B.R. Ambedkar Economics: डॉ. अंबेडकर के वो आर्थिक विचार Economic Thoughts जो मोदी और मनमोहन दोनों ने अपनाए

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Dr Ambedkar Economic-Thoughts: भारत के दो महान प्रधानमंत्री के बारे में बात करेंगे…. पहला किस्सा है… साल 1991 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और वित्त मंत्री के तौर देश के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह थे, उस वक्त देश में सबसे बड़ा वित्त संकट था।  विदेशी मुद्रा भंडार कुछ ही समय के लिए बचा था, ऐसे में पहली बार मनमोहन सिंह ने नई औद्योगिक नीति को लाने का फैसला किया था, जिसके तहत उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और भारत की अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए खोलने की तैयारी की गई, जिसमें 51 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई।

इसने देश की आर्थिक व्यवस्था को न केवल संभाला बल्कि उसे बूम पर ला दिया. अब दूसरे किस्से की बात करते है, 8 नवंबर 2016 की रात को हुई नोटबंदी तो आपको याद ही होगी। जब देश के वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने 1000 और 500 रूपय के नोटो को बंद करने का फैसला किया, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सकें अब सवाल ये है कि आखिर हम दोनो प्रधानमंत्री के देश की अर्थव्यवस्था की दिशा में उठाये कदमों का जिक्र क्यों कर रहे है, तो इसका जवाब है, बाबा साहब अंबेडकर.. दोनो पीएम के विचार भले ही बाबा साहब से न मिलते हो लेकिन उनके उठाये गए ये कदम असल में बाबा साहब से ही प्रेरित थे। जानते है कि कैसे “डॉ. अंबेडकर के आर्थिक विचार, जिन्हें मोदी और मनमोहन दोनों ने अपनाए.. जिसने देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

इंडस्ट्री और इंश्योरेंस को मैनेज

बाबा साहब मानते थे कि इंडस्ट्रियलाइज़ेशन, सोशल जस्टिस, मॉनेटरी स्टेबिलिटी के लिए सबसे जरूरी है कि सबको एक आधार पर रखा जाये। इसके लिए पिछड़े और गरीब लोगो को एमपावरमेंट बनाने पर फोकस किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अपनी किताब ‘द प्रॉब्लम ऑफ़ द रुपी’ में, कई आर्थिक परिवर्तन करने और उन्हें फॉलो करने के लिए क्या क्या करना चाहिए, उसके बारे में बताया है। बाबा साहब ने बताया था कि सभी राज्यो की अपनी आर्थिक मजबूती होनी चाहिए, इसके लिए राज्य को मुख्य इंडस्ट्री और इंश्योरेंस को मैनेज करना चाहिए, जिससे स्टेट सोशलिज़्म और इंडस्ट्रियलाइज़ेशन को बढ़ावा मिले।

गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और पावर एक्सपेंशन

डॉ. मनमोहन सिंह ने बाबा साहब के इस सुझाव का आदर करते हुए गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और पावर एक्सपेंशन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को राज्य के नेतृत्व में ही दिया था। वहीं पीएम मोदी ने भी औद्योगिकीकरण और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए “आत्मनिर्भर भारत” स्कीम लेकर आये. मेक इन इंडिया के जरिए इंडस्ट्रियल ग्रोथ को बढ़ावा दिया, ताकि खेती पर दवाब कम हो जाये, जो कि बाबा साहब का ही सुझाव था। इसके अलावा अपनी किताब में बाबा साहब ने मॉनेटरी स्थिरता और इंस्टीट्यूशन बिल्डिंग को लेकर फोकस किया है।

स्टेबिलिटी और करेंसी को मैनेज

जिसमें उन्होंने प्राइस स्टेबिलिटी और करेंसी को मैनेज करने के लिए एक सेंट्रल बैंक (RBI) बनाने की बात की थी, साथ ही उन्होंने सलाह दी थी कि पैसे की वैल्यू और उसका सही इस्तेमाल करने के लिए कुछ सालों में इसे बदलते रहना चाहिए। जिसके लिए बैकिंग सेक्टर कतो मजबूत करना सबसे ज्यादा आवश्यक है। कुछ ऐसे रिफॉर्म बनने चाहिए जिससे महंगाई पर काबू पाया जा सकें। वहीं 2016 में आरबीआई ने लचीली मुद्रास्फीति सूचकांक ढांचा (Flexible Inflation Targeting Framework) पर कार्य किया, जो कि मुद्रास्फीति टारगेट को आवश्यक बना देता है।

बाबा साहब मानते थे कि जो लोग दबे कुचले है, हाशिये पर है उनकी आर्थिक मजबूती के लिए कदम उठाया जाना चाहिए.. और इससे प्रेरित होकर ही मनमोहन सिंह ने 2005 में महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA) की शुरुआत की थी, जो गरीब और जरूरतमंदों को 100 दिनों का रोजगार देती है और रोजगार न देने की सूरत में गुजारा भत्ता देती है। तो वहीं पीएम मोदी ने भी बाबा साहब की सलाह की ही अनुसरण करते हुए छोटे एंटरप्रेन्योर्स को एक छोटा अमाउंट लोन देने के लिए मुद्रा लोन शुरु किया था।

स्टैंड-अप इंडिया योजना शुरु

इसके अलावा देश के सबसे दबे कुचले वर्ग SC/ST वर्ग और महिलाओं के लिए स्टैंड-अप इंडिया योजना शुरु की, साथ ही गरीब से गरीब लोगो का बैंक में खाता हो, ताकि सबका बैकिंग ट्रासेक्शन हो, उसके लिए जन धन योजना लागू की, जिससे लोगो की आय के बारे में सटीक जानकारी मिलने में सहायता हुई..सरकार द्वारा मदद बिचौलियों को मिलने के बजाये सीधा जरूरतमंद लाभार्थी को मिलने लगी..वहीं बाबा साहब सभी को शिक्षित होने पर जोर देते थे, जिसे देखते हुए एक तरफ मनमोहन सिंह ने 2009 में एक और फंडामेंटल राइट जोड़ा जिसमें राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट लागू किया गया।

अंबेडकर सोशल इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन मिशन

जिसमें हर वर्ग और हर समुदाय को समान शिक्षा का अधिकार मिला..तो वहीं पीएम मोदी ने भी बाबा साहब के विचारो का अनुसरण करते हुए सवर्णो से ज्यादा दलितों की शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने नेशनल स्कॉलरशिप स्कीम की शुरुआत की, जिसके तहत एससी छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए मदद मुहैया कराई जाती है, वहीं एसीसी वर्ग के महत्वकांक्षी युवाओ के लिए अंबेडकर सोशल इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन मिशन (ASIIM) लागू किया। बाबा साहब कहते थे “Educate, Agitate, Organize.. ये उनका ही मानना था कि शिक्षा के जरिए किसी भी तबके का, किसी भी वर्ग का व्यक्ति विकास कर सकता है।

आर्थिक विकास के लिए अपनाये बाबा साहब के बताये उपाय 

वहीं भारत एक खेती प्रधान देश है, जिसे बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी ने सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम, जिसमें मिट्टी की उवर्रकता के बारे में बताया जाता है और बढ़ावा देने में मदद की जाती है तो वहीं उपज बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरु की, जिसमें खेतों में पानी की सही इस्तेमाल कैसे होता है, उसके बारे में बताया जाता है। पीएम मोदी हो या मनमोहन सिंह, दोनों ने ही देश की आर्थिक सुधार के लिए बाबा साहब के बताये उपाय को गाइडलाइंस की तरह इस्तेमाल किया, हालांकि भले ही उसमें उन्होंने कुछ बदलाव किये, कुछ तोड़ मरोड़ किये लेकिन आधार बाबा साहब ही रहे है। देश कितना भी आगे बढ़ जाये,. कितना भी तरक्की कर लें, लेकिन देश की मजबूती के लिए बाबा साहब के योगदान को कभी इग्नोर नहीं किया जा सकता है। वो भारत की अर्थव्यवस्था की नींव है।

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