UP Crime news: हाल ही में NCRB ने उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार पर एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया कि दलितों पर अत्याचार कम हुए हैं। हालांकि, अब इन मामलों को लेकर एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। आरोप है कि दलितों पर अत्याचार करने वाले ज़्यादातर यादव और मुस्लिम समुदाय के लोग हैं।
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दलित उत्पीड़न में यादव औऱ मुसलमान सबसे आगे
अक्सर जब हम दलितों पर अत्याचार की खबरें पढ़ते हैं, तो पाते हैं कि दलितों पर अत्याचार करने वाला यादव या मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति होता है, जिसका दबदबा इतना बढ़ गया है कि कभी-कभी वे दलित महिलाओं, लड़कियों या युवाओं को अपना शिकार बनाते हैं। अब ऐसा ही एक चौकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश से है, जहां दलितों के उत्पीड़न में शामिल आरोपियों के बारे में पुलिस की एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है।
SC/ST Act मामले की रिपोर्ट जारी
इस एक रिपोर्ट ने कई दावों की सच्चाई को भी उजागर कर दिया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस ने दलित उत्पीड़न को लेकर जनवरी 2026 से लेकर अप्रैल 2026 तक में एससीएसटी एक्ट (SC/ST Act) में दर्ज हुए मामलों की एक रिपोर्ट जारी की है। आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल यूपी (UP) में ही बीते 4 महीनों में 4,741 मामले दर्ज हुए, और 14672 लोगों को आरोपी बनाया गया।
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आंकड़े आने से राजनीति गरमाई
लेकिन इसमे सबसे हैरान करने वाले आकड़े ये है कि इन आरोपियों में सबसे ज्यादा 2,160 यादव समाज के लोग है. जबकि जहां मौका पड़ता है वहां उनके नेता खुद को दलित कहने से बाज नहीं आते, फिर भला वो दलित उत्पीड़न में कैसे शामिल हो गए,,, दूसरा स्थान तो और चौंकाने वाला है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के 1983 आरोपी बनाये गए, इसके बाद ब्राहमणों और क्षत्रियों का नंबर आता है।
वहीं यूपी (Uttar Pradesh) का वाराणसी (Varanashi) दलित उत्पीड़न करने के मामले में पहले नंबर पर आने वाला जिला है, और यहां भी यादव और मुसलमान ही दलित उत्पीड़न में अव्वल है। इन आकड़ो के आने के बाद जमकर इसपर राजनीति शुरु हो गई है।
आलोक अवस्थी ने सपा प्रमुख पर साधा निशाना
बीजेपी नेता आलोक अवस्थी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सपा का पीडीए असल में पिछड़ा और अल्पसंख्यक द्वारा दलितों का उत्पीड़न” है। वहीं दलितो संगठनों को अब चिंता सताने लगी है कि यूपी में फिर से 2012 से लेकर 2017 तक फैली अराजकता आ रही है। जिसमें दलितो को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया था। जो भी हो, लेकिन इन आकडों से ये तो तय है कि दलितों का उत्पीड़न करने के मामले में केवल एक धर्म शामिल नहीं है बल्कि सभी बहती गंगा में हाथ धो रहे है।



