FIR against Journalist: विवादों में कारवां की रिपोर्ट, दलित पत्रकार के खिलाफ FIR और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जब्ती

FIR against Dalit journalist
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FIR against Journalist: हाल ही में, महाराष्ट्र के नागपुर से एक चौंकाने वाला और परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ नितिन गडकरी की आलोचना करने वाली एक रिपोर्ट चलाने के लिए एक दलित पत्रकार के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है।

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केंद्रिय मंत्री पर सवाल उठाने के बदले मानहानि केस

क्या अब सच सामने लाना गुनाह बन गया है? क्या किसी पत्रकार को कोई ख़बर रिपोर्ट करने की भी इजाज़त नहीं है—या फिर दलित होना कोई अभिशाप है? ऐसा ही एक खबर महाराष्ट्र के नागपुर से है, जहां कारवां मैगजीन (Caravan Magazine) की केंद्रिय मंत्री बीजेपी नेता नीतिन गडकरी (Union Minister and BJP Leader Nitin Gadkari) पर छपी रिपोर्ट के आधार पर वीडियो बनाना और उनसे सवाल करना दलित पत्रकार मुकेश मोहन को काफी भारी पड़ गया है।

दरअसल मुकेश मोहन ने अभी हाल ही में नीतिन गडकरी के उस व्यापार पर सवाल उठाया था, जिसमें 1 मार्च 2026 को कारवां पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नीतिन गडकरी की कंपनी बीफ की आड़ में भैंस नहीं, गोमांस का व्यापार करने वाली कंपनी से जुड़ी है जबकि महाराष्ट्र में गो मांस प्रतिबंधित है! जबकि अभी हाल ही में  रेम्बल एग्रो एंड फूड्स नामक कंपनी की एक ट्रक जब्त किया गया है..

दुबई की कंपनी के गौ मांस में डील

पहले दावा किया गया है कि मांस भैंस का है लेकिन शक के आधार पर जब जांच की गई तो कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे ये साबित हो कि वो गौ मांस नहीं है.. ऊपर से ये कंपनी जिस कंपनी को माल भेज रही है वो मिथर इंटरनेशनल है, जो कि दुबई की एक कंपनी है जो केवल गौ मांस में डील करती है।

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मुकेश पर 50 करोड़ का मानहानी केस

इस खुलासे के बाद जब मुकेश ने नीतिन गडकरी पर सवाल उठाये तो कारवां मैग्जीन (Caravan magazine) पर मानहानी की केस करने के बजाये नीतिन गडकरी की तरफ से मुकेश पर 50 करोड़ का मानहानी केस कर दिया गया है। जब से ये खबर सामने आई है, तब से राजनीति गलियरो के साथ साथ सोशल मीडिया पर भी हचलच है। अब देखना ये होगा कि एक दलित पत्रकार को कमजोर समझ कर उसे दबाने की कोशिश क्या सफल होगी..या सफेद पोश के काले चेहरे सामने आयेंगे।

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