Top 5 Dalit news: दलितों को बराबरी का हक देने के लिए भले ही आरक्षण मिला हो.. सरकार मदद के नाम पर लाखों करोड़ो खर्च करने के दावे करती हो.. लेकिन आज भी आकड़े उठा कर देखा जाये तो कितने प्रतिशत दलितों और पिछड़ो को उनका जायज अधिकार मिलते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
महाराजगंज में दलित परिवार के साथ बर्बरता
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के छत्तरपुर से है जहां जबरन दलितों से दक्षिणा के नाम पर हफ्ता वसूली की जा रही है.. जिससे तंग आकर जब अहिरवार समाज से आने वाले एक परिवार ने 100 किलो गेहूं देने से इंकार कर दिया तब जातिवादी आतंकियों ने पूरे परिवार को लाठियों से बुरी तरह से पीटा। दिल को झकझोर कर देने वाली ये घटना महाराजगंज के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के राजनगर गांव का है, इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है.. पीड़ित परिवार मदद की गुहार लगा रहा है लेकिन दबंग लगातार पीट रहे है।
पीड़ित परिवार के मुताबिक मंदिर में दक्षिणा के नाम पर हफ्ता वसूली से वहां के दलित परिवार काफी परेशान हो गए है.. इतना ही नहीं अवैध वसूली करने वाले असामाजिक तत्वों ने दलित किसान से 1 क्विंटल गेहूं की मांग की थी, लेकिन पीड़ित किसान ने 50 किलो गेहूं देने के लिए हां कहा तो दबंगो ने गुस्से में आकर पूरे परिवार को बुरी तरह से पीटा।
इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग करते हुए आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने औऱ पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग की है। साथ ही धर्म के नाम पर जबरन उगाही करने वालो के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। इस मामले में अभी तक पुलिस की कोई कार्यवाई न करना भी एमपी में फेल कानून व्यवस्था की पोल खोल रही है। अब देखना ये होगा कि पुलिस प्रशासन इस मुद्दे पर क्या एक्शन लेती है।
बेटे के इंटरकास्ट शादी पर पिता की हत्या
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला गुजरात के अहमदाबाद से है, जहां एक दलित व्यक्ति के बेटे ने अंतरजातिय शादी क्या कर ली.. उससे नाराज जातिवादी दबंगो ने 52 साल के दलित युवक को पीट पीट कर मार डाला। ये घटना अहमदाबाद के आनंदनगर इलाके के जीवराज पुल की है। मृतक के बेटे कौशिक ने आनंदनगर पुलिस थाने में अपने पिता के साथ हुई बर्बरता को लेकर तहरीर देते हुए कहा कि उसने 4 साल पहले ठाकुर समाज की एक लड़की से इंटरकास्ट शादी कर ली थी, जिसके कारण लड़की का परिवार काफी नाराज था। मगर पिछले कुछ दिनो ने उनका अपनी पत्नी से झगड़ा चल रहा था और वो मायके चली गई थी।
इसी बार उसे खबर मिली की उसके पिता नाटू परमार पर किसी ने लोहे की रॉड और लाठियों से हमला कर दिया है, किसी तरह से आनन फानन में उन्हे पारेख अस्पताल पहुंचाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कौशिक ने इस मामले में 4 लोगो के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया है… वहीं पुलिस आगे की जांच कर रही है। अब देखना ये होगा कि पुलिस का क्या एक्शन सामने आता है।
सीकर में तुगलगी फरमान सुनाना पड़ा भारी
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के सीकर से है, जहां दलितो को नीच और अछूत समझने की मानसिकता पर सख्त कानून के बाद भी कोई लगाम नहीं लग रही है.. ऐसे में केवल सोशल मीडिया ही दलितो का सहारा बन रहा है। जाता मामला सीकर जिले के शाहपुरा ठिकरिया गांव है, जहां दलितो के मंदिर में प्रवेश को लेकर एक तुगलकी फरमान जारी किया गया था, लेकिन सोशल मीडिया की ताकत और संविधान के खौफ ने इस जातिवादियों को माफी मांगने पर मजबूर कर दिया। दरअशल तेजाजी मंदिर में आयोजित सर्व समाज ने मंदिर बैठक में ये फैसला सुनाया था कि आगामी यज्ञ-हवन समारोह में दलित जाति के लोग शामिल नहीं हो सकते है।
खासकर महिलाओ के शामिल होने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई, जिसे वहां बैठे लोगो ने स्वीकार भी कर लिया था.. लेकिन इस घटना का एक वीडियो सामने आ गया.. बस फिर क्या था, दलित संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया.. नतीजा, मामले को बढ़ता देखकर आखिरकार समीति के सदस्य बाबूलाल यादव ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और मामले को खत्म करने की अपील की है, लेकिन सवाल ये है कि जब भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 सीधे तौर पर छुआछूत को कानूनी अपराध मानता है, तो फिर आखिर किसकी शय पर ये जातिवादी लोग दलितों को समान से बहिष्कृत करने की पुरजोर कोशिश कर रहे है।
मुरैना में पुरानी रंजिश के चलते दलित को बुरी तरह से पीटा
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ही मुरैना से है, जहां किसी पुराने मामले में जबरन राजीनामा बनाने के लिए एक दलित रिक्शा चालक को पहले अगवा करके उसे बुरी तरह से पीटा गया औऱ फिर गले में जूतों की माला डालकर अर्धनग्न कर पूरे गांव में घुमाया भी। ये मामला मुरैना के सिविल लाइन थाना के जतावर गांव का है, पीड़ित दलित युवक ने बताया कि वो मजदूरी के साथ साथ ई रिक्शा चालक है, रोज की तरह वो काम पर गया था, लेकिन नेशनल हाईवे-44 पर सिकरोदा नहर के पास कुछ लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में वहां पहुंचे और उसे जबरन ई रिक्शा के पटक कर बुरी तरह से पीटा और फिर उठा कर गंगापुर ले गए..जहां बंधक बना कर पीटा गया और फिर नंगा करके गांव में घुमाया गया।
पुलित के मुताबिक बीते साल दीवाली के मौके पर आरोपियों और पीड़ित के बीच विवाद हुआ था, और तब भी आरोपियो ने मारपीट की थी, लेकिन लेकर पीड़ित ने कंम्लेन कर दी थी, अब दबंग उसके लिए राजनामा का दवाब बना रहे थे, लेकिन पीड़ित ने मना कर दिया.. जिससे नाराज होकर दबंगो ने पीड़ित को इस तरह स प्रताड़ित किया। सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव के मुताबिक 4 आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकियों की तलाश जारी है। वहीं भीम आर्मी के कार्यकर्ताओ ने पुलिस से मांग रखी है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो.. ताकि पीड़ित को पूरा न्याय मिले। अब देखना ये होगा कि पुलिस कब तक बाकि के आरोपियो को गिरफ्तार करती है।
विजयवाड़ा में दलित बस्ती को बनाया बंधक
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से है, जहां अब दलितो को कैद करके उन्हें अपना गुलाम बनाने की बड़ी साजिश सामने आ रही है। ये घटना विजयवाड़ा के पश्चिम गोदावरी जिले के अकीवीडु के पेडापेटा का है, जहां अंबेडकर स्मृति वनम के पास विवादित मंदिर का ढांचे को रात के अंधेरे में जातिवादियों दवारा गिरा दिया गया, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक विवादित धार्मिक ढांचों के साथ छेड़छाड़ करना मना है, लेकिन दलित बस्ती में होने के कारण कानून को ताक पर रख कर तोड़ दिया गया ऊपर से प्रशासन ने दलित बस्ती में कैमरे लगा कर पाबंदियां लगा दी है, ताकि वो इस मामले में आवाज भी न उठा सकें… पुलिस गांव में आने जाने वाले हक एक का ब्यौरा जांच रही है।
जैसे वो इस देश के नागरिक नहीं बल्कि कोई रिफ्यूजी हो.. वहीं किसी बाहरी को दलित बस्ती में जाने भी नहीं दिया जा रहा है.. जिससे दलितों के अंदर डर कर माहौल है। वो समझ नही पा रहे है कि आखिर उन्हें किस गुनाह के लिए ऐसे गुलामो की तरह बंदी बना दिया गया है उन पर नजर रखी जा रही है। इस खबरे के सामने आने के बाद दलित संघठनो ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया है। वो इन प्रतिबंध को हटाने की मांग कर रहे है, साथ ही मंदिर को गिराने के मामले में जो भी जिम्मेदार है उसके खिलाफ कार्यवाही की जाये। हैरानी की बात है कि दलितों आजाद देश के नागरिक होकर भी आज भी गुलाम ही क्यों माने जाते है।



