Assam news: हाल ही में, असम में कांग्रेस पार्टी से जुड़ी एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। पार्टी के ही एक दलित नेता ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया है कि उनके साथ उनकी जाति के आधार पर भेदभाव किया गया। इतना ही उन्होंने पार्टी के खिलाफ कई आरोप भी लगाये है।
दलितों और पिछड़ो की अनदेखी
कांग्रेस—जो ज़ाहिर तौर पर दलितों के हितों की पैरोकार है—आज दलितों की ओर से न्याय के लिए लड़ती हुई प्रतीत होती है; फिर भी, वह अपनी ही पार्टी के भीतर मौजूद दलित नेताओं के साथ भेदभाव करती है। जी हाँ ऐसा ही एक मामला असम से है, जहां दलितो के मुद्दे पर एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी की मिट्टी पलीत हो गई है।
दरअसल कांग्रेस पर हमेशा आरोप लगे है कि वो दलितों और पिछड़ो की अनदेखी करती रही है और अब वरिष्ठ दलित नेता सूर्यकांत सरकार ने एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (AICC President Mallikarjun Kharge) की कछार जिले (Cachar District) में चलती रैली में इस्तीफा देने की घोषणा कर दी.. इतना ही नहीं सूर्यकांत सरकार (Suryakant Sarkar) ने ये भी आरोप लगाया कि दलितों से जुड़े संगठनात्मक मुद्दों को उठाने की उन्होंने कई बार कोशिशें की है।
दलित नेता के इस्तीफे ने कांग्रेस का पर्दाफाश किया
लेकिन कांग्रेस उन मुद्दों की अनदेखी कर देती है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारी मन से इस्तीफा देने पड़ रहा है लेकिन अब वो ये अनदेखी और अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते है। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी बतया कि कई बार उसे ऐसा महसूस हुआ कि एक अनुसूचित समुदाय के सदस्य के रूप में उनकी पृष्ठभूमि के कारण, उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के कामकाज का तरीका बताता है कि दलितों के मुद्दों से उन्हें कुछ खास लेना देना नहीं है। एक तरफ कांग्रेस का बड़ा चेहरा राहुल गांधी दलितों का हितैषी होने के गुणगाण गाते है तो वहीं असम में दलित नेता के इस्तीफे ने कांग्रेस की पर्दाफाश कर दिया है। वैसे आपको क्या लगता है क्या कांग्रेस की मानसिकता कभी बदलेगी।



