Uttar Pradesh crime news: उत्तर प्रदेश के कौशांबी में हाल ही में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यादव और पाल समुदाय के सदस्यों के बीच—भैंस चराने को लेकर हुए विवाद के चलते—हुई झड़प के दौरान, एक दलित महिला की हत्या कर दी गई। यही नहीं, उसके शव को एक पेड़ से लटका दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जब पुलिस को इस घटना के बारे में पता चला, तो उन्होंने एक औपचारिक शिकायत तक दर्ज नहीं की।
दलित किशोरी की हत्या
क्या दलितों की जान की कोई कीमत नहीं है? क्या दलितों के लिए मरना एक कानूनी अधिकार है—या फिर यह केवल उन ताकतवर लोगों का विशेषाधिकार है, जो आए दिन, मामूली से मामूली विवादों पर भी बेकसूर लोगों की जान ले लेते हैं? जी हाँ, ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के कोशांबी से है..वैसे तो यूपी सीएम राज्य की कानून व्यवस्था को सटीक बनाने के लिए बुल्डोजर का बहुत इस्तेमाल करते है लेकिन जब किसी दलित के साथ कोई अपराध होता है।
तो ये बुल्डोजर अपराधियों के घरों पर क्यों नहीं चलता.. दिल को झकझोर देने वाला मामला कोशांबी के चरवा थाना क्षेत्र की है, जहां पाल समाज की भैंस यादव समाज के खेतों में क्या चली गई.. यादवों के लड़को ने भैंस चराने गई 19 साल की किशोरी की न केवल हत्या कर दी बल्कि उसके शव को पेड़ से लटका भी दिया.. ये घटना 5 अप्रैल को घटित हुई थी.. बच्ची की शव मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में सनसनी है।
और पढ़े: कांग्रेस का बीजेपी पर हमला दलितों के खिलाफ अपराध का केंद्र बने भाजपा शासित राज्य
यादव समाज और पाल समाज के बीच झगड़ा
वहीं बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंच कर पीड़ित परिवार को न्याय का आश्वासन दिया है। पुलिस के मुताबित भैंसो के खेत में जाने के कारण यादव समाज और पाल समाज के लोगो के बीच झगड़ा हुआ था, और यादव लोगों नुकसान के बदले ₹3000हरजाना मांगा थे, जिसे पाल समाज के लोग देने के लिए भी तैयार हो गए थे, लेकिन दलितो के लिए विकृत मानसिकता रखने वाले आरोपी बब्बू यादव, विनय, यादव, धर्मेंद्र यादव ने 5 अप्रैल को जब मृतका को खेत में देखा तो उसकी हत्या कर खेत में ही टांग दिया।
इतना ही नहीं पहले तो पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की थी, लेकिन जब राजनैतिक पार्टियों का दवाब बड़ा तो एफआईआर हुई। हालांकि पुलिस ने इस मामले की जांच शुरु कर दी है लेकिनव अभी तक किसी भी आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला.. अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में आरोपी गिरफ्त में आयेंगे।



