Unnao news: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। स्कूल में दलित छात्र को पढ़ाने या उसे उसके परीक्षा परिणाम सौंपने के बजाय, वहाँ के एक शिक्षक ने बच्चे के हाथों में लकड़ियों का एक गट्ठर थमा दिया और उससे कहा, “तुम तो बस इसी तरह के काम के लायक हो—इसलिए ठीक यही काम करो।” वही मामला सामने आने पर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
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शिक्षक ने पढ़ाने के बजाये बंधुआ मजदूरी करने के लिए कहा
दलितों के साथ सदियों से चला आ रहा अन्याय—उन्हें बंधुआ मज़दूरी में धकेलना और अपमानित करना—एक निरंतर बनी रहने वाली सच्चाई रही है। हालाँकि, गाँवों और छोटे कस्बों में ये प्रथाएँ आज भी जारी हैं; यहाँ तक कि आज भी, उन्हें उन स्कूलों में प्रवेश से वंचित रखा जाता है, जहाँ मनुवादी मानसिकता का वर्चस्व है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से है, जहां एक दलित बच्चे के हाथों में किताब की जगह जबरन लकड़ियां पकड़ाई गई, ताकि वो जातिगत दबंगो की बंधुआ मजदूरी करें।
दरअसल, उन्नाव (Unnao) के गंजमुरादाबाद जिले (Ganjmuradabad District) के रबड़ी गांव (Rabri Village) के हीरामन पुरवा स्थित परिषदीय विद्यालय (The Council School located in Hiraman Purwa) की है, जहां से आई एक सनसनीखेज खबर ने सबकों झकझोर कर रख दिया। दरअसल स्कूल के एक दलित छात्र सचिन को शिक्षक ने पढ़ाने के बजाये बंधुआ मजदूरी कराते हुए हाथों में कुल्हाड़ी और लकड़ियां थमा दीं गई.. जो कि एक शिक्षक ने ही किया था..
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स्कूल प्रशासन भी सवालों के घेरे में
इतना ही नहीं जब बच्चे ने इसका विरोध किया तो उसे जातिसूचक गालियां दी गई और लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा गया। दलित छात्र कक्षा 5 का छात्र है, और परिक्षा परिणाम के लिए स्कूल गया था.. लेकिन रिजल्ट देने के बदले उसके लकड़ियां चुनने को कहा गया। ये सिलसला करीब 1 महीने से चल रहा था। इस मारपीट का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमे स्कूल के अन्य बच्चे भी कहते नजर आ रहे है कि उनसे हर दिन मजदूरी करवाई जाती है…वही एक बच्चे ने बोला कि स्कूल में पढाई कम लड़की इकट्ठी करने का काम ज्यादा होता है।
वही इस घटना के बाद से स्कूल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। कि विद्या के मंदिर में शिक्षा देने के बजाय, बाल श्रम करवाया जा रहा है। वहीं पुलिस ने भी अभी तक इस मामले की जांच को लेकर कोई तेजी नहीं दिखाई है.. ऐसे में अब देखना ये होगा कि पुलिस वाकई में कुछ करेगी या केवल आश्वासन ही देगी..और क्या होगा स्कूल प्रशासन का रिएक्शन।



