Top 5 Dalit news: पूरे देश में इस वक्त दलित विरोधी ऐसी आंधी चल रही है कि कोई सरेआम एक राजनेता को, एक सांसद की हत्या करने की धमकी देता है, कोई देश के पीएम का पुतला फूंकता है लेकिन जातिवादियों की दबंगई इतनी बढ़ गई है कि कानून भी उनके आगे मूक बनी रहती है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
भीम आर्मी चीफ को फिर से मिली जान से मारने की धमकी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, 15 मार्च को बाराबंकी में प्रोग्राम न करने को लेकर करनी सेना की धमकी की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उन्हें फिर से सरेआम सोशल मीडिया पर लाखों की भीड़ में जान से मारने की धमकी दी जा रही है। ये खबर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र के ग्राम सभा पकरी सेवार की है, जहां राहुल त्रिपाठी नाम के शख़्स ने चंद्र शेखर आजाद के बारे में अपशब्द कहते हुए कहा कि अगर उसकी जमानत कराने की जिम्मेदारी कोई ले लेता है तो वो लाखों की भीड़ में भी आजाद को गोली मार देगा।
ये कोई पहली बार नहीं है कि आजाद को इस तरह की धमकी दी रही हो, जबकि वो एक प्रतिष्ठित संवैधानिक पद पर है, लेकिन केवल दलितों की आवाज बनने के कारण जातिवादी आतंकियों ने आजाद को निशाने पर ले लिया है। दलित संगठन और भीम आर्मी के कार्यकर्ता राहुल त्रिपाठी के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग कर रहे है। ऐसी मानसिकता वाले लोग सभ्य समाज के लिए श्राप है और उन्हें भारत में रहने का हक नहीं है। अब देखना ये होगा कि एक संसद को इस तरह से धमकी देने के बाद पुलिस प्रशासन का क्या रवैया होता है।
बिहार में दलित को बुलेट चलाना पड़ा भारी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के जहानाबाद से है, जहां एक दलित शख्स बुलेट पर क्या बैठा, जातिवादि आतंकियों के पेट में दर्द होने लगा..उन लोगो ने दलित युवक को बुलेट पर बैठने की तुगलकी सजा भी दे दी.. हिंमाशु राज नाम का दलित युवक अपनी मां के जन्मदिन के मौके पर अपनी बुलेट गाड़ी से केक लाने लगा था, लेकिन हिमांशु का बुलेट पर बैठ कर चलना ठाकुर समाज के कुछ लोगो को चुभ गया। उन लोगो ने पहले तो हिमांशु को रोककर उसके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पूछा कि एक दलित होकर उसकी बुलेट पर चढ़ने की हिम्मत कैसे हुई।
जिसपर हिमांशु ने दबंगों का विरोध भी किया लेकिन उससे गुस्सायें दबंगो ने हिमांशु को बुरी तरह से पीटा…और उसकी बुलेट गाड़ी के साथ तोड़फोड़ भी की,. वहीं पुलिस ने भी इस मामले में कोई कार्यवाई करने के बजाये दलित परिवार को बाहर कर दिय, जिसके बाद पीड़ित परिवार बहुजन समाज के लिए लड़ने वाले युवा क्रांतिकारी नेता गोल्डन दास से मिलने पहुंचा औऱ न्याय के लिए उनके लिए आवाज उठाने की अपील की है।
हैरानी की बात है कि जब पैसा दलितों की मेहनत का है, कमाई उनकी है तो फिर वो बुलेट से चले या कार से,…किसी भी जातिवादी को इससे क्यों परेशानी है। ऐसा लगता है कि जैसे आज भी कुछ लोग इसी सोच के साथ जी रहे है कि दलित पिछड़े केवल बंधुआ मजदूरी करने के लिए ही है। अब देखना ये होगा कि क्या इस मामले में दलित युवक को न्याय मिलेगा।
पंजाब में दलित मां बेटे के साथ बर्बरता
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला पंजाब के जालंधर से है, जहां दलित मां बेटे के साथ पुलिस की बर्बरता ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। ये घटना जालंधर के भार्गो पुलिस स्टेशन इलाके का है, इस घटना का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है, जिसमें एक दलित युवती को पुलिस बालों से पकड़ कर खसीटते हुए ले जा रही है साथ ही एक अर्धनग्न व्यक्ति को भी सड़क पर पीट रहे है, जिसका आसपास के लोग विरोध भी कर रहे है लेकिन पुलिस के कानो पर तो जूं तक नहीं रेंगी।
वीडियो के वायरल होने के बाद अब ये मामला राजनैतिक रूप ले चुका है, पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूर्व विधायक शीतल अंगुराल, कांग्रेस हल्का इंचार्ज सुरिंदर कौर, पार्षद तरसेम लखोत्रा और पूर्व पार्षद विपिन कुमार ने एएसआई के कार्यलय के बाहर उसके खिलाफ प्रदर्शन शुरु कर दिया है। पीड़िता ने बताया कि उनकी पोती को कस्टडी को लेकर उनके बेटे बहू को बीच विवाद चल रहा है और एक दिन वो बेटी को लाने बहू के मायके गया था, लेकिन बहु के परिवार वालों ने पोती को नहीं दिया, वहां जो भी हुआ उसकी जानकारी देने के लिए वो खुद पुलिस स्टेशन गई थी।
लेकिन वहां जांच अधिकारी नहीं था तो उन्हें वापिस आना पड़ा, लेकिन अगले ही दिन पुलिस वालों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए सुबह 7 बजे ही उनके घर में जबरन घुस गए.. उनके बेटे को पीटा और उन्हें बालो से पकड़ कर घसीटा। उन्होंने मांग की है बर्बरता करने वाले एएसआई के खिलाफ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए। जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता तब तक वो शांत नहीं रहेंगे। पुलिस का एकतरफा रवैया दिखाता है कि दलितों के लिए वाकई में कानून कितना बराबर है।
बाबा साहब के अपमान के मामले में मशहूर लेखक फंसे
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना से है , जहां बाबा साहब अंबेडकर का अपमान करने और उनसे जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से तोड़ मरोड़ कर पेश करने के मामले में फिल्ममेकर SS राजामौली के पिता, लेखक विजयेंद्र प्रसाद के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक DGP से FIR दर्ज कराने की मांग की जा रही है। ये मांग करने वाले है दलित संगठन माला संक्षेमा संगम के कार्यकर्ता। संगठन ने विजेयंद्र प्रसाद पर आरोप लगाया कि उन्होंने अंबेडकर के लड़ाई और संघर्ष का मजाक उड़ाते हुए तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर बाबा साहब का अपमान किया।
विजेंद्र ने कहा कि बाबा साहब ने जातिवादी संघर्ष तब शुरु किया था जब उनकी पत्नी को तालाब से पानी पीने के लिए रोका गया था.. जबकि ये बात पूरी तरह से गलत है..यहां दलितों की महिलाओ के लिए भी अपशब्द का इस्तेमाल करके उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। जो कहानी उन्होंने सुनाई पूरी तरह से मनगढ़ंत है, जो जातिगत अपमान को दर्शाता है।
अंबेडकर ने केवल पत्नी के लिए लड़ाई लड़ी थी, ये कह कर विजेंद्र प्रसाद ने उनकी बचपन से दलितों के हक की लड़ाई का अपमान किया है। एक प्रतिष्ठित व्यक्ति होकर बाबा साहब अपमान करने के लिए केवल फैक्ट के साथ छेडछाड़ करना पूरी तरह से कानून के खिलाफ है। अब देखना ये होगा कि क्या इस मामले में उनके खिलाफ कार्यवाई होगी या बाबा साहब का अपमान का मुद्दा यूहीं रफा दफा हो जायेगा।
ग्रेटर नोएडा में दलित की बारात रोकी
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा का है जहां जातिवादी पुलिस वालो ने दलित की बारात में बजने वाले डीजे को जबरन बंद करा दिया.. ये मामला ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा कोतवाली क्षेत्र के नगला पदम गांव का है। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है..जिसमें शादी की खुशियों के मातम जैसी स्थिति में बदलने पर खुद दूल्हा रो पड़ा.. दूल्हें और बारातियों ने बताया कि बारात से पहले घुड़चढ़ी होनी थी, लेकिन तेज हवा और बारिश के कारण दिन में नहीं हो सकी तो रात को 10 बजे चढ़त दोबारा शुरु की गई, लेकिन तभी पुलिस वहां पहुंच गई और उन लोगो ने जबरन डीजे बंद करवा दिया।
बारातियों ने पुलिस पर जातिगत भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दलित की बारात होने के कारण उन्हें रोका गया, जबकि जब ठाकुरों की शादियों में रातभर डीजे बजता है तो पुलिस को कोई नियम कानून नहीं दिखते। दलित परिवार इस मामले में उचित कार्यवाई की अपील कर रहा है तो वहीं रबूपुरा कोतवाली प्रभारी श्याम बाबू शुक्ला ने बताया कि पुलिस केवल नियमो का पालन कर रही थी लेकिन फिर भी इस मामले में जांच कर रही है। अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में दलित की बारात होने के कारण इस तरह का भेदभाव किया गया है। वैसे आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



