Buddhist family ethicsc: बाबा साहब ने बौद्ध धर्म इसलिए अपनाया था क्योंकि ये धर्म व्यक्ति को न केवल जातिवाद के आंडबर से निकालता था बल्कि इस धर्म व्यक्ति को कर्म का मूल्य समझाया। बौद्ध धर्म ने एक मनुष्य के दायित्वों पर खुल कर बात की.. ये बताया कि व्यक्ति को जीवन जीने के लिए कैसा होना चाहिए, कैसे सात्विकता आपको मोक्ष और मुक्ति के राह पर ले जाती है, लेकिन इसी के साथ ये भी बताया कि एक माता पिता का क्या दायित्व है। माता पिता का अपनी संतान को लेकर क्या विशेष दायित्व है तो वहीं बच्चों के भी दायित्वों के बारे में बात की गई है।
अपने इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर बुद्ध ने माता पिता के किन 5 बड़े दायित्व को पूरा करने की दी है सीख, साथ ही एक अच्छे बच्चे को क्या करना चाहिए..इसके लिए भी बुद्ध ने कौन का आलौकिक ज्ञान दिया .,.जानेंगे कौन से थे वो दायित्व। बौद्ध धर्म के दिघ निकाय के सिगालोवाद सुत्त में बुद्ध ने एक संतान की दायित्व को लेकर चर्चा की हुई है। उसमें उन्होंने वैराग्य जीवन को नहीं बल्कि सात्विक और करूणा पूर्ण जीवन के बारे में चर्चा करते हुए बताया है कि आखिर क्यों एक संतान को हमेशा अपने मातापिता के प्रति ऋणी होना चाहिए। बुद्ध ने बताया कि माता पिता अपनी संतान के प्रति 5 दायित्वों को पूरा करते है। जिनके बदले संतान को कुछ दायित्वों को पूरा करना अनिवार्य है तभी मुक्ति का मार्ग खुल सकता है।
माता पिता के 5 दायित्व
बुद्ध ने माता पिता के पहले 5 दायित्वों को बताया उन्होंने कहा कि एक माता पिता चाहते है कि उनकी संतान आज्ञाकारी, संस्कारों वाली होना चाहिए, उसके लिए जरूरी है कि आप पहले अपने दायित्वो को समझे. बुद्ध ने कहा कि एक संतान को संसार में लाने का चुनाव माता पिता का होता है, इसलिए उनके बेहतर भविष्य के लिए आप जो भी करते है वो कोई आपकी संतान पर ऋण नहीं होता.. वो आपका दायित्व होता है। माता पिता को सबसे पहले अपने बच्चे को बेसिक ज्ञान देते है। उनकी देखभाल करते है, वो भी तब जब वो न चल सकते थे, न कुछ समझ सकते थे।
ऐसे में ये माता पिता का दायित्व है कि वो संतान की सुरक्षा से पूर्ण परवरिश करें। उन्हें हर बुराई से बचा कर रखें, उन्हें बचपन से सत्कर्म का महत्व बतायें, अच्छे कार्य करने, दान पुण्य आध्यत्म का महत्व समझायें, ताकि बच्चा विकृत मानसिकता का न हो, उन्हें शिक्षा देते है, जाति बच्चा बड़ा होकर जीविका के लिए कार्य कर सकें ताकि वो आगे जाकर अपना और अपने आगामी परिवार को आर्थिक मजबूती दे सकें। माता पिता का अगला दायित्व है कि वो अपने बच्चो का उचित समय पर औऱ उचित व्यक्ति से विवाह कराये, ताकि वो भी सत्कर्म पर चलें.. और सबसे बड़ी बात.. बच्चों को सही समय पर उनके दायित्वों को सौंप देना चाहिए.. उन्हें उत्तराधिकारी बनाना चाहिए, ताकि वो सहीं से उन जिम्मेदारियों को संभालने में खुद को ढाल सकें।
माता पिता का सम्मान जरूर करे
लगभग माता पिता अपने इन दायित्वों को पूर्ण करते है.. इसलिए अब जरूरी है कि एक लायक संतान को भी वृद्धा अवस्था में माता पिता का सहारा बनना चाहिए.. क्योंकि उन्होंने आपको तब संभाला जब आप किसी काबिल नहीं थे, तो आज आपकी काबिलियत उनकी बेहतर परवरिश के कारण ही है.. इसलिए अगर आप चाहते है कि आपकी संतान आपके साथ अच्छे से पेश आये तो आपको अच्छे संस्कार देने वाले माता पिता का सम्मान जरूर करना चाहिए। क्योंकि बौद्ध धर्म कर्म पर विश्वास करता है, बौद्ध धर्म कहता है कि आपकी कर्म आपके पास लौट कर जरूर आता बै, इसलिए जैसा व्यावहार आप करेंगे, वैसे ही या उससे भी बुरे व्यावहार के लिए आपको भी तैयार रहना चाहिए।
अपने माता पिता की सेवा करों.
बुद्ध ने कभी नहीं कहा कि आप अपने दायित्वो को त्याग कर वैराग्य अपनाओं.. क्योंकि सबसे बड़ा तप यहीं है कि आप अपने परिवार की, अपने माता पिता की सेवा करों.. उन्हें प्रसन्न रखों। बुद्ध का संदेश बिल्कुल साफ है कि आप जैसा कर्म करेंगे भविष्य में वैसे ही फल को पायेंगे.. कबीर दास जी का एक दोहा है..करता था सो क्यों किया..अब कर क्यों पछतायें, बोया पेड़ बबूल का..अम्ब कहां से खाय।।
यानि की बात साफ है कि कर्मों के चक्र से की नहीं बच सकता है। माता पिता को अपने बच्चो की सेवा चाहिए तो पहले उन्हें खुद वैसा कर्म करना होगा.. और जो माता पिता ये दायित्व पूरा करते है उनकी संतानों को सदैव माता पिता की सेवा करनी चाहिए। बुद्ध द्वारा माता पिता और बच्चों के दायित्व को लेकर जो ज्ञान दिया गया है उससे आप कितना प्रभावित है, हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



