अंबेडकर का नव्यन बौद्ध धर्म, भिक्षु बनना जरूरी नहीं, सोच बदलना जरूरी है!

Dr. Ambedkar Buddhism
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Navayana Buddhism Dr Ambedkar:  बौद्ध धर्म की स्थापना से पहले ही सत्य की तलाश के लिए राजकुमार सिद्धार्थ गौतम ने न केवल अपना घर छोड़ा था, बल्कि उन्होंने वैराग्य धारण किया और करीब 7 सालो के बाद उन्होंने बुद्धत्व को प्राप्त करके अपने ज्ञान को दूसरो को बांटने के लिए यात्राये शुरु की,,, प्रवचन देना शुरु किया था। उनके साथ जुड़ने वाले उनके अनुयायी बौद्ध भिक्षु बनते गए.. बुद्ध ने हमेशा अपने अनुयायियों को संसारिक मोह माया से निकल कर सत्य को खोजने और जीवन का एक ही ध्येय मोक्ष की प्राप्ति कैसे करें इस पर फोकस करने की सीख दी थी।

बौद्ध धर्म भारत में जन्मा धर्म है और बुद्ध ने महायान परंपरा को बढ़ावा दिया था इसलिए भारत में बौद्ध धर्म को मानने वालों में ज्यादातर भिक्षु ही नजर आते है.. ऐसे में एक सवाल आपके मन में भी जरूर उठता होगा कि बौद्ध धर्म पालन करने वाले केवल भिक्षुक ही होंगे… ये गलतफहमी है या इसके पीछे है कोई और कारण वहीं बाबा साहब अंबेडकर बौद्ध धर्म अपनाने के बाद भी क्या वो भिक्षुओं के तरह जिये थे..जब कि वो अपने घर में ही रहते थे, यहां तक कि उनकी मृत्यु भी उनके घर में ही हुई तो बाबा साहब ने कौन सी परंपरा को अपनाया था। सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि क्या सच में बौद्ध धर्म अपनाने वाले भिक्षु बनते है या वैरागी बनते है।

बौद्ध धर्म दो हिस्सो में बंटा

दरअसल बौद्ध धर्म दो हिस्सो में बंटा हुआ है- पहला गृहस्थ अनुयायी औऱ दूसरे भिक्षु अनुयायी। जिसका अर्थ है कि जो लोग बौद्ध धर्म अपना रहा है उसे जरूरी नही है कि गृह त्याग करके भिक्षु बन कर घर परिवार से अलग रह कर केवल साधना करते हुए जीवन जीना होगा.. सच तो ये है कि बुद्ध ने गृहस्थ रह कर भी बुद्धत्व को प्राप्त करने का एक मध्यम मार्ग बताया है।

जिसके तहत मनुष्य को कठोर तपस्या से गुजर कर मोक्ष का रास्ता तय करने की आवश्यकता नहीं है तो वहीं व्यक्ति को बहुत ज्यादा भोग विलास का भी त्याग करना होगा। जो लोग गृहस्थ रह कर बौद्ध धर्म का पालन करते है उन्हें पंचशील नियमो का पालन करना अनिवार्य है.. जिसमें किसी की हत्या न करना, चोरी न करना, बलात्कार न करना, झूठ न बोलना औऱ नशा न करना.. इन नियमो का पालन करके भी आप गृहस्थ रह कर एक सात्विक जीवन जी सकते है।

गृहस्थ रह कर बौद्ध धर्म का पालन करना

बुद्ध के मुताबिक वैराग्य का सही अर्थ घर परिवार को छोड़ कर साधु बनना नही होता है, बल्कि वैराग्य केवल मोह माया और संसारिक सुखों से आसक्ति पर निर्भर करता है। अर्थात अगर कोई गृहस्थ रह कर बौद्ध धर्म का पालन करना चाहता है तो भी वो कर सकता है, भले ही उसे मोह माया से आसक्त होना पड़ेगा.. वो अपने परिवार के प्रति सारी जिम्मेदारी निभायेगा, लेकिन उनके बदले मे कोई उम्मीद न करें.. तभी आप भविष्य में किसी भी दुख को महसूस नहीं करेंगे. क्योंकि मोह औऱ किसी से इच्छा ही व्यक्ति के दुखो का सबसे बड़ा कारण है।

हालांकि जो लोग भिक्षु बनना चाहते है उन्हें भिक्षु संघ में शामिल होकर वैरागी के भांति बुद्ध के बताये नियमों के अनुसार ही चलना होगा.. जो पूर्णकालीन साधना करना चाहते है और संसारिक मोह माया से अलग होकर जीवन जीना चाहते है वो अपनी इच्छा से बौद्ध भिक्षु या भिक्षुणी बन सकते है। यानि की अक्सर जो गलत फहमी  फैली हुई है कि महायान परंपरा को मानने के लिए वैराग्य अपनाना होगा, ये केवल एक भ्रांति है। गृहस्थ भी बौद्ध धर्म का पालन कर सकता है।

बाबा साहब ने कौन सी परंपरा अपनाई

हम सभी जानते है कि अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ही बाबा साहब ने करीब पौने चार लाख दलितो के साथ महाराष्ट्र के नागपुर में दीक्षाभूमि पर बौद्ध धर्म अपना लिया था.. जिसके बाद उन्होंने 22 प्रतिज्ञायें भी ली थी, लेकिन बौद्ध धर्म अपनाने के बाद वो दिल्ली में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। तो आपने सोचा है कि उन्होंने किस परंपरा का पालन किया था.. तो चलिए आपको बताते है.. दरअसल बाबा साहब ने किसी भी परंपरा का पालन ही नहीं किया था, जिसमें महायान, हीनयान या वज्रयान शामिल थे, बल्कि उन्होंने बौद्ध धर्म को नए स्वरूप में अपनाने का फैसला किया जिसे उन्होंने नवयान नाम दिया था… इस परंपरा को भीमयान नाम से भी जाना जाता है।

बाबा साहब ने बौद्ध धर्म को तब अध्यात्निक मुक्ति के मार्ग के रूप में देखने के बजाय दलितों और पिछड़ो के लिए सामाजिक और नैतिक स्तर पर भी मुक्ति का मार्ग मानते हुए अपनाया था। इतना ही नहीं बाबा साहब की बुद्ध के जीवन पर लिखी किताब बुद्ध और उसका धम्म नवयान को मानने वालो के लिए उनकी पवित्र ग्रंथ के समान है। नवयान को बौदध धर्म के समानता, बंधुत्व, स्वतंत्रता और एक तर्कसंगत परंपरा को मानने वाली परंपरा के रूप में पहचान मिली है। इसलिए बौद्ध धर्म को लेकर कई सारी गलतफहमियां फैली हुई है जिसे दूर करना वाकई में आवश्यक है।

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