Top 5 Dalit news: जब दलितों के लिए न्याय की मांग होती है तो ऐसा क्यों है कि उन्हें सार्वजनिक रूप से शोर मचा कर बताया जाता है, जबकि आधे से ज्यादा दलित उत्पीड़न के मामले तो मीडिया के सामने भी नहीं आते है, फिर उन मामले में क्यों शोर नहीं मचाया जाता है। वजह साफ है राजनीतिक की रोटियां सेंकना। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो सबूत है कि रोजाना दलित उत्पीड़न होते है लेकिन न्याय की कसौटी पर उतरने वाले मामले उंगलियों पर गिने जा सकते है।
नगीना सांसद का कद और ऊंचा बढ़ा
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के संघर्षों में जुड़े एक और उपल्बधि से है, एक तरफ आजाद यूपी के बीजेपी की सरकार की दलितों और बाबा साहब के सम्मान में डॉ. बाबा साहब अंबेडकर की मूर्तियों के संरक्षण के नाम पर ₹403 करोड़ अलॉट करने का ढोंग का पर्दाफाश किया है तो वहीं लखनऊ के मुख्य चौराहे पर बाबा साहब के पवित्र ‘अस्थि कलश स्थल’ को हटाने के आदेश जारी करने पर भी निशाना साधा है। आजाद ने सीधे सरकार को घेरते हुए कहा कि बहुजनों के हक की बात करने वाली सरकार असल में बहुजनों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से पीछे नहीं हटती है।
लेकिन ये अन्याय अब बहुजन समाज बर्दाश्त नहीं करेगा.. सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले, वरना सड़कों पर वो बड़ा जन-आंदोलन करेंगे। वहीं आजाद के इस संघर्ष से प्रभावित होकर बसपा के पूर्व विधायक व पूर्व राजमंत्री आयुश चौहान बिजनौर के पास नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में बसपा को छोड़कर अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ आजाद समाज पार्टी में शामिल हो गए है। जिसने आसपा के बढ़ते प्रभाव को दर्शा दिया है.. अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब यूपी में अगले सीएम आजाद ही होंगे। वैसे आपको क्या लगता है क्या आजाद सीएम योगी को कड़ी टक्कर देने वाले है।
बलिया में 9 साल की दलित मासूम के साथ गैंगरेप
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बलिया से है, जहां स्कूलों को बंद कर के सरकार को लगता है कि उन्होंने पैसे बचाने का काम किया है लेकिन उसका नतीजा अब देखने को मिल रहा है.. ताजा मामला बलिया के हल्दी थाना क्षेत्र से है, जहां मात्र 12 साल के दो लड़को ने 9 साल की दलित बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया… और फरार हो गए.. हैरानी की बात है कि दोनो लड़को ने पहले बच्ची को पैसे देने का लालच दिया औऱ बहला कर ले गए… मात्र 12 साल की उम्र में ऐसा घिनौना अपराध … आखिर जिम्मेदार कौन है.. पिड़िता के पिता ने तहरीर दी है कि 23 मई की शाम को पीड़िता गांव बाहर बकरियां चराने गई हुई थी, तभी गांव के ही दो नाबालिक लड़को ने लड़की को पैसे देने का लालच दिया था.. और अपने साथ ले गए थे।
जिसके बाद जब पीड़िता की तलाश की गई तो वो उन्हें एक सुनसान इलाके में मिली.. पीड़िता ने सारी आपबीती परिजनों को बताई.. दोनो आरोपियों ने पीड़िता का सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे जातिसूचक गालियां भी दी थी। बलिया के पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद फहीम कुरैशी ने बताया कि दोनो आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी गई है और आगे की जांच भी की जा रही है। जल्द ही पुलिस दोनो लड़को को गिरफ्तार कर लेगी,,, हैरानी की बात है इतनी कम उम्र के बच्चे जहां स्कूल जाने चाहिए वो ऐसे घिनौने अपराधों को अंजाम दे रहे है.. तो क्या ऐसे पढ़ेगा इंडिया और बढ़ेगा इंडिया.. जरा खुद सोच कर बताइयें।
उत्तरकाशी में दलितों की देव डोली लेने से इंकार
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के उत्तरकाशी से है, जहां दलितो की देव डोली को जातिगत मानसिकता और भेदभाव के कारण गंगोत्री धाम जाने से जबरन रोक दिया गया। ये मामला उत्तरकाशी के भराण गांव का है, जहां गंगा दशहरा के मौके पर सोमेश्वर देवता के साथ देव डोली को भी गंगोत्री ले जाने की परंपरा है, लेकिन जब गांव के दलित समाज के लोगो ने अपनी तरफ से देव डोली भेजने की कोशिश की तो उसे शामिल करने से ही इंकार कर दिया गया..वहीं उनसे आर्थिक सहायता भी नहीं ली गई.. उल्टा उनसे कहा कि वो अपनी डोली अलग से लायें, जिससे दलित समाज के लोगों में काफी गुस्सा भर गया है।
उन्होने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य मे दलितो के साथ उत्पीड़न अब बर्दाश्त के बाहर हो रहा है,,, अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लेंगे। दलित समाज के लोग उत्तरकाशी न्यायलय पहुंच गए है न्याय के लिए..उन्होंने अपील की है कि अगर उनके समाज के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो सीधा धर्म बदलने के लिए ही कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे… हालांकि अधिवक्ताओं ने उन्हें आश्वासन देकर शांत तो करा दिया है लेकिन देखना ये होगा कि दलितो को न्याय मिलेगा या वो धर्म ही बदल लेंगे।
कोडरमा में दलितो की जमीनों को खाली कराने का आदेश
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला झारखंड के कोडरमा से है, जहां दलितों की पूरी बस्ती को उजाड़ने की साजिश का सनसनाखेज मामला सामने आया है। जिसके खिलाफ झारखंड राज्य निर्माण कामगार यूनियन (सीटू) ने वीर कुंवर सिंह पार्क में जूलूस निकाल कर विरोध दर्ज किया है। ये मामला कोडरमा नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 19 में आने वाले इंदरवाटांड़ क्षेत्र का है, जहां कई दशको से रहने वाले दलितों की बस्ती को उजाड़ने की साजिश का खुलासा होने के बाद भारी संख्या में विरोध किया जा रहा है,. सीटू के जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश ने बताया कि करीब 3 पीढ़ियों से दलित परिवार यहां रह रहे है फिर किसी और के नाम से दाखिल खारिज कैसे हो सकता है।
वहीं सरकार उन्हें विस्थापित तो करना चाहती है लेकिन बदले में उनके पुनर्वास का क्या..उनके लिए कोई वैकल्पिक आवास के बंदोबस्त का क्या… जबकि जमीन खाली करने के लिए कोई नोटिस भी नहीं दिया गया है.. और उस तरह के बेदखल करना पूरी तरह से अमानवीय कदम है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक दलितों को न्याय नहीं मिलता तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.. हैरानी की बात है कि जमीने खाली कराने के लिए केवल दलित बस्तियों को ही निशाना क्यो बनाया जा रहा है, कहीं रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की तरह उन्हें भी देश से बाहर तो नहीं भेजने की साजिश हो रही है।
महू में आसपा नेता दामोदर यादव के काफिले पर हमला
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के महू से है, जहां कुछ जातिवादि आतंकियों ने भीम आर्मी को बदनाम करने की बड़ी साजिश की थी, लेकिन आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने उनके इरादो पर पानी फेर दिया है। ये मामला महू से मालवा में तब सामने आया जब दामोदर यादव सदस्यता कार्यक्रम में जा रहे थे, लेकिन उनके काफिले के आगे कुछ गुंडे उनका पुतला लेकर पहुंचे और उनके विरोध में नारेबाजी करने लगे.. हालांकि बदले में आजाद समाज पार्टी व भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने भी जवाब देने की कोशिश की लेकिन दामोदर य़ादव ने इंकार कर दिया।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये हरकत केवल राज्य का माहौल खराब करने की साजिश थी, ताकि सारा आरोप भीम आर्मी और आसपा के कार्यकर्ताओं पर डाल दिया जाये और उन्हें विलन की तरह दिखा कर उन्हें कमजोर किया जा सकें.. लेकिन दामोदर यादव ने दबंगो के इरादे पर पानी फेर दिया.. अब देखना ये होगा कि अब उन्हें बदनाम करने की क्या साजिश की जाती है.. वैसे यूपी में आसपा की लहर का असर एमपी में भी नजर आ रहा है.. ऐसे में क्या मध्य प्रदेश का भी समीकरण बदल सकता है।



