BNS Section 339: सावधान! अगर पास रखे फर्जी दस्तावेज तो खानी पड़ेगी 7 साल जेल की हवा

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339 BNS in Hindi: अक्सर, अपना काम निकलवाने की कोशिश में कुछ लोग जाली दस्तावेज़ तैयार कर लेते हैं, उन्हें अपने पास रख लेते हैं, और बाद में उनका इस्तेमाल इस तरह करते हैं मानो वे असली हों। तो कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS  की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 339 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 339 क्या कहती है? BNS Section 339 in Hindi

आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनाने तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 339 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 339 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जो व्यक्ति जान-बूझकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों की fakes copies तैयार करता है और यह जानते हुए भी उनका रिकॉर्ड अपने पास रखता है कि वो नकली है या फिर असली बता कर उनका उपयोग करता है।

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BNS section 339 important points 

  • आपको बता दें, इस section का उद्देश्य जाली दस्तावेजों के उपयोग को रोककर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अखंडता को बनाए रखना है।

BNS section 339 example

मान लीजिए, सुधेश नाम का कोई व्यक्ति जाली दस्तावेज़ बनाता है और उनका एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड यह जानते हुए भी अपने पास रखता है कि वो नकली दस्तावेज़ है।  हालाँकि, यदि यह मामला सामने आता है और वह दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध BNS की धारा 339 लागू होगी।

बीएनएस धारा 339 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 339 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड करता है या नकली जाली पेपर्स आपने पास रखता है । तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 10 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

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