Top 5 Dalit news: आखिर ये कौन से समाज में रहते है हम, जहां आज भी दलित बहू बेटियां केवल उपभोग की वस्तु मात्र समझी जाती है। सरेआम उनके साथ उत्पीड़न होता है, उन्हें अपमानित किया जाता है लेकिन कानून हाथों में बेड़िया बंधे बैठ कर तमाशा देखता रहता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या हम वाकई में एक लोकतांत्रिक देश में रहते है, जहां बाबा साहब का बनाए संविधान का कानून चलता है।
भीम आर्मी चीफ ने पेश किया नगीना मॉडल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर की सत्ता परिवर्तन यात्रा को लेकर है, जो बहुत तेजी के आगे बढ़ रही है। लेकिन इस यात्रा में पहली बार मेरठ में आजाद ने राज्य की जनता के सामने “नगीना मॉडल” पेश किया है। आजाद ने जनता से अपील की कि वो उन्हें एक बार मौका जरूर दें.. वहीं इस नगीना मॉडल के तहत कई वादें भी किये गये जिसमें किसान और मजदूरों को उनकी मेहनत का सही दाम दिया जायेगा, युवा और व्यापारी को रोजगार के नए अवसर और सुरक्षित व्यापारिक माहौल दिया जायेगा, साथ ही नफरत का खात्मा और मजबूत सामाजिक एकता को स्थापित किया जायेगा।
आजाद ने सीधे कहा कि वो हर उन इंसान के लिए ढाल बन कर खड़े रहेंगे जो कभी जाति, लिंग या धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया गया है। अगर आसपा की सरकार आती है तो सबसे पहले सामाजिक न्याय की दिशा में काम होगा। आजाद ने पहले ही शिक्षा के क्षेत्र में जो बदलाव करने के वादें किये है उससे लेकर काफी चर्चा हो रही थी ऐसे में नगीना मॉडल चुनाव की दिशा को कितना बदलने की ताकत रखता है ये जो चुनाव के नतीजो से पता चलेगा.. लेकिन ये तो सच है कि आजाद जरूर छा गए है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी उथलपुथल
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई से है, जहां की राजनीति में आये भूचाल के बीच अब इस मामले को जातिगत रूप दे दिया गया है। उद्दधव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी को छोड़ कर बागी हुए 6 सासंदो के शिवसेना जॉइन करने के बाद दलित और मुस्लिम समाज के एक वर्ग ने इन सांसदो पर तीखा हमला किया है। इस मामले में मानखुर्द शिवाजीनगर के सपा विधायक अबू आसीम आजमी ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 6 बागी नेताओं में से एक संजय दीना पाटिल मुम्बई उत्तर पूर्व का प्रतिनीधित्व करते है, लेकिन शिवसेना यूटीबी के साथ विश्वासघात करने के बाद दलित औऱ मुस्लिम समुदाय में रोष है।
उनका कहना है कि पाटिल को सबसे ज्यादा दलितों और मुसलमानों ने वोट किया था, क्योंकि वो धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा की बात करते थे, लेकिन अब ये एक ऐसी पार्टी में शामिल हो गये है जो एनडीए का हिस्सा है, जो साफ संदेश देता है कि अब धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा के खिलाफ काम करेंगे। वहीं बागी विधायकों की इस हरकत से सबसे ज्यादा दलित समाज ही चिंतित और आहत है। विधायकों की ये हरकत लोकतंत्र में विश्वास को कमजोर करने वाली है। ऐसे में देखना ये होगा कि इस मामले को दलित अल्पसंख्यक रूप देने के बाद क्या कोई बड़ा बदलाव आयेगा.. या केवल जानबूझ कर उनका नाम लिया जा रहा है।
तमिलनाडु में कई दशको के बाद दलितो को मिली मंदिर में एंट्री
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के करूर से है, जहां जातिगत भेदभाव को खत्म करने कई दशको के बाद आखिरकार सामाजिक बराबरी की मिशाल पेश करते हुए दलित समाज को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति मिली है। दिल को ठंडक पहुंचाने वाली ये खबर करूर जिले के पुंजई कदमनकुरिची की है, जहां 150 साल पहले बने अरुलमिगु श्री मरियम्मन और अरुलमिगु सेलंदियाम्मन मंदिरों में दलितो के प्रवेश करने और पूरा अर्चना करने से रोका गया था, जिसे लेकर 19 मई को दलित सामज के लोगो ने जिला मजिस्ट्रेट से मदद मांगी थी..तब से ही मंदिर पर भारी पुलिसबल तैनात थी, लेकिन आखिरकार करीब एक महीने के बाद जिला प्रशासन ने मंदिर प्रबंधन समिति से बात करके अब से दलितों के मंदिर में प्रवेश पर अनुमति दिला दी है।
वहीं अब से मंदिर की देखरेख के लिए हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के कई अधिकारियों को नियुक्त किया है ताकि भविष्य में ऐसा भेदभाव न हो। इस फैसले के बाद दलित समाज के लोगो ने मंदिर में प्रवेश कर पूजा की। हालांकि पूजा के दिन भी किसी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए 100 पुलिस कर्मियों को नियुक्त किया गया था। दलित समुदाय के लोगो ने कई दशको के बाद पूजा करने की मिली अनुमति को लेकर सीएम सी. जोसेफ विजय के साथ साथ जिला प्रशासन को भी धन्यावाद कहा है। ये पहल देखकर ऐसी उम्मीद की रही है कि भविष्य में तमिलनाडु में जातिगत भेदभाव खत्म हो जायें।
केरला हाइकोर्ट का समाजाकि अपमान पर लेकर बड़ा फैसला
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल से है, जहां हाइकोर्ट ने अकेले में दी जाने वाले जातिसूचक गालियों को अपराध की श्रैणी में रखने का ऐलान किया.. हाइकोर्ट ने कहा कि जब किसी पीड़ित के साथ एक से ज्यादा आरोपी अपराध करते है, तो ऐसे में कई आरोपियों की मौजूदगी किसी प्राइवेट जगह को ‘पब्लिक की नज़र में’ आने वाली जगह बना सकती है, जिससे आरोपियों पर एससीएसटी एक्ट लगा जायेगा। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि ऐसे में ये मामला धारा 3(1)(r) के तहत माना जायेगा, इसलिए ऐसे मामलो में आरोपियो को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।
बता दें कि कोर्ट ने एक ऐसे मामले में सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया, जिसमें जमीन हड़पने के लिए दलित परिवार को जातिसूचक गालियां दी, जबरन घुसपैठ की, विस्फोटक पदार्थ चलाए.. इस दौरान वहां पीड़िता का पति भी मौजूद था और कई हमलावर थे, पीड़िता ने इस मामले में एसटीएसटी एक्ट लगाया था, जिसके लेकर आरोप पक्ष ने अग्रिम जमानत की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे रिजेक्ट कर दिया, और आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश दिया है नहीं तो पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए निकल जायेगी। कोर्ट का ये फैसला बताया है कि भले ही न्याय में देरी हो सकती है लेकिन न्याय जरूर होगा। महिला के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों को अब सलाखों के पीछे जाना ही होगा।
लुधियाना में दलित दंपत्ति पर लगा झूठा आरोप
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला पंजाब के लुधियाना से है, जहां दलितों को प्रताड़ित करने का एक नया तरीका खोज लिया है दबंगो ने,.. जी हां, पहले खुद को नुकसान पहुंचाते है औऱ फिर उल्टा दलितो को फंसाने के लिए झूठा आरोप भी मढ़ देते है, इस झूठे आरोप के चक्कर में पिछले 1 साल से एक बुजुर्ग दंपत्ति न्याय के लिए भटक रहे है.. ये मामला लुधियाना के जगराओं के तहत आने वाले गांव लक्खा का है। पीड़ित परिवार की दुर्दशा देखने के बाद अब कई जन संगठनो ने एक साथ मिलकर लुधिया ग्रामीण के एसएसपी अंकुर गुप्ता को एक ज्ञापन भी सौंपा है।
उन्होंने बताया कि आरोपी रसूखदार परिवार से है, उसने अपनी उंगुली खुद काटी थी, और बुजुर्ग दंपत्ति को धारा 326 गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में फंसा दिया। इस मामले को एक साल हो चुका है औऱ पीड़ित न्याय के लिए दर दर भटक रहे है, लेकिन प्रशासन उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं है। प्रतिनिधिमंडल में मांग की है पीड़ितों पर लगे झूठे आरोपो की जांच हो और उसे खारिज किया जायें, ताकि पीड़ित शांत जिंदगी जी पायें.. और सहीं मायने में जो आरोपी है उसे सजा मिले। वैसे ये कोई नई बात नहीं है कि रसूखदार लोगो के सामने अक्सर गरीबों को ही दबा दिया जाता है, अब देखना ये होगा कि क्या इस हस्तक्षेप के बाद पीड़ित दंपत्ति को न्याय मिलेगा।



