Ludhiana news: बुजुर्ग दंपती की गिरफ्तारी पर फूटा गुस्सा, काली चुन्नियां ओढ़ SSP दफ्तर के बाहर महिलाओं का भारी प्रदर्शन

Ludhiana News, Caste discrimination with Dalit
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Ludhiana news: हाल ही में पंजाब के लुधियाना से एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्थानीय दबंगों ने जाति-आधारित उत्पीड़न की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने पहले एक बुजुर्ग दलित जोड़े के साथ मारपीट की, और जब पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो पुलिस ने उलटे उन्हीं के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर लिया—जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन भी किया।

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दलित दंपत्ति पर लगा झूठा आरोप

चाहे युवा हों या बुजुर्ग, ये दबंग ‘मनुवादी’ तत्व किसी को नहीं बख्शते; अगर कोई व्यक्ति दलित जाति का है, तो उसके साथ जानवरों से भी बदतर बर्ताव किया जाता है—उसे शारीरिक हमले का शिकार बनाया जाता है और फिर उलटे उसी के खिलाफ़ मामले भी दर्ज किए जाते हैं। ऐसा ही एक मामला पंजाब के लुधियाना से है, जहां दलितों को प्रताड़ित करने का एक नया तरीका खोज लिया है दबंगो ने,.. जी हां, पहले खुद को नुकसान पहुंचाते है औऱ फिर उल्टा दलितो को फंसाने के लिए झूठा आरोप भी मढ़ देते है, इस झूठे आरोप के चक्कर में पिछले 1 साल से एक बुजुर्ग दंपत्ति न्याय के लिए भटक रहे है.. दरअसल ये मामला लुधियाना (Ludhiana) के जगराओं (Jagraon) के तहत आने वाले गांव लक्खा (Lakkha Village)का है।

पुलिस ने दर्ज किया झूठा बयान

पीड़ित परिवार की दुर्दशा देखने के बाद अब कई जन संगठनो ने एक साथ मिलकर लुधिया ग्रामीण के एसएसपी (SSP) अंकुर गुप्ता को एक ज्ञापन भी सौंपा है। उन्होंने बताया कि आरोपी रसूखदार परिवार से है, उसने अपनी उंगुली खुद काटी थी, और बुजुर्ग दंपत्ति को धारा 26 गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में फंसा दिया। इस मामले को एक साल हो चुका है औऱ पीड़ित न्याय के लिए दर दर भटक रहे है, लेकिन प्रशासन उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं है। वही प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जांच के दौरान, हठूर पुलिस स्टेशन के ASI ने बुजुर्ग पीड़ित जोड़े के बयान अपनी मर्ज़ी से दर्ज करके हमलावरों का पक्ष लिया।

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आपको बता दें, इस घटना के सामने आने के बाद, पेंडू मज़दूर यूनियन की बीबी जसबीर कौर के नेतृत्व में एक विरोध प्रदर्शन हुआ। इसमें पीड़ित दलित परिवार के ख़िलाफ़ दर्ज झूठे मामले को तुरंत रद्द करने की मांग की गयी है। इतना ही नहीं प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है पीड़ितों पर लगे झूठे आरोपो की जांच हो और आरोपियों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करके उन पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए। ताकि पीड़ित शांत जिंदगी जी पायें.. और सहीं मायने में जो आरोपी है उसे सजा मिले। वैसे ये कोई नई बात नहीं है कि रसूखदार लोगो के सामने अक्सर गरीबों को ही दबा दिया जाता है, अब देखना ये होगा कि क्या इस हस्तक्षेप के बाद पीड़ित दंपत्ति को न्याय मिलेगा।

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