो ने दलितों पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी है। .ये मामला महाराजगंज जिले के निचलौल तहसील के गांव शिकारपुर की है, जहां जमीन विवाद के चलते दलित और गरीब मुसहर समुदाय के किसानो की खड़ी फसल पर ट्रेक्टल चला कर उसे पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया। पीड़ित किसानो ने बताया कि काफी लंबे समय के गांव के दबंगो की उनकी जमीनो पर नजर थी, जबकि 30 साल पहले सीताराम नाम के व्यक्ति को जमीन का पट्टा दिया गया था लेकिन उसने कभी जमीन पर दावा नहीं किया।
लेकिन अभी कुछ महीनो पहले पम्रिला नाम की महिला को धोखे से जमीन दे दी गई औऱ अब राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर जमीन को हड़पने की साजिश की जा रही है। जब किसान नही माने तो उनकी फसलो को बर्बाद कर दिया..जो कि 50 दलित परिवारों का भरन पोषण करने वाली थी। इतना ही नहीं किसानों को झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी गई..जिसके लिए निचलौल के डीएम को अर्जी देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना ये होगा कि किसानो का मदद के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।



