बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो.. उनका ये कथन हर उस व्यक्ति के लिए था जो संगठन की, शिक्षा की शक्ति को नहीं समझते थे। बाबा साहब कहते थे कि केवल शिक्षा हासिल करने से भी तब तक जीत हासिल नहीं होगी, जब तक हर एक दलित संगठित नहीं होगा.. दलितों को संघर्ष को तभी पहचान मिलेगी, जब वो एकजुट होंगे.. हम सभी जानते है कि मनुस्मृति की विचारधारा वाले कभी भी किसी दलित को उंचा उठते नहीं देख सकते है।
ऐसे में सत्ता हासिल कर सवर्णों पर राज करने देने की बात तो टेढ़ी खीर जैसी ही है.. लेकिन तब संगठन की ही शक्ति आपको ताकत देती है राजनीति के उस ओहदे पर पहुंचने की, जिसके माध्यम से दलित पिछड़े लोग अपने समाज का उत्थान कर सकते है। हम अपने इस लेख में दलित समाज के आने वाले ऐसे 5 सासंदो के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने न केवल एकता की शक्ति दिखाई बल्कि आज भी वो एक ताकतवर प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले नेता कहलाते है।
मल्लिकार्जुन खड़गे – Mallikarjun Kharge
सबसे पहले बात करेंगे मल्लिकार्जुन खड़गे की.. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टा के एक कद्दावर नेता, जिन्होंने अपनी जिंदगी में तमाम कठिनाइयों को सहा, बचपन में हिंसा में मां और बहन को खो दिया.. लेकिन उस हादसे ने उनमें अपने समाज के लोगो के लिए कुछ बड़ा करने की आग जला दी। कर्नाटक राज्य के बीदर जिला के भालकी तालुका में आने वाले वारावट्टी गांव में 21 जुलाई 1942 को एक दलित परिवार में जन्में मल्लिकार्जुन खड़गे भारतीय वकील और राजनीतिज्ञ भी हैं। भारतीय राजनीति के इतिहास में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है।
वो कांग्रेस शासन में केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, भारत के रेल मंत्री के तौर पर कार्यरत रहे तो वहीं बीजेपी के आने के बाद राज्य सभा में विपक्ष के नेता के तौर पर थे। वो गुलबर्गा से सांसद रहे थे। उनकी तमाम उपलब्धि के कारण ही 2022 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था और वो आज भी कांग्रेस के अध्यक्ष है, वो कांग्रेस में दलित जाति से आने वाले एक प्रभावशाली नेता है।
2. चिराग पासवान – Chirag Paswan
चिराग पासवान ने राजनीति में आने से पहले फिल्मों में हाथ आजमाया था, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी, तो बस उनके पिता और बिहार के कद्दार नेता रामविलास पासवान के कहने पर वो राजनीति में सक्रिय हो गए। पिता की छाया में उन्होंने 2014 और 2019 के आम चुनावों में जमुई सीट से जीत दर्ज की.. 2019 में उन्हें लोजपा का अध्यक्ष बनाया गया, ताकि वो राजनीति के दांव पेंच को और अच्छे से सीखे।
लेकिन साल 2020 में अपने पिता के निधन के बाद उनकी पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी को टूट का सामना करना पड़ा लेकिन ऐसे समय पर उन्होंने एक कुशल नेतृत्व का परिचय दिया… उन्होंने अलग पार्टी बनाई लोकजनशक्ति पार्टी रामविलास, और 2024 के आम चुनावों में फिर से चिराग ने वापसी की और हाजीपुर से जीत कर सांसद बने। उन्हें बीजेपी कैबिनैत की तरफ से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के 19वें केंद्रीय मंत्री चुना गया। चिराग आज एक प्रखंड दलित नेता बन चुके है। जो काफी लोकप्रिय है।
3. कडीयाम श्रीहरी – Kadiyam Srihari
तेलंगाना के वरिष्ठ दलित कद्दावर नेताओं में कडीयम श्रीहरि का नाम काफी सम्मान से लिया जाता है। 2014 से लेकर 2018 तक तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के तौर पर सेवा देने वाले आज घनपुर स्टेशन विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। राजनीति में आने से पहले वो बैंक प्रबंधन थे, लेकिन उसके बाद उन्होंने शिक्षक के तौर पर काम शुरु कर दिया। इसी कारण शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने राज्य में दलित पिछड़े वर्ग के लोगो को शिक्षा की तरफ बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठायें। वो आज भी दलित उत्थान की दिशा में काम कर रह है।
4. थावर चंद गहलोत – Thawar Chand Gehlot
बीजेपी के राजनेता और कर्नाटर के राज्यपाल थावर चंद गहलोत बीजेपी के एक कद्दावर दलित नेता है। जो 2014 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री चुने गए थे। वो एक बेहतरीन कबड्डी और हॉकी प्लेयर भी रह चुके है। थावर चंद गहलोत ने 1980 में अपने राजनीति सफर शुरु किया था। अपने कार्यक्षमता और दूरदर्शी सोच के कारण ही वो कर्नाटक राज्य के राज्यपाल चुने गए है।
5. मीरा कुमार – Meira Kumar
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की एक प्रमुख नेता मीरा कुमार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष के रूप में काफी प्रचलित हुई। वो लोकसभा अध्यक्ष का पद संभालने वाली पहली महिला थी। वहीं वो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी थी। मीरा कुमार उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी और बिहार की पहली महिला मंत्री सुमित्रा देवी की बहू भी है। मीरा कुमार काफी सादगी भरा जीवन जीती है.. मगर उनका व्यक्तित्व काफी प्रभावशाली है।
ये वो सासंद है जिन्होंने दलित होते हुए भारतीय राजनीति में काफी प्रभावशाली ओहदा हासिल किया है। जिसके लिए वो हमेशा याद किये जायेंगे। भारतीय राजनीति में दलितों को अहम हिस्सेदारी दिलवाने में इन नेताओं ने अहम भूमिका निभाई है।



