BNS Section 344: सावधान कर्मचारी! खातों में हेराफेरी की तो खैर नहीं, सीधे होगी जेल

BNS Section 343 in Hindi, BNS Section 343
Source: Google

344 BNS in Hindi: मान लीजिए कि कहीं क्लर्क का काम करने वाला कोई व्यक्ति जानबूझकर ऑनलाइन डेटा से अपने अकाउंट की डिटेल्स डिलीट कर देता है, या कीमती डॉक्यूमेंट्स नष्ट कर देता है, या फ्रॉड करने के इरादे से उनमें बदलाव भी कर देता है। तो क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) का सेक्शन 344 लागू होता है। तो चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।

Also Read: BNS Section 342: जाली मुहर या नकली सील रखना अब पड़ेगा भारी, हो सकती है उम्रकैद

धारा 344 क्या कहती है? BNS Section 344 in Hindi

आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनान मिटाना तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 344 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 344 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई व्यक्ति जान-बूझकर और धोखा देने के इरादे से किसी भी किताब, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, कागज़ को नष्ट करता है, बदलता है, खराब करता है या उसमें जालसाज़ी करता है।

Also Read: BNS Section 341: जालसाजी के लिए नकली मुहर या प्लेट बनाना अब पड़ेगा भारी, हो सकती है उम्रकैद

BNS section 344 important points 

  • यह उस क्लर्क, ऑफिसर या नौकर (कर्मचारी/एजेंट) पर लागू होता है जो अपने एम्प्लॉयर के लिए काम करता है।
  • आपको बता दें, यह सेक्शन पहले IPC के सेक्शन 477A जैसा ही था। लेकिन, नए नियमों और बदलावों की वजह से इसे BNS के सेक्शन 344 के तहत लागू कर दिया गया है।

बीएनएस धारा 344 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 344 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर धोखे से आपके बैंक अकाउंट से छेड़छाड़ करता है या गलत जानकारी देता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 7 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *