Women Reservation Bill: आरक्षण का नया समीकरण, SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग ने पकड़ा तूल

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Women Reservation Bill:  क्या लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना महज़ महिलाओं को सशक्त बनाने का एक ज़रिया है, या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक चाल छिपी है? संसद में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित हो चुका है, लेकिन इसके पारित होते ही सवालों की एक बाढ़ सी आ गई है। क्या 2011 की जनगणना के आँकड़े आज की विशाल आबादी के लिए काफ़ी होंगे? ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला सशक्तिकरण और सम्मान अधिनियम) के ज़रिए, सरकार का लक्ष्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं—दोनों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है; एक ऐसा कदम जिससे महिलाओं के लिए लगभग 181 सीटें आरक्षित हो जाएँगी।

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OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग

इसे लागू करने के लिए सरकार ने लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव दिया है, और आधार बनाया जा रहा है। 2011 की जनगणना को…विपक्ष को डर है कि यह सिर्फ एक ‘चुनावी छलावा’ है, सबसे बड़ी चिंता दक्षिण भारतीय राज्यों की है— उन्हें डर है कि जनसंख्या नियंत्रण करने की सजा उन्हें कम सीटों के रूप में मिलेगी, जबकि उत्तर भारत का वर्चस्व बढ़ जाएगा, वहीं सपा और RJD जैसी पार्टियां ‘कोटे के भीतर कोटा’ यानी OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग पर अड़ी हैं। जिसे लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपना  प्रेस कांफ्रेसं करके कहा है कि “लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का बीएसपी स्वागत करती है, महिलाओं का आरक्षण 33% से बढ़ाकर 50% करना चाहिए। महिला आरक्षण में SC,ST एवं OBC वर्गों की महिलाओं का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में नियत हो”

– मायावती #Mayawati #WomenReservation #SCST #JaiBhim #BheemSena pic.twitter.com/YyypMsK5hh

— Bheem Sena (@BheemsenaBheem) April 16, 2026

देश का चुनावी नक्शा और संसद की तस्वीर बदली

इसके अलावा 15 साल पुरानी 2011 की जनगणना को आधार बनाने और आरक्षण को जनगणना व परिसीमन जैसी शर्तों से बांधने पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे आलोचक केवल एक ‘चुनावी छलावा’ मान रहे हैं। दरअसल 1971 के बाद से सीटें नहीं बढ़ी हैं. आज एक सांसद पर 25-30 लाख की आबादी का बोझ है। नई संसद में 888 सदस्यों के बैठने की जगह भी तैयार है..सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के चुनावों में जब आप वोट डालने जाएं, तो देश का चुनावी नक्शा और संसद की तस्वीर दोनों बदली हुई हो.. सवाल सिर्फ सीटें बढ़ाने का नहीं, बल्कि हर क्षेत्र की सही भागीदारी का है, क्या यह कदम वाकई ‘नारी शक्ति’ को सशक्त करेगा या क्षेत्रीय असंतुलन की नई जंग शुरू होगी।

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महिला आरक्षण क्या है?

सबसे पहले, आइए समझते हैं कि महिला आरक्षण असल में है क्या। महिला आरक्षण बिल—जिसे आधिकारिक तौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम दिया गया है—एक ऐतिहासिक कानून है, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

इसके कारण अब लोकसभा की लगभग 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आरक्षण उन सीटों पर भी लागू होगा जो पहले से ही अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित हैं (यानी, उन विशिष्ट सीटों में से एक-तिहाई सीटें इन श्रेणियों से संबंधित महिलाओं को आवंटित की जाएंगी), और ये आरक्षित सीटें हर परिसीमन प्रक्रिया के बाद रोटेशन के आधार पर बदलती रहेंगी।

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