Top 5 Dalit news: सरकार ने दलित उत्पीड़न रोकने के लिए कई सख्त कानून तो बना दिए है, लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि कई आधार पर उस केस की सत्यता साबित की जाएगी। क्योंकि जहां उत्पीड़न के प्रत्यक्ष प्रमाण होते है तब भी उन्हें फर्जी और झूठा साबित करने की कोशिश की जाती है, और किसी ने न्याय के लिए लड़ाई शुरू की उन्हें दबाने के लिए सबसे पहले कानून और अधिकारों पर ही निशाना साधा जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने महिला आरक्षण पर उठाये सवाल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजस्थान से है, जहां महिला आरक्षण में दलित महिलाओं के शामिल न किए जाने को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने सरकार ने संशोधन किए जाने को लेकर पूछा कि सरकार को 2027 की जनगणना के बाद संशोधन करना चाहिए था फिर सरकार इतने जल्दबाजी में बिना किसी से सलाह मशवरा किए लागू क्यों करना चाहती है। ये केवल वेस्ट बंगाल और तमिलनाडु चुनावों के कारण किया जा रहा है, जबकि सरकार सही मायने में महिलाओं का भला चाहती तो जातिगत जनगणना होने के बाद ही उसके आधार पर ओबीसी वर्ग और एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए सीटों में वृद्धि करती।
ये नया कानून दलित पिछड़ी जाति की महिलाओं के अधिकारों को बहुत नुकसान पहुंचाएगा। तो वहीं 17 अप्रैल को हुई वोटिंग में दो तिहाई बहुमत न मिलने के कारण विधेयक गिर गया है, ऐसे में देखना ये होगा कि सरकार अब कौन सा नया प्लान बनाती है … लेकिन कानून का न बनना दलित समाज की एकता की जीत का प्रतीक है।
समस्तीपुर में दलित मां बेटी पर हमला
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला बिहार के समस्तीपुर से है, जहां पुरानी रंजिश को निकालने के लिए यादव समाज के कुछ लोगो ने दलित मां बेटी को घर में अकेला पा कर जानलेवा हमला कर दिया। ये घटना समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र के परहट गांव की है. पीड़ित महिला पचिया देवी और उनकी बेटी पूजा कुमारी को गंभीर हालत में सिंघिया पीएचसी में एडमिट कराया गया है, जहां अभी उनका इलाज चल रहा है। वहीं पीड़िता के पति राम नारायण पासवान ने बताया कि वो किसी काम से बाहर गये हुए थे।
इसी बीच काफी पुरानी रंजिश रखने वाले यादव समाज के कुछ लोगो ने मौका पाकर पहले तो उनके घर में घुसे,, वहां तोड़फोड़ की, औऱ जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसे बुरी तरह से पीटा.. इतना ही नहीं बीच बचाव करने आई उनकी बेटी पूजा को भी दबंगों ने नहीं बख्शा। इस मामले में सिंघिया थाना अध्यक्ष श्याम कुमार मेहता के मुताबिक पीड़ित की तहरीर पर मामले की जांच शुरु कर दी गई है, वहीं आरोपियों की भी तलाश जारी है। हैरानी की बात है कि कोई दिनदहाड़े दलित परिवार पर हमला कर देता है, लेकिन उन्हें न तो पुलिसा का डर है और न ही प्रशासन का..अब देखना ये होगा कि क्या सरकार कोई सख्त कदम उठायेगी।
केरल में कांग्रेस पार्षद की बढ़ी मुश्किलें
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल के पलक्कड़ ज़िले से है, जहां एक दलित महिला के साथ नौकरी का झांसा देने यौन उत्पीड़न करने का मामला सामने आने के बाद एक तरफ कांग्रेस ने पार्टी से निकाल दिया तो वहीं विशेष SC/ST अदालत ने कांग्रेस पार्षद प्रशोभ सी. वत्सन की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी.. केरल विधानसभा चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले कांग्रेस नेता के इस अपराध का पर्दाफाश होने के कारण कांग्रेस की छवि को काफी नुकसान हुआ है, वहीं दलित महिला के लगाये आरोपो के बाद पार्षद प्रशोभ सी. वत्सन सफाई पेश करने के बजाय फरार हो गया।
जबकि पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। बता दें कि पीड़िता ने खुद कोर्ट में ये बयान दर्ज कराया कि वो पलक्कड़ शहर में ब्यूटीशियन का कोर्स करने आई थी, लेकिन इसी बीच पार्षद से उसकी जान पहचान हो गई.. उसने नौकरी का झांसा देकर घर पर, कार में औऱ होटल में उसका यौन शोषण किया था। इस खबर के सामने आने के बाद से हा कांग्रेस सवालों के घेरे में आ गई है। अब देखना ये होगा कि पुलिस कब तक पार्षद को गिरफ्तार करती है, और कब तक दलित महिला को न्याय मिलेगा।
एससी एसटी एक्ट पर नई बहस शुरु
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) कानून को लेकर है, जिसे बदलने के लिए एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने आवाज उठाई है। एक शो में इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुलासा किया है सरकार के कानून के हिसाब से जो एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करता है उसे सरकार 2 लाख रूपय मुआवजा देती है.. इसलिए इस कानून का ज्यादातर दुरुपयोग हो रहा है। इसके कारण स्वर्ण समाज को झूठे मामलो में फंसा कर उन्हें बर्बाद करने की साजिश की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के इस खुलासे ने एक बहस छेड़ दी है.. क्या सच में दलितों की स्थिति ऐसी है, क्या उन्हें वाकई में केवल केस मात्र से मुआवजा मिलता है। इस कानून में बदलाव करने की मांग तो बहुत तेज है, लेकिन जब सख्त कानून होते हुए दलित उत्पीड़न नहीं रूप रहा है तो फिर कानून के खारिज होने के बाद की स्थिति क्या होगी.. हम या आप शायद कल्पना भी नही कर सकते है। वैसे आपको क्या लगता है क्या वाकई में अगल दलितो को इतना मुआवजा मिलता तो उनकी स्थिति इतनी दयनीय होती।
नासिक में दलित महिला के साथ उत्पीड़न मामले में बड़ा हंगामा
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के नासिक से है, जहां टीसीएच Cकर्मचारी दानिश शेख पर बलात्कार, यौन उत्पीड़न, और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने के आरोप के साथ साथ एससी एसटी एक्ट भी शामिल कर दिया गया। पीड़िता के अनूसूचित जाति के होने की पुष्टि के बाद ये मामला और ज्यादा संगीन हो चुका है.. साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सीएम देंवेंद्र फड़नवीस ने गहन जांच करने के लिए केंद्रिये एजेंशियो के भी शामिल होने की बात की है। बता दे कि इस मामले में अब तक कई लोग गिरफ्तार हो चुके है लेकिन मुख्य आरोपी दानिश शेख अभी भी फरार है।
हलांकि पहले नो अग्रिम जमानत की अर्जी दे सकता था लेकिन अब एससी एसटी एक्ट लगने के बाद उसके लिए ये रास्ते भी बंद हो गए। गौरतलब है कि टीसीएस नासिक के कार्यलय में जबरन धर्म परिवर्तन कराने और उत्पीड़न करने की कई संगीन आरोप सामने आये थे, जिसके बाद प्रशासन ने सख्ती से जांच शुरु की। जिसमें वहां चल रहे बड़े धर्म परिवर्तन का रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, लेकिन जब एक दलित महिला ने इसकी शिकायत दर्ज कराई तब प्रशासन के काम खड़े हो गए। फिलहाल अब इसकी जांच काफी तेजी से हो रही है… अब देखना ये होगा कि इस मामले में क्या क्या सच सामने आयेगा।



