कर्नाटक में दलित सीएम से लेकर बोकारो हत्याकांड तक, पढ़िए आज की Top 5 Dalit news

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Top 5 Dalit news: ऐसा क्यों है जो अधिकार सवर्णों को आसानी से मिलते है, उन अधिकारों तक पहुंचने के लिए भी दलितों को सालो आंदोलन करना पड़ता है.. तब भी जाकर उन्हें पूर्ण अधिकार मिलेगा भी या नहीं.. इसका भी नहीं पता होता.. और अगर किसी दलित ने कोई मुकाम हासिल भी कर लिया तो उसे आरक्षण की कसौटी पर तौल दिया जाता है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो गवाह है उस जीत का, जो दलितों को सालों की मेहनत के बाद मिली है। लेकिन क्या ये जीत उन्हें बराबरी देगी.. ये सबसे बड़ा सवाल है।

कर्नाटक की राजनीतिक उथलपुथल में दलितों की जीत

1 दलितों से जुड़ा पहला मामला कर्नाटक से है, जहां कि राजनीतिक उथलपुथल में आखिरकार दलित नेताओं और दलित संगठनों की लंबी लड़ाई रंग लाई और कांग्रेस ने अपनी जातिवादी मानसिकता को दरकिनार करते हुए डीके शिवकुमार को कर्नाटक राज्य के नए सीएम की पद के लिए चुन लिया। 3 जून की शाम 4 बजे बैंगलुरु के लोकभवन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने डीके शिवकुमार को सीएम पद की शपथ दिलाई। इसी के साथ कर्नाटक में दलित सीएम बनाये जाने की लंबी लड़ाई का भी अंत हो गया है, लेकिन अब सीएम के साथ साथ डिप्टी सीएम के लिए लड़ाई शुरु हो गई है और उम्मीद की जा रही है एक से ज्यादा डिप्टी सीएम हो सकते है।

जिसमें  वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर  का नाम सबसे पहले लिया जा रहा है..वहीं कहा जा रहा है कि डीके के मंत्रिमंडल में सभी जातियों को एकजुट करके पद दिये जायेंगे.. अब सवाल ये उठता है कि दलित सीएम तो बन गए लेकिन क्या केवल सीएम के दलित होने से कर्नाटक में दलितों की स्थिति में सुधार आयेगा। सरकार उनके विकास को लेकर कोई बड़े कदम उठायेगी.. वैसे आपको क्या लगता है।

पंजाब सरकार का दलित महिलाओं को बड़ी सौगात

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब से है, जहां दलित महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीएम भगवंत मान ने बड़ा कदम उठाया है। जी हां, आप की सरकार मे ऐलान किया है 1 जुलाई 2026 से हर महीने राज्य की 52 लाख महिलाओं को 1 हजार रूपय महीना दिया जायेगा, साथ ही दलित महिलाओं को ये रकम बढ़ा कर 1500 रूपय दिया जायेगा। ‘मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना’ के तहत सरकार ने राज्य की करीब 36 लाख महिलाओं को कार्ड भी जारी किये जा चुके है, और महीने के अंत तक सभी महिलाओं को योजना कार्ड मिल जायेंगे।

इस योजना को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 2026-27 के अपने बजट के दौरान करीब 9300 रूपय का प्रावधान दिया था। हालांकि इसमें तीन कैटेगरी की महिलाओं को बाहर रखा गया जिसमें सेनानिवृत रिटायर कर्मचारी, इनकम टैक्स देने वाली महिला औऱ मौजूदा और पूर्व विधायक। सरकार की इस योजना से दलित महिलाओं को बिना बजह बेगारी करने से आजादी मिलेगी।

बोकारो में गर्भवती दलित महिला की हत्या

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के बोकारो जिले से है, जहां रेलवे साइडिंग क्षेत्र से बचा हुआ कोयला इकट्ठा करने गई एक गर्भवती दलित महिला की हत्या कर दी गई… लेकिन पुलिस इस मामले को पूरी तरह से रफा दफा करने में कसर नहीं छोड़ रही है….ये मामला बेरमो पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धौरा कोयला स्थल का है, जहां सरकार ने रेलवे साइडिंग से जमा किये कोयले को रखा था। वहां के स्थानिय लोग कोयला लेकर जाते थे, मृतक अनिता देवी भी वहां कोयली लेने गई थी, लेकिन कोयले के बंटवारे को लेकर उसकी साथियों के साथ बहस हो गई.. जो धीरे धीरे हिंसक हो गई.. जब तक लोग आकर बीच बचाव करते तब तक अनिता बेहोश हो चुकी थी।

महिला ने दम तोड़ दिया

परिवार आनन फानन में अस्पताल ले गया लेकिन तब तक अनिता ने दम तोड़ दिया था। इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल है, मृतका के पति  महेश भुइयां ने पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया, कि उसकी पत्नी की हत्या की गई.. लेकिन साथ ही महेश ने पुलिस पर ये भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी के हत्यारो को बचाने की कोशिश कर रही है पुलिस.. तो वहीं अब इस मामले में राजनीति शुरु हो गई है।

बीजेपी के  प्रदेश महासचिव अमर कुमार बौरी ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग करते हुए इस घटना को क्रूर हत्या” करार दिया..साथ ही जिला प्रशासन पर मामले को दबाने का भी आरोप लगा दिया है.. हैरानी की बात है कि जब तक सड़के जाम नहीं की गई तब तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी.. हालांकि पुलिस ने छापेमारी की और 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया.. और आगे की जांच कर रहे है। ऐसे में पुलिस की कार्यवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। देखना ये होगा कि वाकई में आरोपी ही गिरफ्तार किये गए है या जगहसाई से बचने के लिए बेगुनाहों को फंसा कर जेल में डाल दिया गया है।

आंध्र प्रदेश में जातिगत भेदभाव को मिटाने की बड़ी पहल

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के तिरुपति से है, जहां एक तरफ देश के अन्य हिस्से में दलितों को मंदिर में प्रवेश करने पर अभी भी विवाद होता है वहीं तिरूपति में जातिगत भेदभाव को खत्म करने और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए हिंदू उपाध्याय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश डेगाला , जो कि एक सरकारी टीचर भी है उन्होंने अपने एक दलित सहकर्मी  मुनास्वामी नागराजन  को कंधो पर उठा कर तिरुपति के पास श्रीनिवास मंगपुरम स्थित ललिता पीठम मंदिर में प्रवेश कराया। जातिगत भेदभाव की मार झेल रहे समाज में महेश डेगाला का ये कदम काफी सराहनीय है।

ये घटना 2700 साल पहले हुई एक घटना का  पुनर्मंचन थी, जब भगवान रंगनाथ की स्तुति कर रहे दलित जाति से आने वाले अलवार को पंडित ने धक्का देकर साइड कर दिया था, जिससे वो गिर पड़े और उन्हें चोटे आई, लेकिन शरीर के जिन अंगो से उनके खून निकल रहा था, भगवान की मूर्ति के उस हिस्से से खून बह रहा था, तब पंडित को अपनी गलती का अहसास हुआ, पंडित ने अलवार से माफी मांगी और उन्हें अपने कंधे पर उठाकर मंदिर के भीतर ले गया। इसी घटना को फिर से तिरूपति के मंदिर में दोहराया गया है। इतना ही नहीं इसके बाद मंदिर के अंदर सभी जाति के लोगों ने एक साथ बैठ कर खाना भी खाया। ये सबूत है उस बात का कि देर से ही सही, लेकिन दलितों को सम्मान और न्याय जरूर मिलेगा।

यूपी सरकार की दमनकारी फैसले से भड़के आजाद

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जहां आजाद शिक्षा को मुफ्त करने की बात कर रहे है वहीं मौजूदा सरकार ने शिक्षकों के पेट पर लात मारने का पूरा बंदोबस्त कर दिया है। हैरानी की बात है कि नाकामी को छिपाने के लिए सरकार ने प्रयागराज के तीन कोचिंग संस्थानों के सील करने का आदेश दिया है, जबकि पेपर के लीक होने की सारी जिम्मेदारी तो सरकार की है, मगर ठीकरा वो कोचिंग क्लास पर फोड़ रहे है। जिसे लेकर भीम आर्मी चीफ ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की शिक्षकों पर दमनात्मक कार्यवाही सरासर नाइंसाफी है।

वहीं तीनों कोचिंक सेंटर में से एक EXAMPUR जो कि पिछले 8 सालों से यूपी के परीक्षाओं की तैयारी करा रहा है, उसके संस्थापक विवेक कुमार ने रोते हुए मदद की गुहार लगाई है।  बता दें कि 8 , 9, 10 जून को यूपी पुलिस का एग्जाम है, लेकिन कोचिंग पर लगे ताले के कारण सारी प्रैक्टिस ठप है.. वहीं आजाद ने भी शिक्षको और कोचिंग सेंटर के खिलाफ जारी तुगलकी फरमान के बाद सरकार को चेतावनी दी है कि अगर शिक्षकों के खिलाफ यह कार्यवाही वापस नहीं हुई तो जल्द प्रयागराज या लखनऊ में बहुत बड़ा आंदोलन होगा। हैरानी की बात है सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए सैकड़ो लोगो की नौकरी खाने से भी पीछे नहीं हट रही है..अब देखना ये होगा कि आजाद की चेतावनी के बाद क्या सरकार अपना फैसला बदलती है या नहीं।

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