Bihar news: हाल ही में बिहार से एक खबर आई, जहां कुमार सर्वजीत ने तीखा हमला करते हुए कहा कि जिस जिले के MP दलित समुदाय से हैं, वहां भी दलित अधिकारियों को बराबरी का हक नहीं दिया जाता। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आज भी दलित समुदाय अपने हक से वंचित है।
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सरकार को भी दलित अधिकारियों पर भरोसा नहीं
बीते दिन बिहार से एक खबर आई है जहां बिहार सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (FIFO) सिस्टम को 30 जून 2026 तक के लिए टाल दिया है और दलितों को ज़मीन और आर्थिक फ़ायदे देने के मामलों में SC-ST समुदाय के लोगों को प्राथमिकता देने का फ़ैसला किया है। लेकिन इसी बीच बिहार से एक और खबर सामने आयी जहां एससी-एसटी उत्पीड़न निवारण (Prevention of Atrocities against SC/ST) समिति के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत (Kumar Sarvjeet) ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नामी दलित नेता होते हुए भी राज्य में पिछले कुछ महीनों में दलित उत्पीड़न के मामले कमने के बजाय बढ़े है।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Union Minister Jitan Ram Manjhi) और चिराग पासवान (Chirag Paswan) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल गया जिले में ही 63 ऐसे थाने है, जहां दलित अधिकारी तक नहीं है.. जो केवल इस बात का सबूत है कि सरकार को भी दलित अधिकारियों पर भरोसा नहीं है।
विपक्ष पर साधा निशाना
बाकि के जिलों की सूची तो अभी जारी ही नहीं हुई है। उन्होंने आगे एक और खुलासा करते हुए कहा कि 300 एससी एसटी (SC/ST) मामलो को निपटान करने की सूचि मिली थी लेकिन उसमें से 100 से ज्यादा तो पासवान समाज वाले ही थे..उन्होंने निशाना साधते हुए कहा, “गठबंधन सरकार का हिस्सा होने के बावजूद समाज में लोगों पर ज़ुल्म हो रहा है। शायद उन्हें यह दिखता नहीं। इससे क्या मैसेज जाता है?”
इतना ही नहीं, उन्होंने मीटिंग में कहा कि 300 केस दर्ज किए गए और मुआवज़ा भी दिया गया। लेकिन यह डेटा खुद ही सच्चाई बताता है। मतलब साफ़ है: इस सरकार में दलितों पर अत्याचार के मामले कम नहीं हो रहे हैं, बल्कि बढ़ रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि वे तेज़ी से केस दर्ज करके इसे रोक रहे हैं। लेकिन आज भी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
दलितो को उनके पूर्ण अधिकार तक नहीं दिये गए
यानि की पासवान समाज के नेता होते हुए भी उनका उत्पीड़न कम नहीं हुआ है। सच तो ये है कि दलितो को उनके पूर्ण अधिकार तक नहीं दिये गए है। उन्हें जिम्मेदारियों से वंचित रखा गया है.. और फिर बाद में कह दिया जायेगा कि आरक्षण से पद मिला था..लेकिन काम नहीं किया। और उनके अधिकारों का लगातार हनन होता रहेगा। बिहार के जिले में दलितो की स्थिति और वहां बढ़ते हुए मामलो को लेकर आपका क्या कहना है। क्या वहां वाकई में जानबूझ कर सरकार दलितों की अनदेखी कर रही है।



