गणतंत्र दिवस पर डॉ. आंबेडकर का राष्ट्र के नाम ऐतिहासिक संबोधन – B. R. Ambedkar

B. R. Ambedkar speech, B. R. Ambedkar Republic day speech
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B. R. Ambedkar: क्या आप जानते है कि हमारा संविधान बनाने में कितना समय लगा था.. जी हां, भारत का संविधान बनाने में पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिनो का समय लगा था, औऱ इसके शिल्पीकार थे भारत रत्न दलितो के भगवान बाबा साहब डॉ भीम राव अंबेडकर.. बाबा साहब कैसे बने संविधान के शिल्पीकार और संविधान सभा में वो कैसे पहुंचे इसकी कहानी तो आपने कई बार सुनी होगी.. लेकिन आज हम आपको बाबा साहब का वो भाषण सुनायेंगे, जब उन्होंने भारत को गणतंत्र देश बनाने से ठीक पहले दिया था.. जब बाबा साहब ने एक समाजिक रूप से समानता भरे भारत की कल्पना की थी।

बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर का प्रेरणादायक भाषण

26 जनवरी 1950 को भारत का गणतंत्र लागू किया गया यानि की उस दिन से भारत का संविधान लागू हो गया था और भारत दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र देश बन गया.. इसी के साथ भारत का एक नया युग शुरु हो चुका था, अब भारत स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र कहला रहा था, जो ब्रिटिशों की छाया से बाहर आ चुका था। संविधान के 251 पेज, जिसपर हाथों से लिखे 117,000 शब्द मौजूद थे, 395 विवरण, 22 पांडुलिपियों और 8 अनुसूचियों  में विभाजित थे, हालांकि समय के साथ इसमे संशोधन किया गा, लेकिन ये आकड़े 1950 में लागू हुए संविधान के है। वैसे तो संविधान सभा में 299 लोग थे लेकिन अकेले बाबा साहब अंबेडकर ने इसे बनाने में अपनी आत्मा उड़ेल दी थी, और उसकी फाइनल ड्राफ्टिंग करने के बाद बाबा साहब देश की जनता को अपना संदेश दिया।

बाबा साहब ने संसद में खड़े होकर अपना भाषण दिया

26 जनवरी 1950 को देश भर में लागू करने से पहले बाबा साहब ने संसद के सामने 26 नवंबर 1949 को संविधान को फाइनल रूप में पेश किया था। इसलिए 2015 से आधिकारिक रूप से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। बाबा साहब ने संसद में खड़े होकर अपना भाषण दिया.. संविधान केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि ये वो ताकत है, वो जीवंत दस्तावेजों का समूह है जो देश के हर एक नागरिक को समानता, स्वातंत्रता औऱ न्याय की गारंटी दे रही है। कोई भी हो, किसी भी धर्म का, किसी भी जाति का, संविधा सबके लिए बराबर है, सबके लिए कानून बराबर है।

छुआछूत पूरी तरह से कानूनन निषेध

बाबा साहब ने कहा कि शूद्र होने के कारण मनुस्मृति और मनुवाद से पैदा हुए दमन और उत्पीड़न से वो भी अछूते नहीं रह सकें थे। लेकिन सच्चाई तो ये है कि संविधान ही मनुस्मृति के दमन का करारा जवाब है। हमारा संविधान बना रहे,. देश का गणतंत्र बना रहे उसके लिए जरूरी है कि मनुस्मृति जैसी विकृत मानसिकता का ग्रंथ का अस्तित्व खत्म होना चाहिए और देश में केवल संविधान का ही कानून चलना चाहिए। बाबा साहब ने हमेशा कहा कि मनुवाद केवल कुछ लोगो को उंचा बताने और कुछ लोगो को दबाने के लिए तैयार की गई व्यवस्था है, जिसका खत्म होना अनिवार्य है, तभी न्याय और समानता सभंव है।

इसलिए बाबा साहब ने एक ऐसा संविधान बनाया जिसमें ये कानून डाले गए जिसमें छुआछूत पूरी तरह से कानूनन निषेध है, और जो इसका उलंघन करेगा उसे सजा होगी.. लेकिन मनुवाद इसे न्याय संगत करार देता है, इसलिए मनुवाद को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। जातिवाद केवल कुछ लोगो का बनाया गया है ताकि वो दूसरो को प्रताड़ित कर के उसे न्याय का नाम दिया जा सकें।

संगठन बनानो और संघर्ष करों

बाबा साहब ने अपने भाषण में नीजि विचार भी रखें, उन्होने कहा कि उन्होंने अपने जीवन को तीन मूल मंत्र के इर्द गिर्द रखा है, जिसमें शिक्षा हासिल करो, संगठन बनानो और संघर्ष करों। भले ही मनुवाद ने शूद्रों को शिक्षा के दूर रखा, लेकिन संविधान ने उन्हें ये अधिकार दिया है। शिक्षा आपको केवल ताकत ही नहीं देती है बल्कि आपकी सोच में भी बदलाव लाती है। जब तक आप शिक्षित नहीं होंगे, आपको धोखे में रख कर गुलाम बना कर रखा जायें। इस बात पर भी आपका ध्यान होना चाहिए कि अगर आप शिक्षा हासिल नहीं करते है तो भले ही सरकार कितने ही आरक्षण आपको देंदे लेकिन शिक्षा के अभाव में आरक्षण का लाभ नहीं ले सकेंगे।

संविधान के अनुच्छेद 22

इसी के साथ ये भी याद रखने वाली बात है कि जब तक आप एकजुट नहीं रहेंगे तब तक आप अपना शोषण नहीं रोक सकेंगें, इसके लिए बेहतर है कि आप पहले संगठित हो.. क्योंकि शूद्रों में भी हम जातियों में बंटे हुए है, हमारी एकता की कमी के कारण सदियों से फाय़दा उठा जा रहा है। अपना पहचान केवल दलित तक रखे.. अलग अलग जाति का नहीं। इसके अवाला ये जरूर अपने दिमाग में रखिये कि बड़ा बदलाव यूही नहीं आता है, इसके लिए संघर्ष करना अनिवार्य है।

सदियों से मनुवादी अपनी सत्ता जमाये हुए है तो उन्हें उखाड़ फेंकने के लिए बिना संघर्ष कुछ हासिल नहीं होगा। इसलिए संघर्ष तो करना ही पड़ेगा। लेकिन याद रखिये वो संघर्ष शांतिपूर्ण औऱ अहिंसक ही रखा जायें। अगर आपको कोई चीज चाहिए तो संविधान के अनुच्छेद 22 के अनुसार आप संगठित होकर संघर्ष किजिए वो भी हिंसा के बिना.. तभी आप अपने संघर्ष को प्रभावी रूप से दुनिया के सामने दिखा पायेंगे।

महिलाओं की शिक्षा एक बड़े बदलाव की दिशा

बाबा साहब ने कहा कि किसी भी बदलाव के लिए सबसे पहले जरूरी है कि आप शिक्षित हो, न केवल पुरुष बल्कि महिलाओ को भी शिक्षित होना चाहिए.. क्योंकि महिलाओं की शिक्षा एक बड़े बदलाव की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा और मजबूत कदम है.. शिक्षा केवल आपकी किताबी ज्ञान वहीं देगी बल्कि आपको बतायेंगी कि अंधविश्वास, ढोंग जैसी कोई चीज नहीं होती है.. ये केवल डराने के लिए मनुवादियों की बनाई नीतिया है। ये आपको आर्थिक रूप से मजबूत देने के लिए अहम है।

बाबा साहब ने संविधान को लेकर कहा कि संविधान का इस्तेमाल तभी सही से हो सकेगा, जब संचालन करने वाले कानूनी रूप से इसका इस्तेमाल करें, ये राजनीति रूप से एक वोट और एक समान मूल्य दिया है लेकिन सामाजिक और आर्थिक रूप से बराबरी के लिए दलितों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। लोकतंत्र की नींव बनाये रखने के लिए आर्थिक असमानता का मिटना जरूरी है, अगर ऐसा नहीं होता तो इसकी नींव हिल सकती है।

संविधान में सबको बराबरी का हक

बाबा साहब ने संविधान की शक्ति समझाई थी.. उन्होंने बताया कि कैसे संविधान ने सबको बराबरी की ताकत दी है, उसका इस्तेमाल करना सीखना होगा.. इसलिए कम से कम हर दलित परिवार का एक एक सदस्य जरूर शिक्षित हो। ताकि वो किसी का मोहताज न रहे। आप अपनी शक्ति पहचानेंगे तभी आप उस शक्ति से लड़ सकेंगे, जो मनुवादियों के पास है।

बाबा साहब ने अपने संदेश में काफी क्लियर शब्दो में कहा था कि उन्होंने दलितों और पिछड़ो को मजबूत होने का रास्ता दिखाया है, उस पर कैसे चलना है लोग खुद तय करें। बाबा साहब ने दलितों को एक नई चेतना दी थी.. जो उन्हें आजादी का सही अर्थ समझाने वाली थी.. आज उनकी ही देन दलित उंचे औंहदे पर है, शिक्षित हो रहे है और अपने समाज के लिए खड़े हो रहे है, भले ही लड़ाई लंबी है लेकिन एक न एक दिन जीत जरूर होगी।

 

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