सात समंदर पार गूंज रही बाबा साहब की दहाड़, जानिए कौन सी संस्था लड़ रही है वैश्विक स्तर पर दलितों की लड़ाई

Ambedkar Organization
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बीते महीने बाबा साहब की 135 वी सालगिरह मनाई गई.. बाबा साहब अंबेडकर जिनकी क्रांतिपूर्ण विचारधारा के कारण आज दुनियाभर में लोग उन्हें फॉलो करते है। पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा मूर्ति और पोस्टर बाबा साहब के ही लगे है.. वहीं उन्हें और उनके विचारों  को फॉलो करने वालों की संख्या भी बाकियों के मुकाबले बहुत है। उन्होंने दलितों और पिछड़ो को सम्मान दिलाने के लिए काफी लड़ाई लड़ी.. लेकिन वो अपनी शिक्षा और समझ के दम पर लड़ते रहे.. मगर फाइनेंशियल कमजोर रहे.. नतीजा.. वो वर्ल्ड लीडर होकर भी कम आंके जाते है।

दुनिया की वो संस्था जो बाबा साहब के सम्मान लड़ रही

भारत में ही उनका सबसे ज्यादा अपमान होता है… लेकिन क्या आप ये सोच सकते है कि आज केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में ऐसी अनगिनत संस्थायें है, जो बाबा साहब के विचारधारा को फॉलो करती है.. जो दलितों और वंचितो को हर हाल में मदद करने के लिए तत्पर रहती है। अपने इस वीडियो में हम 4 ऐसा संस्थाओं के बारे में जानेंगे जो भारत समेत दुनियाभर के दलितों पिछड़ो और अछूतों को न्याय दिलाने के लिए खड़े रहते है, जो उनकी सामाजिक स्थिति के साथ-साथ आर्थिक तौर पर भी मदद करते है। अपने इस लेख में हम 4 ऐसी ही संस्थाओं के बारे में जानेंगे।

1. International Dalit Solidarity Network

यूरोप महादवीप का एक छोटा सा लेकिन खूबसूरत देश डेनमार्च.. यहां मौजूद है, International Dalit Solidarity Network का हेड ऑफिस। इस संस्था की शुरुआत मार्च 2000 में की गई थी, जिसका मेन मकसद दलितों के मानवाधिकारों की राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा करना है। हालांकि IDSN को अक्टूबर 2003 में एक संगठन के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया था।

IDSN असल में यूरोप के राष्ट्रीय दलित एकजुटता नेटवर्कों और जाति-प्रभावित देशों को राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का एक बेहतर नेटवर्क है। ये संस्था इस वक्त नौ देशों , जिसमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, क्षीलंका, यमन, जापान, अफ्रीका और यूके देश में जातिगत भेदभावों और उसके दुष्परिणामों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कार्य करता है। इस संस्था की पहचान इसलिए भी काफी की गई क्योंकि संस्था बाबा साहब के वैचारिक बदलावों को लेकर चलती है। जमीनी स्तर के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच देकर उनके लिए न्याय मुहैया कराने का काम करती है ये संस्था।

2. HUMAN RIGHTS WATCH

ह्यूमन राइट्स वॉच एक ऐसी संस्था है जो बाबा साहब के विचारों से प्रभावित होकर केवल भारत मे ही नही बल्कि दुनिया भर के दलित, कमजोर, पिछड़े लोगों के अधिकारों के लिए लड़ते है। इसकी शुरुआत 1978 में हेलसिंकी वॉच के गठन के साथ ही की गई थी। इस संस्था का मुख्य मकसद सोवियत संघ में गठित उन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करकके समर्थन करना था, जो हेलसिंकी समझौते के प्रति COMPLIANCE के तौर पर निगरानी कर रहे थे। हेलसिंकी वॉच ने भ्रष्ट सरकार की पोल खोलने में अहम भूमिका निभाई थी। इस वक्त ये 100 से भी ज्यादा देशों में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर रहे है। जिसमें 11 हजार से ज्यादा लोग काम तक कर रहे है। खासकर जातिगत भेदभाव औऱ सामाजिक बहिष्कार के प्रति लोगो को जागरूक करने में इनका अहम रोल है।

3. The All India Backward and Minority Communities Employees Federation- BAMCEF

जिसकी स्थापना स्थापना 1971 में कांशी राम, डी. के. खापर्डे, राम खोबरागड़े और दीनाभाना ने की थी। ये संस्था मुख्य रूप ये उन कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम करता है जो कार्यक्षेत्र में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के शिकार हुए है। 6 दिसंबर 1978 को बी. आर. अंबेडकर की पुण्यतिथि पर औपचारिक शुभारंभ हुआ था। इसकी स्थापना करने वाले कांशीराम ने इस संगठन का मूलमंत्र दिया ‘व्यवस्था को बदलना’ यानि की (Change the System)। कांशीराम ने इसे केवल दलित अधिकारों के लिए लड़ने वाली संस्था बनाने के बजाय बहुजन समाज का थिंक टैंक, टैलेंट बैंक और फाइनेंशियल बैंक बनाया।

. जो कि ऐसे लोगो को संस्था से जोड़ने लगा मजबूत है और अपने से जुड़े लोगो को भी मजबूत करें.. ताकि भेदबाव को खत्म किया जा सकें। ये केवल राज्य स्तर तक ही नहीं बल्कि जिला स्तरों  तक पीड़ितो के पास पहुंच रहा है। हालांकि BAMCEF इस, वक्त BSP के लिए shadow organisation) बन गया,, 1987 में BAMCEF को एक स्वतंत्र, गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में पंजीकृत करवाया गया हालांकि ये संस्था गलत जानकारी फैलाने के लिए विवाद में भी रहा था, लेकिन बावजूद इसके इस वक्त ये एक बड़े स्तर पर दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली संस्था है।

4.Minority Rights Group International

Minority Rights Group International की स्थापना साल 1969 में की गई थी.. इसका हेड ऑफिस यूके के लंदन में है। ये एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है.. मौजूदा समय में ‘ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ अमेरिकन स्टेट्स’ से भी इसे मान्यता मिली हुई। MRG को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) का सलाहकार माना जाता है। ये संस्था अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए व्यापक रूप से संघर्ष करने के लिए दुनियाभर में प्रचलित है।

दुनिया के कमजोर, पिछले तबके के लोगो के अधिकारों के लिए वैश्विक स्तर पर काम करता है। दलितो की स्थिति को दुनिया के सामने लाने में इनका योगदान काफी अहम है।

5, EQUALITY LABS

ये एक ऐसी संस्था है जिसमें वकीलो का समूह है..जो कि अंबेडकरवादी विचारधारा को फॉलो करते है। जो दक्षिण एशिया के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए दलित नेतृत्व में लड़ाई लड़ती है। ये संस्था अमेरिका में काम करती है, जो जाति विरोधी अभियानों और हाशिये पर पड़े लोगो के अधिकारो की सुरक्षा करता है.. जिसमें वो दलित अधिकारों की सुरक्षा के लिए डीजिटल सुरक्षा का इस्तेमाल करते है। इस संस्था की शुरुआत 2015 में हुई थी। जिसे थेनमोझी सौंदराजन , अरुणा संघपाली और वल्ली करुणाकरण ने मिलकर शुरु किया था।

अमेरिका में नस्लभेद और जातिगत भेदभाव को उजागर करने और ऐसे संवेदनशील विषयों पर जानकारी इकट्ठा करके उनके लिए कदम उठाने में सबसे पहले इसी संस्था का नाम आता है। कैर्लिफोर्निया में एसबी 403 के अभियान में इक्विटी लैब्स की भूमिका काफी अहम रही थी। ये पहली ऐसी संस्था होगी जो दलित नारीवादी विचारधारा पर चलता है, जहां दलित महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाई जाती है। इनके अलावा भी अनगिनत संस्थाये है जो बाबा साहब के नक्शे कदम पर चलकर दलितों और पिछड़ो को लिए लड़ रहे है। लेकिन विडंबना ये है कि दलितों की स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं आया है।

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