संसद की ओर इशारा आखिर क्या कहती है बाबा साहब की उठी हुई ऊँगली? जानिए इसके पीछे का असल सच

Bheem Rao Ambedkar inspiring facts, Dr Bheem Rao Ambedkar
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आपने अक्सर बाबा साहब की तस्वीरों में उन्हें नीले सूट में देखा होगा, और साथ ही वो अपनी उंगली से ऊपर की तरफ इशारा करते हुए नजर आते है। नीले रंग के कपड़े पहनने के कारण नीला रंग आज के समय में बहुजनो की लड़ाई का प्रतीक बन गया है…लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाबा साहब हाथ उठाकर उंगुली का इशारा क्यों करते थे.. ये इशारा किस बात का प्रतीक का है.. और बाबा साहब ने ऐसा क्यों किया.. अपने इस लेख में हम जानेंगे बाबा साहब के इशारे का मतलब क्या है।

क्या कहता है बाबा साहब की ऊँगली का इशारा

बाबा साहब अंबेडकर दलितों के लिए समाजिक सुधार में क्रांति लाने वाले असल मायने में एक महाक्रांतिकारी थे.. जिन्होंने आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी थी लेकिन उन्होंने दलितो को जातिवादी की गुलामी से आजाद कराने की लड़ाई लड़ी थी.. उन्होंने पिछड़ो और अछूतो को सामाजिक भेदभाव और असमानता की बेड़ियो से आजाद कराने की लड़ाई लड़ी थी.. बाबा साहब जानते थे कि भारत भले ही अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हो जाये लेकिन सच्ची आजादी तभी होगी जब जातिवाद और भेदभाव से आजादी मिलेगी, इसलिए उन्होंने दलितों और पिछड़ो को एकजुट करके उनके लिए सम्मान की लड़ाई शुरु की.. वो एक मसीहा, एक लीडर बन गए थे। वो अपने भाषणों में हाथों को ऊपर की तरफ उठा कर इशारा करते थे.. बाबा साहब के इन इशारों के कई मतलब निकाले जा सकते है..

सबसे पहले दिशा की तरफ

ये इशारा बौद्ध धर्म के मध्यमा मार्ग पर चलने की तरफ हो सकता है.. जहां समानता, सम्मान, और बराबरी का रास्ता प्रशस्त किया जाता है। बाबा साहब ने हिंदू धर्म में रहकर भी बदलाव लाने के काफी प्रयत्न किये थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी वो ब्राह्मणवादी सोच को हरा नहीं सकें.. और धीरे धीरे वो समझ गए कि हिंदू धर्म में रह कर दलित गर्त में ही दबे रहेंगे इसलिए उन्होंने इशारा किया कि वो उस धर्म की तरफ चले जो उन्हें सम्मान से जीवन जीने की प्रेरणा दें।

जागृति यानि की जागने का प्रतीक

बाबा साहब इस बात को बखूबी समझते थे कि केवल बात करने से ही आप किसी को अपनी बात सुनने के लिए विवश नहीं कर सकते है। इसलिए आपकी बॉडी लैंग्वेंज इतनी पावरफुल होनी चाहिए कि कोई आपकी आंखे देखकर ही आपको सुनने को मजबूर हो जाये.. उनका हाथ उठाकर नारा देना प्रतीक था कि दलितों को अब मानसिक रूप से उठने की जरूरत है, शिक्षा को हथियार अपने हाथों में लेकर संगठित होकर सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ कर दलितो को सम्मान और समानता दिलाने के लिए खड़े हो जायें।

कभी न झुकने का प्रतीक

बाबा साहब का ये इशारा एक पावरफुल मैसेज था कि चाहे कुछ भी हो जायें उनकी नजरे हमेशा उनके लक्ष्यों पर रहेगी और वो युवाओ को भी हमेशा अपने लक्ष्य के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने की सलाह देते थे। ये इशारा चुनौती थी उन लोगो के लिए, जो सत्ता को अपनी जागीर समझते थे. ये इशारा प्रतीक था कि सत्ता जनता से है, और असली ताकत जनता की है, उनकी एकजुटता की है।

आत्मविश्वास के लिए

बाबा साहब ने लोगो तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए हाथों का ऊपर उठा कर इशारा किया.. उनके चेहरे का आत्मविश्वास उन्हें सुनने वाले लाखों लोगो के मन में भी आत्मविश्वास जगा देता था..जैसे वो कह रहे हो कि हम अपने आत्मविश्वास के दम पर अपने लिए एक ऐसी दुनिया बना सकते है जहां उन्हें सम्मान बराबरी के साथ जीवन जीने की आजादी मिलेगी।

अभय़ मुद्रा जो निडर रहने का संदेश देता है

बाबा साहब ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब भी उन्होंने अपने हाथों से आसमान की तरफ इशारा किया था.. कहा जाता है कि बौद्ध धर्म में आध्यत्मिकता के करीब जाने के लिए हाथों से की जानी वाली मुद्राओं का काफी महत्व है। बाबा साहब ने अभय मुद्रा को महत्ता दी औऱ दलितों और पिछड़ो को संदेश दिया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। सत्य के रास्ते पर चल कर ही व्यक्ति सही सम्मान पा सकते है। बाबा साहब का ये इशारा प्रतीक बन गया था उठने का.. दलित जो सदैव झुक कर चलते थे वो अब बाबा साहब के सानिध्य में सिर उठा सकते है।

बाबा साहब ने जब भी कोई नया विचार जनता के सामने रखा, वहां उन्होंने आसमान की तरफ उंगुली उठा कर पूरे आत्मविश्वास दिखाया, उन्होंने कभी खुद को ऊंचा उठाने के लिए किसी और को नीचा नहीं दिखाया था.. वो सबको उंचा उठने का संदेश देते थे। उनका दृढ़ता से इशारा करना प्रतीक है कि उन्होंने सबको उंचा उठने का रास्ता दिखा दिया लेकिन उस रास्ते पर चलना है या नहीं वो आप पर निर्भर करता है। बाबा साहब ने सबको ये अधिकार दे दिया था कि जब भी उन्हें कुछ गलत लगे.. वो उंगुली उठा कर सवाल पूछ सकते है.. उनकी उंगुली की ताकत ही सबसे बड़ी ताकत है.. जो राजा को रंक और रंक को राजा बना सकती है.. बशर्ते आप किस रास्ते को चुनते है वो आपको तय करना है। बाबा साहब जीत, आत्मविश्वास, दृढ़ं निश्चय का प्रतीक है।

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