Karnataka news: बीते दिन कांग्रेस पार्टी ने प्रमुख राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को लेकर खबर सामने आई थी. जहाँ राहुल गांधी ने बिना नाम लिए बड़ी बात कह दी है, उन्होंने माना कि 80 और 90 के दशक में कांग्रेस (Congress) की गलतियों के कारण ही जाति-आधारित क्षेत्रीय दल मजबूत हुए, सालभर पहले राहुल गांधी ने ओबीसी समुदाय (OBC community) की अनदेखी के लिए भी माफी मांगी थी और अब वह दलितों के मामले में भी वैसा ही कह रहे हैं, पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने संविधान की कॉपी लेकर कई रैलियां की थीं, जिसकी वजह से लोकसभा में कांग्रेस की सीटें दोगुनी हो गई..हालाँकि, आज भी कांग्रेस पार्टी से कोई भी दलित मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है; परिणामस्वरूप, कर्नाटक में काफी समय से एक दलित मुख्यमंत्री की माँग की जा रही है।
और पढ़े: Top 5 Dalit News: सत्ता, जातिवाद और अपमान… दलित नेताओं की मजबूरी की 5 बड़ी खबरें
कर्नाटक की राजनीति फिर से गरमाई
दरअसल, कर्नाटक में पिछले कुछ समय से दलित सीएम को मांग को लेकर राजनीति में बड़ा भूचाल आया हुआ है, सत्तारूढ़ कांग्रेस तमाम विरोधों और माँगो के बाद भी सत्ता की गद्दी एक दलित सीएम को देने के लिए राजी नहीं हो रहे है। दलित सीएम की मांग को फिर से उठाया है विधान परिषद के विपक्ष के नेता चालवाड़ी नारायणस्वामी (Chalavadi Narayanaswamy) ने.. जिन्होंने कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के सभी दलित नेताओं से आग्रह किया है।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार
उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने दलित नेताओं को इस कदर दबा दिया है कि वो एक बीजहीन अस्तित्व वाले नेता बन कर रह गए है जो अपने हक की आवाज भी नही उठाते। उन्होंने दलित नेताओं को बीजेपी (BJP) में शामिल होने का ऑफर देते हुए कहा कि कांग्रेस हाइकमान अगर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के (Deputy Chief Minister D.K. Shivakumar) नाम पर मुहर लगाती है तो हमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो दलित नेताओं को कैबिनेट के अन्य पदों का बहिष्कार करना चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि अगर कांग्रेस दलितों को केवल एक वोट बैंक के तौर पर देखती रही और उन्हें ऊँचे पदों के झूठे वादे करती रही, तो इससे मुझे गहरा दुख होगा।
कांग्रेस के लिए दलित हमेशा वोट बैंक
वही इस बीच, भाजपा के एक नेता ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर मौजूद दलित नेताओं में अपने अधिकारों की मांग करने का साहस नहीं है। उन्होंने टिप्पणी की, कांग्रेस (Congress) के लिए दलित हमेशा वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं रहे है.. तभी आज तक इतना हंगामा होने के बाद भी अब तक दलित सीएम (CM) की मांग पर कांग्रेस का रूख बेहद उदासीन है। ऐसे में देखना ये होगा कि क्या मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफा देने के बाद दलित सीएम बनाने पर कोई फैसला होगा, या दलित सीएम के लिए लड़ाई जारी रहेगी। आपको क्या लगता है क्या ये इतना आसान होगा।



