Medical Negligence: लापरवाही से मौत पर डॉक्टरों को विशेष राहत, जानें क्या हैं नए नियम

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Medical Negligence: भारतीय न्याय सहिंता 2023 के लागू होने से जहां एक तरफ कुछ धाराओ को लेकर विरोध हुआ तो वहीं कुछ धाराओं ने राहत भी दी, जिसमें मिली बड़ी राहतों में से एक है धारा 106.. जो कि चिकित्सा लापरवाही के कारण हुई मौत में कानून और सजा के प्रावधानों के बारे में बताता है।

जहां पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के अनुसार डॉक्टर या मेडीकल स्टाफ की लापरवाही से हुई मौत को गैर इरादतम हत्या माना जाता था, और आरोपी पर अपराधिक मामला दर्ज किया जाता था। वहीं बीएनएस 2023 में सरकार ने बड़ी राहत दी है। जिससे कारण मेडीकल क्षेत्र से जुड़े लोगो ने सरकार के इस फैसला का स्वागत किया है। आईये जानते है कि क्या कहती है बीएनएस धारा 106..

क्या है Medical Negligence

कहते है कि भगवान के बाद अगर किसी का दूसरा स्थान है तो वो है डॉक्टर, लोग उनपर अपनी जिंदगी का भरोसा करते है। ऐसे में जो प्रशिक्षित डॉक्टर है, मेडीकल स्टाफ है, उनसे उम्मीद दी जाती है कि वो अपने सभी कर्ताव्यों को  सावधानी और सतर्कता के साथ निभाये.. ताकि किसी की जिंदगी खतरे में न पड़े, लेकिन डॉक्टर भी आखिर इंसान ही है, और उनसे भी गलती हो सकती है, मगर अक्सर पीड़ित परिवार डॉक्टर को अपने परिजनो की मौत का जिम्मेदार ठहरा कर उनपर अपराधिक मामला दर्ज करा देते थे.. जिसे लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र से अपील की कि वो इस मामले में कोई रियायत बरतें।

धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत

हालांकि केंद्र ने बीएनएस 2023 लाकर इसे अपराधिक मामलों की श्रैणी से हटा दिया वहीं चिकित्सा या मेडीकल स्टाफ की गलती के कारण किसी की मौत हो जाती है तो उसे मेडिकल नेगलिजेंस माना जाता है, साथ ही पीड़ित पक्ष को ये अधिकार है कि वो जिम्मेदार मेडीकल स्टाफ के खिलाफ धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत होने का मामला दर्ज करा सकता है, लेकिन अब से वो अपराधिक मामला नही होगा।

लंबे समय से इलाज करवाने के बाद भी लापरवाही होना

मेडीकल नेगलीजेंस करने में डॉक्टर के साथ साथ नर्सिंग स्टाफ, पैथोलॉजिकल टेस्टिंग लैब, मेडिकल स्टोर की लापरवाही समेत टेक्नीशियन की लापरवाही भी शामिल है। इन लापरवाही में सर्जरी के वक्त मरीज को सही एनिस्थेसिया न मिलने से होश में आ जाना औऱ दर्द से मौत हो जाता, सर्जिकल लापरवाही का होना, मरीजों को गलत दवा देने के कारण मौत होना, लंबे समय से इलाज करवाने के बाद भी लापरवाही होना, सर्जरी के दौरान अन्य अंगो को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाये मेड़िकल नेगलिजेंस में गिनी जायेगी, हालांकि अब इसे गैर इरादतन हत्या नही माना जायेगा। ऐसे में  रजिस्टर्ड डॉक्टर को धारा 106 के तहत 2 साल की सजा, और जुर्माना भी लगाया जा सकता है

उपभोक्ता फोरम  में 20 लाख रुपये तक का मुआवजा

वहीं मेडीकल नेगलीजेंस मामले में सरकार ने पीड़ित को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए मुआवजा देने का प्रावधान बनाया है। जिसमें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(1) के तहत  सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं। इसके तहत जिलाउपभोक्ता फोरम  में 20 लाख रुपये तक का मुआवजे के लिए, राज्य उपभोक्ता फोरम में बीस लाख से एक करोड़ रुपये तक के मुआवजे के लिए और  राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में एक करोड़ रुपये से ज्यादा के मुआवजे के लिए दावा किया जा सकता है।

वहीं पीड़ित के पास अधिकार है कि वो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में भी शिकायत दर्ज कर सकते है। हालांकि फोरम में हो या काउंसिल में पीड़ित मामले के होने के 2 साल के अंदर ही शिकायत दर्ज करा सकता है। वहीं अपील आयोग से आदेश प्राप्त करने के 30 दिनों के अंदर की जानी चाहिए।

सरकार ने इस कानून को लाकर मेडीकल नेगलीजेंस मामले में मेडीकल फील्ड से जुड़े लोगो को बड़ी राहत दी है। इससे कहीं न कहीं अपराधिक मामलों के कारण कई बार काबिल डॉक्टर की प्रेक्टिस को भी रद्द कर दिया जाता था, उससे अब राहत मिलेगी। जांच पूरी होगी.. लेकिन डॉक्टर का करियर तबाह न हो, इसका भी पूरा ध्यान रखा गया है।

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