बुद्ध ने किस तरह के 3 लोगो से दूर रहने की सलाह दी थी, बाबा साहब ने हमेशा मानी बुद्ध की ये सलाह..

Buddha
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बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध ने मनुष्य को जीवन जीने के लिए नई दिशा दी थी। उन्होंने उस समाज के विरूद्ध काम किया था, जो खुद को सुप्रीम कहती थी, जिन्होंने एक वर्ग को हीन और शूद्र करार देकर समाज से तो अलग किया ही था, बल्कि उन्हें तो वो लोग इंसानों की ही कैटेगरी में नहीं रखते थे। नतीजा.. वो वर्ग हमेशा शोषित हो रहा, मगर बुद्ध ने उन्हें न केवल अपने अधिकारों के लिए जागरूक किया बल्कि ये भी बताया कि वो जिनकी आराधना कर रहे है।

जिन्हें अपना रक्षक मानते रहे है, असल में वो ईश्वर कभी उनका रक्षक था ही नहीं.. ईश्वर का कभी कोई वजूद था ही नहीं तो भला उसके सौदागर कहां से आ गये.. ये केवल शोषण करने का सबसे बेहतर तरीका मात्र था.. खुद को शोषित होने से बचाने के लिए बुद्ध ने लोगो को 3 तरह के लोगो से दूर रहने का संदेश दिया था। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि बुद्ध ने किन तरीके के लोगो से दूर रहने का संदेश दिया था।

कौन है सबसे खतरनाक

कबीर दास जी का एक दोहा है..निंदक नियरे राखिये..आंगन कुटि छवाये, बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय.. इन पक्तियों का मतलब है कि व्यक्ति को हमेशा ऐसे लोगो को अपने करीब रखना चाहिए जो आपके मुंह पर आपकी कमियों को गिनायें..आपकी निंदा करें.. वहीं इस कथन को बुद्ध की दृष्टि से देखा जाये तो बुद्ध  कहते है कि आपको हमेशा ऐसे लोगो से दूरी बना कर रखना चाहिए, जो आपके सामने तो आपके सबसे बड़े हितैषी बनते है, चाटुकार होते है लेकिन आपके पीठ पीछे आपकी बुराई करते है, आपके बारे में बुरा सोचते है.

ऐसे लोगो का,, जो आपके बुरे वक्त में पीछा छुड़ा कर भाग जाते

ये लोग उस दुश्मन से भी खतरनाक है जो आपके सामने से वार करता है। ऐसे लोगो के हमेशा दूर रहे… इसके बाद नंबर आता है ऐसे लोगो का,, जो आपके बुरे वक्त में पीछा छुड़ा कर भाग जाते हो.. आज के समय में दुनिया बहुत स्वार्थी है, जब तक आपसे स्वार्थ पूरा हो रहा है, आपसे चिपके रहेंगे, लेकिन जैसे ही आपकी बुरा समय शुरु होगा.. सबसे पहले भाग निकलेंगे.. आपसे बात तक करने से कतरायेंगे। आपको हमेशा ऐसे लोगो से दूर रहना चाहिए, तो आपकी समय देखकर आपसे दोस्ती बनाये.. ऐसे लोग कभी आपके बुरे समय पर खड़े नहीं होंगे।

ऐसे लोग जिनका नजरों में कभी आपका कोई सम्मान नहीं

तीसरे नंबर पर आते है ऐसे लोग जिनका नजरों में कभी आपका कोई सम्मान नहीं है… अक्सर कहा जाता है कि जिस स्थान पर आपका सम्मान नहीं है वहां कभी न जायें, ये असल इंसानो के साथ भी लागू होती है, जो व्यक्ति आपका सम्मान नहीं करता है उससे दूर रहे..क्योंकि वो इंसान कभी इस बात की परवाह ही नहीं करेगा कि आपका अपमान करने से आप कितने आहत हुए.. आपको शारीरिक से ज्यादा मानसिक तकलीफ हुई होगी.. और अगर आप अपने लिए लड़ने की भी कोशिश करेंगे तो आप ही गुनहगार हो जायेंगे।

ऐसे लोगो से बहस करने का मतलब कीचड़ में पत्थर मारने के समान होता है, जो आपके ऊपर ही पड़ेगा..और आपके दामन में ही दाग लगेगा.. तो बेहतर है कि ऐसे लोगो से हमेशा दूरी बनाये… या जितना जरूरी है उतना ही बात करें.. ताकि उनकी नकारात्मकता का असर आप पर न पड़े। ऐसे लोग आपके शारीरिक विकास के साथ साथ मानसिक विकास के लिए भी काफी खतरनाक होते है.. जो आपको पतन की तरफ ले जाते है।

मानसिक शांति देने वाला रहा

बुद्ध का रास्ता हमेशा ही केवल शारीरिक शांति ही नहीं बल्कि मानसिक शांति देने वाला रहा है। बौद्ध धर्म इकलौता ऐसा धर्म है जो अहिंसा और सत्य के मार्ग को प्रशस्त करके चलने का संदेश देता है, जो इस सत्य से अवगत कराता है कि मनुष्य को मुक्ति पाने के लिए किसी बाहरी आडंबर की नही आंतरिक आत्म शुद्धता की जरूरत है।

बुद्ध और बौद्ध धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जो आपको कुरीतियों और व्याभिचार से बचा सकता है। बुद्ध की ये चेतावनियां जो भी ध्यान रखता है, वो कभी किसी के हाथों से छला नहीं जायेगा.. वो सदैव सफल होगा.. आपको बुद्ध का बताया ये मार्ग कितना सटीक लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें। साथ ही बुद्ध की कौन सी सीख आपको सबसे ज्यादा पसंद है।

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