कानून के रक्षक बने भक्षक? विदिशा में दलित समाज ने कांस्टेबल पर लगाए गंभीर आरोप

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MP Crime news: मध्य प्रदेश के विदिशा से हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एक दलित परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि उनके मवेशी चोरी हो गए थे और उन्हें एक पशु बाज़ार में बेचा जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने मदद के लिए 112 पर कॉल किया था; लेकिन पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय उनके साथ मारपीट की।

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वीदिशा में पुलिस की दादागिरी

मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विदिशा से एक मामला सामने आया  है, जहां कानून के रक्षक ही भक्षक बन कर अब जाति के नाम पर दलितो का उत्पीड़न करने से बाज नहीं आ रहे है। दरअसल, ये मामला विदिशा (Vidisha) के रायसेन (Raisen) के संग्रामपुर (Sangrampur) का है। पीड़ित उधम सिंह अहिरवार समेत अहिरवार समाज के लोगो ने विदिशा पुलिस की डायल 112 में तैनात कांस्टेबल दीपक गुर्जर  के खिलाफ विदिशा एसपी के पास शिकायत दर्ज कराई है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुतिबिक पीड़ित ने बताया कि कुछ दिनों पहले उसकी और उसकी पड़ोसी के कुछ मवेशी चोरी हो गये थे।

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पुलिस खुद पशुओं की खरीद फरोख्त की बात कर रहे

जिसकी जानकारी उन्होंने 112 पर दी थी,  कुछ दिनो के बाद खबर मिली कि उनके पशुओं को विदिशा के पशु बाजार में बेचा जा रहे है, जिसकी खबर सुनकर पीड़ित वहां पहुंचे लेकिन वहां पर पुलिस वाले खुद ही पशुओं की खरीद फरोख्त की बात कर रहे थे। जिसका एक युवक ने वीडियो भी बनाया, लेकिन इससे विवाद हो गया औऱ पुलिस आरक्षक दीपक गुर्जर ने युवक को पीटा औऱ जब पीड़ित ने विरोध किया तो उसे भी थप्पड़ मारे गए और लाठी से  बाजार में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इतना ही नहीं फिर उसे गंभीर हालत में जबरन थाने ले जाया गया जहां उनकी जाति पूछी गई, इसके बाद उसे जातिसूचक गालियां दी गई।

दीपक गुर्जर को फिलहाल के लिए सस्पेंड कर दिया

ये मामला यही नहीं रुका पीड़ित ने प्यास लगने पर पानी मांगा तो जबरन पेशाब पिलाने की कोशिश की गई। उसे थाने में भी बुरी तरह से पीटा गया जिससे वो बेहोश हो गया। वही जब ये मामला सामने आया तो दीपक गुर्जर को फिलहाल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, और मामले की जांच शुरु कर दी गई है। हैरानी की बात है कि जिस पुलिस को दलितो के हक की रक्षा करनी चाहिए वहीं उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए है। आपको बता दें,  कि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब पुलिस सवालों के घेरे में आई हो; अतीत में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। बहरहाल, सवाल अब भी वही है सरकार और प्रशासन आखिर कब तक अपनी चुप्पी साधे रहेंगे?

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