326 BNS in Hindi: आपने बम धमाकों से जुड़ी कई खबरें सुनी होंगी—या शायद उन्हें अपनी आँखों से देखा भी होगा—जिनमें ज़ोरदार विस्फोटों के कारण इमारतें ढह गईं, या ऐसे मामले देखे होंगे जहाँ किसी ने जान-बूझकर किसी इमारत को उड़ा दिया। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 326 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 326 क्या कहती है? BNS Section 326 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 326 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 326 मुख्य रूप से ऐसे व्यक्ति पर लागू होती है, जो शरारतपूर्ण या जान-बूझकर किए गए कृत्य के तहत, बम धमाके के माध्यम से किसी सार्वजनिक मंदिर, मस्जिद या इमारत को गिरा देता है, जिसके कारण अनेक लोग घायल हो जाते हैं अथवा उस क्षेत्र में आग भड़क उठती है जहाँ विस्फोट हुआ था।
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BNS section 326 Important points
- आपको बता दें, ये धारा पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 430 से लेकर धारा 436 के अलग-अलग अपराधों के तहत सजा मिलती थी। लेकिन इसे बदलकर भारतीय न्याय संहिता BNS की धारा 326 के तहत बदल दिया हैं।
BNS section 326 example
मान लीजिए, मनोज नामक कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान (Public Property) पर जनबुझकर विस्फोट करता है या सार्वजनिक सुविधाओं में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को नुकसान पहुँचाता है; यदि वह दोषी पाया जाता है, तो उसे BNS की धारा 326 के तहत दंडित किया जा सकता है।
इसके अलावा, कोई व्यक्ति किसी गाँव को पानी की आपूर्ति करने वाली मुख्य पाइपलाइन को काट देता है; इसके कारण पूरा गाँव पानी में डूब जाता है, जिससे लोगों के खेतों और घरों को भारी नुकसान पहुँचता है। ऐसे मामले में, कानून की यह धारा उस व्यक्ति पर लागू होती है जिसे अपराधी पाया जाता है।
बीएनएस धारा 326 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 326 यह धारा तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर सार्वजनिक स्थान पर विस्फोट (Public Property Damage) करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 साल तक की सजा और जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। उसे अदालत में पेश किया जाना जरूरी होता है, और अदालत इस मामले की गंभीरता के आधार पर जमानत का निर्णय लेती है।



