Karnataka news : हाल ही में बेंगलुरु (Bengaluru) से एक चौंकाने वाला और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ कर्नाटक (Karnataka) के कई ज़िलों—विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से ऐसी खबरे आ रही हैं, जिनसे पता चलता है कि दलित पुलिसकर्मियों को अपनी जाति के कारण रहने के लिए घर नहीं मिल पा रहा है।
दलित पुलिसकर्मियों को घर देने से इनकार
कोई व्यक्ति चाहे कितना भी ऊँचे पद पर क्यों न पहुँच जाए, यदि वह दलित जाति से संबंध रखता है, तो उसे जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना ही पड़ता है। जी हाँ, कर्नाटक के बैंगलुरु से बेहद ही चौकाने वाली खबर सामने आई है, जहां पुलिस के कई निचले रैंक के दलित अधिकारियों ने उनकी जाति के कारण मकान न दिये जाने की समस्या सांझा की है। जिसके बाद ये मुद्दा उंचे स्तर पर पहुंच गया है। दलित अधिकारियों ने आपबीती बताते हुए कहा कि दलित जाति से होने के कारण मकान मालिक उन पर विश्वास ही नहीं करते है औऱ उन्हें जाति पूछ कर मकान देने से इंकार कर देते है।
मकान मालिकों का लगातार डर सताता
साथ ही मालिकों को ये भी डर सताता है कि किराए या बेदखली से विवाद में कहीं उन पर एससी एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत मामला न दर्ज करवा दें, जिसके कारण कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बात दें, सोमवार को जारी एक सर्कुलर में, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायतें और मानवाधिकार) देवज्योति राय ने, पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (DGP और IGP) की ओर से बोलते हुए कहा कि 28 अप्रैल को विधान सौध में आयोजित ‘सरकारी आश्वासनों पर समिति’ की बैठक के दौरान, किराए के आवासों में जाति-आधारित भेदभाव से संबंधित चिंताएं उठाई गई थीं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को कथित तौर पर शहर के बाहरी इलाकों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके लिए समय पर ड्यूटी पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
हालांकि कर्मियों के इस मुद्दे के प्रकाश में लाने के बाद अब वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच का आश्वासन दिया है और साथ ही गृह मंत्री जी परमेश्वर ने वादा किया है कि जल्द ही पुलिस गृह योजना के तहत पुलिस कर्मियों को उनका घर दिया जायेगा। हालांकि जाति के नाम पर पुलिस कर्मियों को भी घर न देना कहीं न कहीं जातिवादि मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है और प्रशासन को इसके खिलाफ जरूर कोई ठोश कदम उठाना चाहिए।



