Top 5 Dalit news: सम्मान और न्याय की तलाश में दलित समाज, पढ़िए दिनभर की 5 बड़ी खबरें

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Top 5 Dalit news: आपकी नज़रों में सभ्य समाज की परिभाषा क्या होगी, एक ऐसा समाज जहां लोग सम्मान और न्याय के साथ रहते है लेकिन क्या भारत की दलितों की मौजूदा स्थिति को देख कर ऐसा लगता है कि यहां समाज सभ्य है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों से जुड़ी खबरों के बारे में जानेंगे जिसने उस समाज की मिट्टी पलित की है जो जाति के नाम पर अपने से कमजोर लोगों को प्रताड़ित करने के कोई कसर नहीं छोड़ता।

रोहतक में दलित युवक की निर्मम हत्या

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला हरियाणा के रोहतक जिले से है, जहां एक दलित युवक की निर्मम हत्या कर उनकी पहचान छिपाने के लिए हत्यारों ने उसका गला कर काट पानी की डिग्गी में फेंक दिया.. ये सनसनीखेज मामला रोहतक जिले के सांपला थाना क्षेत्र के गांव इस्माइला का है, जहां सोमवार की सुबह सुबह पानी की डिग्गी में किसी का शव होने की सूचना सांपला थाना क्षेत्र को दी गई थी, मौके पर पहुंची पुलिस ने जब जांच शुरु की तो मृतक की शिनाख्त 26 साल के दलित युवक नीरज के रूप में हुई..वो घर में सबसे बड़ा बेटा था, उसकी 3 बहनें और एक भाई है।

पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया से पता चलता है कि हत्या कहीं और की गई है और बाद में उसकी गर्दन काट कर शव को डिग्गी में फेंका गया है। शव को पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआइएमएस रोहतक भेज दिया है, साथ ही अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच भी शुरु कर दी है। साथ ही पुलिस परिजनों और गांव वालों से बात करके ये भी पता कर रही है कि क्या नीरज की कहीं किसी से पुरानी दुश्मनी तो नहीं थी, क्योंकि जिस तरह से शरीर के दो टुकड़े हुए वो आरोपियों की घिनौनी मानसिकता और नफरत को दर्शाता है। अब देखना ये होगा कि पुलिस जांच में क्या सच सामने आता है।

पटना में 50 दलित परिवारों के घरों को तोड़ा

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के पटना से है, जहां विधानसभा चुनावों में दलितों के विकास का मुद्दा बना कर सरकार तो बन गई, लेकिन तब दलितों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि विकास के नाम पर उन्हें उनके ही घर से बेघर कर दिया जायेगा। दिल को झकझोर देने वाला ये मामला पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र के नौआचक गांव का है, जहां जातिवादि दबंगो ने एक या दो नहीं बल्कि पूरे 50 दलित परिवालों के घरों को उजाड़ दिया है।

विरोध करने पर निर्ममता से मारपीट की

इनका कसूर केवल इतना था कि वो पिछले 40 सालों से सरकारी जमीन पर रह रहे थे, लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि 40 सालो के बाद  सरकार को याद आया कि दलितों को वहां से हटाना है, और वो भी सरकार खुद अपने हाथों को गंदा करने के लिए तैयार नहीं है। बल्कि कुछ दबंगो ने वहां आकर जबरन दलित परिवारों को घर से बाहर कर दिया, उनके घरों में तोड़फोड़ मचाई और जब दलित परिवारों ने विरोध किया तो उनके साथ निर्ममता से मारपीट की। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार बाढ़ थाना में जाकर अर्जी दे रहे है कि सरकार उन्हें विस्थापित करते ने पहले कम से कम रहने के लिए कोई जगह तो मुहैया करा दें, ताकि उनके सिरों पर छत बनी रहे।

हालांकि पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने पहले भी सरकार से जमीन आवंटन करने की गुहार लगाई है और सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि उन्हें बेघर नहीं किया जायेगा, लेकिन जो हालात फिलहाल है। उससे लगता नहीं कि दलित परिवारों के सिर पर छत बचने वाली है। बुनियादी सुविधाओं का मिलना तो दूर की बात है। पुलिस ने दलित परिवारों की अर्जी पर जांच तो शुरु कर दी है लेकिन देखना ये होगा कि ये जांच कहा तक चलती है.. या फिर दलित परिवारों को कहीं और विस्थापित होना पड़ेगा। वैसे दलितों को विस्थापित करने का खेल काफी पुराना है, कहीं ये भी उसका ही हिस्सा तो नहीं।

मुरादाबाद में दिनदहाड़े युवक की हत्या

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से है, जहां दिनदहाड़े पुरानी रंजिश के चलते दो दबंगो ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई, लेकिन जिस पर गोलियां चली थी, उसके जगह एक निर्दोश की मौत हो गई.. सबसे ज्यादा दुख की बात तो ये है कि मृतक की पांच महीने बाद शादी थी.. ये मामला मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र के छतरपुर खंनुपुर गांव की है..पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान 23 साल के अंकित के रूप में हुई है, जो चार भाईयो में सबसे छोटा था, सुबह 6.30 बजे के करीब वो सो कर उठा था और घर की चौखट पर बैठा था तभी गोलीबारी शुरु हुई।

जमीन को लेकर दोनों में विवाद

ये गोलीबारी असल में गांव के ही दो भाईयो निखिल और विशाल ने शुरु की, जब एक जमीन को लेकर दोनों की कई साल पहले सुखबीर नाम के शख्स से दुश्मनी हो गई थी। घटना वाले दिन भी सुखबीर के बेटे आशीष से दोनो आरोपियों की बहस हुई थी, और दोनों ने गोली आशीष पर ही चलाई थी, लेकिन एक गोली अंकित के गले में जा लगी और उसने चौखट पर ही दम तोड़ दिया। वहीं आशीष को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा गांव वालों का कहना है कि अंकित की मौत कोई हादसा नहीं बल्कि सोची समझी साजिश है।

क्यों कि 3 साल पहले उसके भाई रोनू ने दोनो आरोपियो के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था, जिससे दोनो अंकित के परिवार से चिढ़ते थे। घटना की जानकारी मिलते ही एक तरफ डीएम डॉ राजेंद्र पेंसिया और एसएसपी सतपाल अंतिल मौका ए वारदात पर पहुंचे तो वहीं भीम आर्मी भी वहां पहुंच कर पूरी घटना पर पुलिस को निष्पक्ष जांच के लिए कह रही है। वहीं दोनो आरोपी फिलहाल फरार है, अब देखना ये होगा कि अंकित की मौत वाकई में साजिश थी या हादसा.. ये तो तभी पता चलेगा जब दोनो आरोपी पुलिस के शिकंजे में होंगे।

कोयंबटूर में दलित परिवार तरस रहे कब्रिस्तान के लिए

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के कोयंबटूर से है। दलितों और पिछड़ो को जब तक जिंदा रहते है तब तक अपने लिए समाज में केवल खड़े होने की लड़ाई काफी नहीं होती है कि मरने के बाद भी उनके शवों का भी अपमान करने से बाज नहीं आते है जातिवादी.. ताजा मामला कोयंबटूर करमदई के सीलियूर से है, जहां 300 से ज्यादा अरुणथथियार जाति के लोग करीब 70 सालो से रह रहे है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि उनकी जाति के लोगों को अछूत करार देकर सार्वजनिक कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार तक नहीं करने दिया जाता है।

पीड़ित लोगों की दुर्दर्शा को लेकर अधि तमिलर पेरावई के सदस्यों ने एक काल्पनिक शव यात्रा निकाल कर जिला कलेक्टर कार्यालय में याचिका सौंपी है, ताकि इन परिवारों के लिए भी एक अलग से कब्रिस्तान का बंदोबस्त कर सकें सरकार। पीड़ितो ने बताया कि जातिगत भेदभाव के कारण वो लोग अपने प्रियजनों के शवों को गांव के नहर के पास एक त्यागी हुई जमीन पर दफनाते हैं, लेकिन बरसात में जब नहर का पानी बढ़ता है तो वो शव भी बह जाते है, वहीं ऐसे मौसम में किसी की मृत्यु हो जायें तो उन्हें भी दफनाना बेहद मुश्किल होता है।

अधि तमिलर पेरावई ने मांग की है कि या तो पीड़ितों को सार्वजनिक कब्रिस्तान में जाने की अनुमति मिले या फिर उनके लिए अलग से कोई जमीन आवंटित हो, ताकि दलित परिवारों के मृत परिजनो को सम्मान से विदाई दी जा सकी। दलितों के जिंदा रहते तो जो उन्हें तिरस्कार सहना पड़ता है वो तो है लेकिन मरने के बाद भी ऐसी स्थिति वाकई में दिल को झकझोर देती है।

भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह का करारा जवाब

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह के बीच पैदा की जा रही गलतफहमी को लेकर है। विनय रतन ने खुद वीडियो जारी कर दोनों नेताओं के बीच जानबूझ कर दूरियां पैदा करने की कोशिश करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ दिया है। पिछले कुछ समय से काफी हल्ला मचा हुआ है कि विनय रतन आजाद से नाराज है औऱ वो उनसे अलग हो सकते है लेकिन अब विनय रतन ने इस तरह के अफवाह फैलाने वालों को करारा जवाब देते हुए कहा कि भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और चन्द्रशेखर आजाद उनकी आत्मा है और भला आत्मा से कोई उन्हें अलग कर सकता है।

विनय रतन के इस बयान के बाद कहीं न कहीं ये साफ हो गया है कि भीम आर्मी में फूट डालने वाले कभी सफल नहीं होंगे.. शायद विनय रतन जैसे साथियों के दम पर ही आजाद यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी इतनी जोरो शोरो से कर रहे है.. बता दें कि आजाद में फिर से बयान दिया है कि अगर उनकी सरकार आती है तो अपराधी 24 घंटे में गिरफ्तार होंगे” यानि की आसपा के राज में अपराधियों की खैर नहीं होगी। अब देखना ये होगा कि 2027 में किसकी विजय होगी।

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