Top 5 Dalit news: एमपी में दबंगई पड़ोसी के बगीचे में गिरा पेड़, तो दलित पति-पत्नी को बेरहमी से पीटा

Dalit Couple Beaten Up, Lakhimpur-khiri News
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Top 5 Dalit news: कहते है कि जो अपने भगवान पर पूरा भरोसा रखेगा,, भगवान उनकी नैया कभी डूबने नहीं देंगे.. कुछ ऐसे ही नजारा इस वक्त देखने को मिल रहा है तमिलनाडु में.. जहां वाकई में दलितों के भगवान बाबा साहब अंबेडकर की कृपा देखने को मिली है.. जिन्होंने दलित सम्मान में चार चांद लगा दिये है। तो चलिए इस लेख में आपको पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियो में है।

तमिलनाडु में बाबा साहब की विचारधारा की जीत

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला तमिलनाडु से है, जहां एक्टर और अभी अभी नेता बने थालापति विजय ने बाबा साहब का केवल नाम लेकर इतिहास रच दिया है.. इतना ही नहीं विजय ने अपनी जीत की जश्न मनाते हुए भी बाबा साहब की तस्वीर को खुद के बगल में रख कर ही रोड शो किया है। सोशल मीडिया पर विजय का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है.. विजय ने 2024 में ही ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी बाबा साहब की विचारधारा पर चलेगी..इतनी ही नहीं उन्होंनो अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा था कि कुछ लोगो को बाबा साहब को क्रेडिट देने में परेशानी होती है लेकिन उनकी पार्टी या उनके सदस्य हमेशा बाबा साहब के ऋणी रहेंगे।

विजय बाबा साहब औऱ पेरियर की विचारधारा का अक्सर जिक्र करके साफ कर चुके है कि उनकी पार्टी के लिए सबसे पहली प्रायोरिटी दलित और पिछड़ा वर्ग ही होगा। विजय ने पहली ही बार में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की कुल सीटों 234 सीटों  में से 107 सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर बता दिया है कि राजनीति में कोई स्थापित नहीं और कोई नौसिखिया नहीं, जनता जिसे चाहे उसे शासन सौंप सकती है। वहीं विजय की जीत को आगामी यूपी विधानसभा चुनावों को लेकर भी चंद्र शेखर आजाद  और आजाद समाज पार्टी के लिए एक बड़ा मार्गदर्शक और हौसलो से भर देने वाली जीत करार दिया है। वैसे आपको बता दें कि आजाद यूपी में पहले ही कमर कस चुके है, अब देखना ये होगा कि क्या आजाद विजय की तरह धमाकेदार वापसी कर पायेंगे। वैसे आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

ओड़िसा में दलितो से सफाई करने के मामले में एससी सख्त

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला ओडिसा से है, जहां दलित आदिवासियों को जमानत देने के बदले पुलिस स्टेशन में सफाई करने का मामला अब सीधा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए ओडिसा हाइकोर्ट और प्रशासन को फटकार लगाते हुए सफाई करने की शर्त को “घिनौना” करार देते हुए पूरी तरह से जातिगत भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने निंदा करते हुए कहा कि वो न्यापालिका से काफी नाराज और निराश भी है. शर्तें साफ़ तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करती हैं, जो न्याय को नहीं बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता को बढ़ावा देती है।

एससी के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में खुद सुनवाई की है, ओड़िसा के कोर्ट की ये हरकते न्यापालिकता को बुरी तरह से बदनाम कर रही है.. जिन्हें संवैधानिक नियमो का भी डर नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर इस तरह की किसी भी शर्त को सिरे से खारिज करते हुए जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया.. अब देखना ये होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद क्या दलितों परिवार जो वहां माइनिंग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है, उनकी गुहार सरकार के कानो तक पहुंचेगी। क्या उन्हें न्याय मिलेगा।

मध्य प्रदेश में मामूली विवाद पर दलित दंपत्ति के साथ मारपीट

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के अशोकनगर से है.. मध्यप्रदेश दलितो के लिए कब्रगाह बनने की तरफ बढ़ चुका है। ताजा मामला अशोकनगर के कचनार थाना क्षेत्र के छीपोन गांव का है.. जहां तूफान से गिरे पेड़ को हटाने को लेकर जातिवादि दबंगो ने दलित दंपति को बुरी तरह से लाठी डंडो से पीटा। इस मारपीट का  वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पीड़ित युवक ने बताया कि उनके आंगन में लगा पेड़ आंधी में पड़ोसी के बगीचे में गिर गया था. जिसे वो और उनकी पत्नी हटा रहे थे, लेकिन तभी आरोपी वहां पहुंचे और पेड़ पर अपना हक जताने लगे.. पीड़ित ने इससे इंकार किया तो उन लोगो ने पीड़ित को पीटना शुरु कर दिया।

वहीं बीच बचाव करने आई पीड़ित की पत्नी को बुरी तरह घसीट घसीट के पीटा .. जिसका वीडियो भी सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए दो आरोपियो को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया औऱ तीसरे की तलाश जारी है। वहीं एसडीओपी विवेक शर्मा ने दबंगो को खुली चुनौती दी है कि वो किसी की दबंगई यहां नहीं चलने देंगे। लोग यहां बैखौफ हो कर रहे.. किसी को जाति के नाम पर प्रताड़ित करने नहीं दिया जायेगा.. और किसी ने किया तो वो सजा के लिए तैयार रहे। हैरानी की बात है कि अगर ऐसी सख्त व्यवस्था पूरे राज्य में होती तो शायद दलितो की स्थिति इतनी बुरी न होती।

यूपी में दलित इंजीनियर के साथ मारपीट का मामला गरमाया

दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से है, जहां दलित इंजीनियर पर नेता के साथ मारपीट करने का आरोप लगने के बाद दलित इंजीनियर पर हुई कार्यवाई को लेकर दलित समाज में काफी गुस्सा भर गया है। इतनी ही नहीं बिजली विभाग के दलित कर्मचारियों औऱ पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन नेदलित इंजीनियर के लिए न्याय की मांग करते हुए इस मामले में एकतरफा कार्यवाई को लेकर सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करने को कहा है, वर्ना असोसिएशन बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे कई अधिकारी है जिन्हें छोटे मोटे कारण बता कर उनका प्रोमोशन रोक दिया गया।

उन्हें अनुचित दंड दिया जा रहा है.. उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच उच्च स्तर पर की जानी चाहिए.. ताकि ये बात हो सकें कि राज्य में जानबूझ कर दलित इंजीनियरों और कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है.. और थक हाल कर पीड़ितो को हाई कोर्ट जाना पड़ रहा है। इस एकतरफा कार्यवाई के खिलाफ दलित अधिकारियों की ये एकता क्या सरकार को झुकने पर मजबूर करेगी..या दलितों का उत्पीड़न ऐसे ही जारी रहेगा। आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

मथुरा में सार्वजनिक प्लांट से पानी लेना पड़ा भारी

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के मथुरा से है, जहां जातिवादियों ने केवल एक दलित युवक को इसलिए पीटा क्योंकि उसने आरओ प्लांट से खुद पानी भरा था। ये घटना मथुरा जिले के थाना जैत क्षेत्र के छटीकरा–राधाकुण्ड का है, जहां दलित युवक कुलदीप दिवाकर जब प्लांट से पानी भर कर लौट रहा था, तभी कुछ जातिवादी लोगो ने पहले उसे घेर कर खुद पानी लेने के लिए जातिसूचक गालियां देना शुरु कर दिया.. लेकिन जब कुलदीप ने इसका विरोध किया तो दबंगो ने उसे इतनी बुरी तरह से पीटा कि वो लहूलूहान होकर बेहोश हो गया.. दबंग उसके बुरी तरह से पीटने के बाद उसे वहीं मरने के लिए छोड़ कर फरार हो गए।

कुलदीप को घायल अवस्था में किसी राहगीर ने देखा और उसकी जानकारी उसके परिवार को दी। कुलदीप की हालाच अभी भी काफी गंभीर बनी हुई है। वहीं इस मुद्दे पर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी आवाज उठाते हुए यूपी सरकार को घेरा.. उन्होंने पीड़ित परिवार से न्याय की मांग की है.. लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यूपी में प्रशासन और कानून व्य़वस्था नही बल्कि जंगल राज शुरु हो चुका है। ऐसे में देखना ये होगा कि न्य़ाय पालिका वाकई में उन्हें न्याय दिला भी पायेगी या नहीं।

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